कानपुर. उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए चलाए जा रहे अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं. सरकार की किसान-हितैषी नीतियों और तकनीकी सहायता के बल पर प्रदेश के किसान अब खेती में नए आयाम स्थापित कर रहे हैं. इसी क्रम में कानपुर जिले के सरसौल ब्लॉक स्थित महुआ गाँव के प्रगतिशील किसान भंवर पाल सिंह राज्य के कृषि विकास की एक बेहतरीन मिसाल बनकर उभरे हैं.
भंवर पाल सिंह पिछले 26 वर्षों से बड़े पैमाने पर आलू का उत्पादन कर रहे हैं. इस वर्ष उन्होंने 75 एकड़ ज़मीन पर आलू की सफल पैदावार की. अपनी इस रिकॉर्ड पैदावार को हासिल करने के लिए भंवर पाल सिंह ने गुणवत्तापूर्ण और उन्नत किस्मों के चयन पर विशेष ध्यान दिया. उन्होंने अपने खेतों में कुफ़री बहार, चिपसोना-1, चिपसोना-3, कुफ़री मोहन, चंद्रमुखी, पुष्कर और आनंद जैसी उच्च पैदावार देने वाली आलू की किस्मों की बुआई की थी. इन उन्नत किस्मों के सही प्रयोग और बेहतर देखरेख के कारण ही फसल की गुणवत्ता बाज़ार की माँग के अनुकूल रही और उन्हें फसल के वाजिब दाम मिले.
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बेहतर प्रबंधन के तहत उन्होंने कुल उत्पादन का 25 प्रतिशत भाग अपने पास सुरक्षित रखा, जबकि 75 प्रतिशत हिस्से को बाज़ार में 1,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचा. उनका उत्पादित आलू बंगाल के साथ-साथ प्रदेश के प्रमुख जिलों जैसे आगरा, फ़िरोज़ाबाद, कन्नौज, उन्नाव और फ़तेहपुर के बाज़ारों तक पहुँचा. इस पूरी फसल से उन्हें कुल 75 लाख रुपये का कारोबार प्राप्त हुआ, जिसमें से तमाम लागतें निकालने के बाद लगभग 40 लाख रुपये की शुद्ध बचत हुई.
कृषि के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्य और बंपर पैदावार के लिए हाल ही में वर्ष 2026 में मेरठ में आयोजित ‘राष्ट्रीय आलू दिवस’ समारोह में उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया. उल्लेखनीय है कि भंवर पाल सिंह इससे पूर्व देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त कर चुके हैं. अपनी इस सफलता और सरकारी सहयोग पर प्रगतिशील किसान भंवर पाल सिंह ने कहा, “यदि किसान स्वयं जागरूक रहे और खेती की आधुनिक तकनीकों को अपनाए, तो उसे अपनी पैदावार की बहुत अच्छी कीमत मिल सकती है. योगी सरकार द्वारा किसानों को दिए जा रहे प्रोत्साहन, सुरक्षित बाज़ार और अनुकूल माहौल की बदौलत आज खेती एक लाभदायक व्यवसाय का रूप ले चुकी है.”


