अजयारविंद नामदेव, शहडोल। शहर में भविष्य की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए सोन नदी पर प्रस्तावित 27 करोड़ 40 लाख रुपये के बैराज निर्माण का सपना इन दिनों प्रशासनिक विवाद और प्रक्रियाओं की उलझनों में फंसता नजर आ रहा है। संभागीय मुख्यालय से लगे धुरवार-नवलपुर क्षेत्र में बनने वाले इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को खनिज प्रतिष्ठान मद से स्वीकृति मिल चुकी है, टेंडर प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है लेकिन निर्माण कार्य कब शुरू होगा यह तय नहीं हो पाया है।
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वैकल्पिक जल आपूर्ति व्यवस्था का अहम हिस्सा
यह बैराज शहडोल शहर की वैकल्पिक जल आपूर्ति व्यवस्था का अहम हिस्सा माना जा रहा है। सरफा डैम में जल संकट की स्थिति बनने पर सोन नदी का यह बैराज शहरवासियों की प्यास बुझाने का प्रमुख स्रोत होगा। इसके बावजूद परियोजना प्रशासनिक स्तर पर उलझी हुई है।
नगर पालिका परिषद और प्रशासन में खीचतान
नगर पालिका परिषद और प्रशासन के बीच चल रही खींचतान के कारण निर्माण कार्य में लगातार देरी हो रही है। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी काम शुरू नहीं कराया जा रहा। दूसरी ओर नगर पालिका प्रशासन का कहना है कि मामला अभी विभागीय प्रक्रिया में है और सभी कार्य नियम के अनुसार ही किए जाएंगे।
स्थानीय लोगों में बढ़ी चिंता
इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। नागरिकों का मानना है कि जल संकट से जुड़ी इतनी महत्वपूर्ण परियोजना को विवादों से दूर रखकर शीघ्र पूरा किया जाना चाहिए। अब निगाहें प्रभारी मंत्री और उच्च प्रशासनिक स्तर पर टिकी हैं। जिनके हस्तक्षेप के बाद ही यह तय होगा कि शहर को समय पर बैराज मिलेगा या फिर विकास की यह योजना फाइलों में ही उलझी रहेगी।
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पल्ला झाड़ रहे जिम्मेदार
नगर पालिका अध्यक्ष घनश्यामदास जायसवाल ने कहा कि परिषद ने अपना दायित्व निभाते हुए प्रस्ताव पारित कर दिया था और निर्माण कार्य अब तक शुरू हो जाना चाहिए था। वहीं CMO आशा भंडारी का कहना है कि टेंडर की प्रक्रिया उनके कार्यभार संभालने से पहले ही पूरी हो चुकी है। प्रकरण भोपाल स्तर पर विचाराधीन होने के कारण विलंब हो रहा है।

