दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में पांच वर्षीय बालिका से लैंगिक अपराध के मामले में बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है, जहां विशेष कोर्ट (पॉक्सो) ने आरोपी को आजीवन कारावास सहित कई सजाओं से दंडित किया है।

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बताया जा रहा है कि पांच वर्षीय बच्ची 10 अप्रैल को दुकान में समान खरीदने गई थी, तभी आरोपी ने लालच देकर अपने घर बुलाया और नशे की हालत में बच्ची के साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद आरोपी ने बच्ची के बेहोश होने पर उसके हाथ-पैर को तकिए के कवर और टॉवेल से बांध दिया। इसके बाद उसे बोरी में भरकर पास के खण्डर नुमा घर के झड़ियो में फेंक दिया, लेकिन वहां से गुजर रहे लोगों की नजर उस बोरे पर पड़ी और बच्ची को तुरंत अस्पताल पहुंचाया।

शिकायत के बाद आरोपी गिरफ्तार

परिजनों की शिकायत के बाद उतई पुलिस ने तत्काल अपराध दर्ज कर जांच शुरू की और आरोपी धनेंश्वर साहू उर्फ जनता (40), निवासी बंजारीपारा, उतई को 11 अप्रैल को गिरफ्तार किया। जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने 25 अप्रैल को न्यायालय में अभियोग पत्र पेश किया।

न्यायिक अभिलेख के अनुसार, आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2), 87, 109, 238 एवं 65(2), लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 की धारा 5(ड) सहपठित धारा 6 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(2)(v) के अंतर्गत अभियोजन चलाया गया।

न्यायालय ने अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई

विशेष न्यायालय (पॉक्सो), दुर्ग ने 25 सितंबर को दोषसिद्धि का फैसला सुनाया, जबकि 26 सितंबर को सजा का आदेश पारित किया। आरोपी को विभिन्न धाराओं में आजीवन कारावास, 10 वर्ष, 7 वर्ष और 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही अलग-अलग धाराओं में कुल 13 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड जमा नहीं करने पर अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है।

रूपवती तेलीदार ने की न्यायालय में पैरवी

मामले की जांच और वैधानिक कार्रवाई में नगर पुलिस अधीक्षक नेवई भारती मरकाम, तत्कालीन उतई थाना प्रभारी निरीक्षक महेश ध्रुव, उप निरीक्षक प्रमोद सिन्हा सहित उतई थाना पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मामले में विशेष लोक अभियोजक रूपवती तेलीदार ने न्यायालय में पैरवी की।

नागरिकों से अपील

दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से बच्चों की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस ने कहा कि बच्चों के साथ किसी भी प्रकार के लैंगिक अपराध, शोषण या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें। साथ ही पीड़ित बच्चे की पहचान और निजता की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने तथा संवेदनशील जानकारी अनावश्यक रूप से सार्वजनिक नहीं करने की अपील की गई है।

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