पटना/ गया। दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUSB), गयाजी की बायोइंफॉर्मेटिक्स विभागाध्यक्ष और गोल्ड मेडलिस्ट शोध छात्रा द्वारा विश्वविद्यालय प्रशासन पर उत्पीड़न और भेदभाव के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। छात्रा पिछले दो दिनों से मुख्य द्वार पर धरने पर बैठी है। इस मामले में बिहार कांग्रेस के मीडिया पैनलिस्ट डॉ. स्नेहाशीष वर्धन पीड़िता के समर्थन में खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने वर्तमान कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह पर विश्वविद्यालय की गरिमा धूमिल करने और इसे आरएसएस की शाखा में बदलने का सीधा आरोप लगाया है।

​जातिवाद, क्षेत्रवाद और लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन का दावा

​डॉ. स्नेहाशीष ने कहा कि UPA सरकार द्वारा स्थापित यह प्रतिष्ठित संस्थान अब तानाशाही का केंद्र बन चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के पदभार संभालने के बाद से CUSB में छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का लगातार हनन हो रहा है। संस्थान में जातिवाद, क्षेत्रवाद और विशेषकर महिला व शोषित वर्ग के विद्यार्थियों के साथ भेदभाव की शिकायतें आम हो चुकी हैं। विरोध करने वाले छात्रों को परीक्षा में फेल करने या नंबर काटने का डर दिखाकर चुप करा दिया जाता है।

​संघ विचारधारा और पक्षपातपूर्ण रवैये पर सवाल

​डॉ. वर्धन ने दावा किया कि ABVP के पूर्व उत्तर प्रदेश अध्यक्ष रहे प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह अपनी विचारधारा के लोगों के साथ मिलकर मामलों को दबा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी मेस की मनमानी, लाइब्रेरी के घंटे बढ़ाने, पीएचडी दाखिले और नियुक्तियों में धांधली को लेकर छात्रों ने आवाज उठाई थी। हालांकि, कमेटियों में अपने पसंदीदा लोगों को बिठाकर इन मुद्दों को दबा दिया गया। कुलपति पर परिसर में संघ के कार्यक्रमों को शह देने और गेस्ट हाउस को संघ पदाधिकारियों का ठिकाना बनाने का भी आरोप लगाया गया।

​न्याय न मिलने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी

​CUSB के पूर्व छात्र रहे डॉ. स्नेहाशीष ने कहा कि विश्वविद्यालय के गिरते शैक्षणिक माहौल को बचाना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है। कुलपति केंद्र सरकार के महिला सशक्तिकरण के दावों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पीड़ित शोधार्थी को एक सप्ताह के भीतर न्याय नहीं मिला, तो व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।