न्यामुद्दीन अली, अनूपपुर। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिला न्यायालय के विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) कृष्णा डागलिया की अदालत ने जैतहरी थाना क्षेत्र के एक चर्चित पॉक्सो प्रकरण में आरोपी को नाबालिग से दुष्कर्म और उसकी हत्या का दोषी ठहराते हुए कठोर दंड सुनाया है। न्यायालय ने पॉक्सो अधिनियम के तहत 30 वर्ष के सश्रम कारावास तथा हत्या के अपराध में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक हेमंत अग्रवाल ने पैरवी की। पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार पीड़िता और आरोपी की पहचान गोपनीय रखते हुए उनके नाम प्रकाशित नहीं किए गए हैं। न्यायालय ने पीड़िता को नियमानुसार समुचित प्रतिकर (सहायता राशि) उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए हैं।

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पत्थर से कुचलकर हत्या

विशेष लोक अभियोजक के अनुसार, जैतहरी थाना पुलिस को पनिका डोगरी जंगल के समीप नाले के पास 13 वर्षीय बालिका का शव नग्न एवं लहूलुहान अवस्था में मिला था। सूचना मिलने पर एफएसएल टीम मौके पर पहुंची और पोस्टमार्टम सहित वैज्ञानिक जांच कराई गई। जांच में सामने आया कि बालिका के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसका गला काटकर तथा पत्थर से कुचलकर हत्या की गई थी।

आजीवन कारावास की सजा प्रभावी

विवेचना के दौरान वैज्ञानिक साक्ष्यों और डीएनए जांच से आरोपी की संलिप्तता प्रमाणित हुई। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से हत्या में प्रयुक्त नेल कटर में लगा चाकू, घटना के समय पहने कपड़े तथा अन्य महत्वपूर्ण सामग्री जब्त की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया। अदालत ने आदेश दिया कि आरोपी पहले पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत 30 वर्ष का सश्रम कारावास भुगतेगा, इसके उपरांत हत्या के अपराध में सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा प्रभावी होगी। अभियोजन के अनुसार, आरोपी पहले से ही पीड़िता की मां की हत्या के एक अन्य मामले में जेल में निरुद्ध है।

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