केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल ने जवानों में खुदकुशी के मामलों को रोकने के लिए महानिदेशक की अध्यक्षता में 10 वरिष्ठ अधिकारियों का एक कोर ग्रुप गठित किया है. इस ग्रुप में डीजी के अलावा 9 अन्य अधिकारी शामिल हैं. बल में ऐसी घटनाएं न हों, उन्हें रोकने के लिए क्या किया जाए, इस बाबत कोर ग्रुप द्वारा उपाय सुझाए जाएंगे. यह कदम वर्ष 2025 में बल में सुसाइड के 59 मामले सामने आने के बाद उठाया गया है, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक हैं.

कम्पनी लेवल के अधिकारी सहायक कमांडेंट, डिप्टी कमांडेंट, टूआईसी, यूनिट कमांडेंट को इस कमेटी से बाहर रखा गया है. जिसके बाद जी जीपी सिंह की अध्यक्षता वाली कोर ग्रुप पर सवाल उठने लगे हैं.

यह कोर ग्रुप हर माह सीआरपीएफ मुख्यालय में बैठक करेगा. बल मुख्यालय में कार्यरत डीआईजी (कल्याण) को ग्रुप का संयोजक बनाया गया है. अधिकारियों के मुताबिक, ये नया ग्रुप हर मामले की विस्तार से जांच करेगा और यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि जवानों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था.

सूत्रों के अनुसार, 2021-25 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 77 प्रतिशत से अधिक मामलों में कर्मियों ने ड्यूटी के दौरान अपनी जान दी। कुल 262 मामलों में से 202 घटनाएं उस समय हुईं जब जवान ड्यूटी पर तैनात थे. इसके आधार पर मानसिक स्वास्थ्य, परिवार से जुड़े मामलों, प्रशासन और जवानों की सुविधाओं में सुधार के लिए कदम उठाए जाएंगे.

हालांकि, इस कोर ग्रुप पर सवाल भी उठने लगा है. अलायंस ऑफ ऑल एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस वेलफेयर एसोसिएशन (AAPWA) के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा है कि दैनिक जीवन में होने वाली कठिनाईयों के बारे में साथ रहने वाले सब इंस्पेक्टर या इंस्पेक्टर से बेहतर कोई और नहीं जान सकता है. विडंबना यह है कि निचले रैंक को बल के शीर्ष कोर ग्रुप से पूरी तरह बाहर रखा गया है.

AAPWA एक ऐसा संगठन है जो CAPF और अर्धसैनिक बलों के सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मियों के अधिकारों और कल्याण के लिए लड़ता है.

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