अजयारविंद नामदेव, शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में अवैध रूप से मवेशियों के परिवहन के खिलाफ की गई बड़ी कार्यवाही अब विभागीय क्रेडिट वॉर का कारण बन गई है। एक ओर जहां पुलिस विभाग ने अपनी जारी प्रेस विज्ञप्ति में मवेशियों को भूसे की तरह ट्रक में भरकर बूचड़खाने ले जाए जाने से पहले पकड़ने की कार्रवाई का दावा किया है, वहीं दूसरी ओर वन विभाग ने भी लगभग इसी तरह की प्रेस विज्ञप्ति जारी कर उक्त कार्यवाही को अपनी उपलब्धि बताया है।
मामला दक्षिण वनमंडल शहडोल के गोहपारू वन परिक्षेत्र अंतर्गत वन अवरोध नाका गोहपारू का है, जहां 19 फरवरी की सुबह लगभग 5 बजे ड्यूटी पर तैनात वनकर्मियों द्वारा वाहन क्रमांक UP71BT1211 को संदिग्ध अवस्था में रोका गया, वाहन की तलाशी लेने पर उसमें करीब 5 से 6 दर्जन मवेशी ठूंस-ठूंस कर भरे पाए गए, जिन्हें कथित रूप से अवैध तरीके से बूचड़खाने ले जाया जा रहा था..
वन विभाग के अनुसार, वाहन को पकड़ने के बाद उसमें सवार लगभग 30 लोगों द्वारा विभागीय वाहन को घेर लिया गया और विरोध की स्थिति निर्मित हो गई, जिसके बाद डायल 112 के माध्यम से पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया, पुलिस टीम के पहुंचने के पश्चात संयुक्त रूप से सभी मवेशियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और अवैध परिवहन की कार्रवाई को रोका गया।
बताया जा रहा है कि कार्यवाही के दौरान अवैध परिवहन में लिप्त आरोपियों द्वारा वन अमले के साथ धक्का-मुक्की भी की गई, वहीं दूसरी ओर पुलिस विभाग ने अपने प्रेस नोट में इस पूरी कार्यवाही को अपनी सतर्कता का परिणाम बताया है।
अब सवाल यह उठता है कि आखिरकार इस बड़ी कार्यवाही का श्रेय किसे दिया जाए,वन विभाग को, जिसने सबसे पहले वाहन को रोका या पुलिस विभाग को, जिसकी मौजूदगी में मवेशियों को सुरक्षित निकाला गया। फिलहाल, संयुक्त कार्यवाही के इस मामले में दोनों विभाग अपनी-अपनी उपलब्धि गिनाने में लगे हैं, जबकि वास्तविकता क्या है, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
हैरानी की बात यह है कि एक ही कार्यवाही पर पुलिस और वन विभाग, दोनों ही अपनी-अपनी पीठ थपथपा रहे हैं। दोनों विभागों ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मवेशियों को बूचड़खाने ले जाए जाने से पहले पकड़ने का दावा किया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिरकार इस बड़ी कार्यवाही का असली श्रेय किसे मिलेगा पुलिस को या वन विभाग को।

