शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा हाई है। क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग के डर से कांग्रेस अपने विधायकों को सुरक्षित रखने के लिए बेंगलुरु शिफ्ट करने की तैयारी में थी। लेकिन राजधानी के राजाभोज एयरपोर्ट पर इस ‘एयरलिफ्ट’ प्लान को तब बड़ा झटका लगा, जब एटीसी (ATC) क्लियरेंस न मिलने के कारण विधायकों के विशेष विमान को एयरपोर्ट पर ही रोक दिया गया।

डीजीसीए (DGCA) की अनुमति के बिना उड़ान से इनकार

एयरपोर्ट सूत्रों से मिली ताजा जानकारी के अनुसार कांग्रेस विधायकों को ले जाने के लिए विशेष चार्टर्ड विमान भोपाल एयरपोर्ट पहुंच तो गया था लेकिन एयरपोर्ट अथॉरिटी ने इसे टेक-ऑफ करने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया।

डीजीसीए (DGCA) के कड़े नियमों और अनुमति के बिना एटीसी ने विमान को क्लियरेंस देने से मना कर दिया। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक सभी यात्रियों का सही तरीके से वेरिफिकेशन नहीं हो जाता, तब तक विमान उड़ान नहीं भर सकेगा।

75 सीटर प्लेन… और पहुंच गए 100 से ज्यादा दावेदार!

इस तकनीकी पेंच के पीछे की मुख्य वजह एयरपोर्ट पर हुआ मिसमैनेजमेंट बताया जा रहा है। राज्यसभा चुनाव में सेंधमारी से बचने की हड़बड़ी में कांग्रेस ने 75 सीटों वाला विशेष विमान बुक किया था। लेकिन पासा तब पलट गया जब एयरपोर्ट पर विधायकों के साथ-साथ उनके परिवार के सदस्य, करीबी और समर्थक भी भारी-भरकम सामान के साथ पहुंच गए।

नतीजा यह हुआ कि सीटों की क्षमता 75 थी और वहां 100 से ज्यादा लोग सवार होने के लिए तैयार खड़े थे। इसी ओवरलोडिंग और यात्रियों की सूची में अचानक हुए बदलाव के कारण सुरक्षा जांच और आईडेंटिफिकेशन की प्रक्रिया अटक गई, जिसने विमान के पहिए थाम दिए। फिलहाल, राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले सुरक्षा के फेर में हुए इस ‘एयरपोर्ट ड्रामे’ और विमान रुकने की घटना ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं छेड़ दी हैं।

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