Business Desk- Crude Oil Price : मंगलवार को एशियाई बाजारों में शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतें बढ़ गईं, जब ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को ठुकरा दिया. अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष को खत्म करने के मकसद से हो रही बातचीत कमजोर नजर आ रही थी. ईरान की तरफ से अमेरिका के प्रस्ताव पर जो जवाब आया, उससे साफ तौर पर मतभेद सामने आए, जिससे तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं बनी रहीं.

ब्रेंट क्रूड वायदा 30 सेंट, या 0.29 प्रतिशत बढ़कर 104.51 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 31 सेंट, या 0.32 प्रतिशत बढ़कर 0002 GMT तक 98.38 डॉलर पर पहुंच गया. सोमवार को दोनों ही बेंचमार्क में लगभग 2.8 प्रतिशत की तेजी आई थी.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ संघर्ष-विराम “जीवन रक्षक प्रणाली पर” (यानी बहुत नाजुक हालत में) है. उन्होंने कई मांगों पर मतभेदों की ओर इशारा किया. जैसे सभी मोर्चों पर दुश्मनी खत्म करना, अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना, ईरानी तेल की बिक्री फिर से शुरू करना, और युद्ध से हुए नुकसान के लिए मुआवज़ा देना.

ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर भी अपनी संप्रभुता (अधिकार) का दावा किया. इस जलडमरूमध्य से दुनिया भर में होने वाले तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के कुल प्रवाह का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है.

KCM ट्रेड के मुख्य बाजार विश्लेषक टिम वॉटरर ने एक ईमेल में कहा- जब तक अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच जाती और होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली तेल की आवाजाही पर पाबंदियां बनी रहती हैं, तब तक तेल की कीमतें 100 डॉलर के स्तर से ऊपर ही बनी रहेंगी.

सऊदी अरामको के CEO अमीन नासिर ने चेतावनी दी कि होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होने वाले तेल के निर्यात में किसी भी तरह की रुकावट से बाजार में स्थिरता लौटने में 2027 तक की देरी हो सकती है. इसके चलते हर हफ्ते लगभग 10 करोड़ बैरल तेल का नुकसान हो सकता है.

इस बीच, तेल बाजार को स्थिर करने की कोशिश में, ट्रंप प्रशासन ने सोमवार को एक योजना की घोषणा की. इस योजना के तहत, अमेरिका अपने ‘रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार’ (SPR) से 5.33 करोड़ बैरल कच्चा तेल उधार के तौर पर देगा.

जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने वाले डेटा से पता चला है कि अमेरिकी SPR से कच्चे तेल की एक खेप तुर्की के लिए रवाना हो चुकी है. यह भूमध्यसागरीय क्षेत्र में स्थित इस देश को की गई अपनी तरह की पहली डिलीवरी है.

इस बीच, राष्ट्रपति ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली तय बैठक से ठीक कुछ दिन पहले, वाशिंगटन ने तीन व्यक्तियों और नौ कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए. इन कंपनियों में हांगकांग, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान में स्थित कंपनियां भी शामिल हैं. इन पर चीन को ईरानी तेल की सप्लाई में मदद करने का आरोप है.

इसके अलावा, वॉल स्ट्रीट जर्नल ने सोमवार को बताया कि UAE ने ईरान के खिलाफ सैन्य हमले किए हैं, जिसमें अप्रैल की शुरुआत में किया गया एक हमला भी शामिल है, जिसका निशाना ईरान के लावन द्वीप पर स्थित एक रिफाइनरी थी. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि UAE ने सार्वजनिक तौर पर इन हमलों की बात स्वीकार नहीं की है.