पुरी: एनिमेशन फिल्म ‘महाप्रभु श्री जगन्नाथ’ को लेकर पूरे ओडिशा में विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। जगन्नाथ संस्कृति शोधकर्ता सूर्य नारायण रथशर्मा ने फिल्म का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि इसके प्रदर्शन से परंपरा और संस्कृति का अपमान होगा। उन्होंने मांग की है कि निर्माण संस्था भगवान जगन्नाथ को ‘कार्टून’ के रूप में चित्रित करने से बचे।
दूसरी ओर, इस एनिमेटेड फिल्म के प्रदर्शन से जुड़ी जनहित याचिका (PIL) पर ओडिशा हाईकोर्ट में सुनवाई 13 अगस्त तक के लिए टल गई है। फिल्म में महाप्रभु की संस्कृति, रीति-रिवाजों और परंपराओं को तोड़-मरोड़कर पेश करने के आरोपों के चलते हाईकोर्ट ने इसके प्रदर्शन पर रोक लगाई थी। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले फिल्म पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था, लेकिन अब हाईकोर्ट के अगले आदेश पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

फिल्म में काल्पनिक कहानी दिखाए जाने को लेकर श्रीमंदिर प्रचार-प्रसार उपसमिति का विरोध जारी है। इससे पहले गजपति महाराज दिव्यसिंह देव की अध्यक्षता में श्रीमंदिर प्रबंधन समिति के सदस्यों और विद्वान पंडितों की बैठक हुई थी।
‘एली एनिमेशन प्राइवेट लिमिटेड’ के निर्माता ने फिल्म की कहानी को पूरी तरह काल्पनिक स्वीकार करते हुए इसकी रिलीज टालने का आश्वासन दिया था। गजपति दिव्यसिंह देव का कहना है कि युवाओं द्वारा महाप्रभु की महिमा बच्चों तक पहुंचाना सराहनीय है, लेकिन यह सनातन शास्त्रों और पौराणिक संदर्भों के आधार पर होना चाहिए। जगद्गुरु शंकराचार्य ने भी इस पर नाराजगी जताई है।
संस्कृति प्रेमियों का मानना है कि ऐसी काल्पनिक कहानियों से बच्चों में गलत धारणा बनेगी। उन्होंने निर्माताओं से अपील की है कि वे स्कंद पुराण पर आधारित वास्तविक पौराणिक कथाओं पर ही फिल्म बनाएं।
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