तमिलनाडु में भाषा नीति को लेकर विवाद जारी है. इसी क्रम में करूर और कोयंबटूर के सरकारी अस्पतालों में दवा के कवर पर हिंदी में निर्देश छपने का एक नया विवाद सामने आया. जहां मरीजों को दी जाने वाली दवाओं के कवर पर तमिल और अंग्रेजी के साथ हिंदी में भी निर्देश छपे थे. जिसके बाद DMK नेता टीआरबी राजा ने सवाल उठाया कि क्या तमिलनाडु के सरकारी अस्पतालों में भी तीन भाषा नीति लागू की जा रही है?

दवा की पैकेजिंग पर खुराक संबंधी निर्देश तमिल, अंग्रेजी और हिंदी में छपे होने के बाद नेताओं ने इसकी तीखी आलोचना की. विवाद बढ़ने के बाद अस्पताल प्रशासन ने ऐसे कवर का इस्तेमाल रोक लगा दी है.

तमिलनाडु की भाषा नीति को लेकर विवाद इतना गहरा और पुराना है कि सरकारी अस्पताल भी इससे अछूता नहीं रहा. सिर्फ मरीजों को दी जाने वाली दवाओं के कवर पर तमिल और अंग्रेजी के साथ हिंदी में भी निर्देश छपे थे, जिसके बाद राजनीतिक विवाद इतना बढ़ गया कि कोयंबटूर और करूर के सरकारी अस्पतालों ने हिंदी समेत तीन भाषाओं में छपे दवाओं के कवर का वितरण रोक दिया है.

राज्य के स्वास्थ्य मंत्री केजी अरुणराज ने इसकी जानकारी दी है. यह मामला सामने आने के बाद राज्य की दो भाषा नीति और सरकारी संस्थानों में हिंदी के इस्तेमाल को लेकर बहस शुरू हो गई.

DMK नेता टीआरबी राजा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दवा के कवर की तस्वीरें शेयर करते हुए पूछा कि क्या तमिलनाडु के सरकारी अस्पतालों में भी तीन भाषा नीति लागू की जा रही है? उनके मुताबिक करूर के बाद कोयंबटूर में भी दवाओं के कवर पर तीन भाषाओं में निर्देश लिखे मिले.

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