हेमंत शर्मा, इंदौर। एक तरफ सरकार साइबर अपराधों से बचने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चला रही है, वहीं दूसरी तरफ ठग मासूम और मेहनतकश लोगों की जिंदगी भर की कमाई पर डाका डाल रहे हैं। इस बार साइबर ठगी का एक ऐसा दर्दनाक मामला सामने आया है, जिसने एक छात्र के भविष्य को अंधकार में धकेल दिया है। अशोकनगर के रहने वाले केशव सैन इंदौर में एक निजी कंपनी में हेल्पर (मजदूरी) का काम करते हैं। वे दिन-रात ओवरटाइम करके पाई-पाई जोड़ रहे थे ताकि अपनी बीटेक (B.Tech) की फीस जमा कर सकें। लेकिन साइबर अपराधियों ने पल भर में उनके इस सपने को चकनाचूर कर दिया।
मिनटों में खाली हुआ खाता, आते रहे मैसेज
पीड़ित केशव सैन के मुताबिक, उनके बैंक खाते से अचानक अमेज़न पे (Amazon Pay) के माध्यम से लगातार ट्रांजेक्शन होने लगे। जब तक वे कुछ समझ पाते, मोबाइल पर एक के बाद एक मैसेज आए और उनके खाते में जमा पूरी रकम यानी ₹48,000 साफ हो गए। यह सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि उनके बीटेक की फीस और सुनहरे भविष्य की उम्मीद थी।
1930 साइबर हेल्पलाइन और पुलिस व्यवस्था पर उठे सवाल
खाता खाली होते ही घबराए केशव ने तुरंत सरकार द्वारा जारी साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल किया। केशव का आरोप है कि आपातकालीन स्थिति में उनकी मदद करने और ट्रांजेक्शन रोकने के बजाय हेल्पलाइन पर उन्हें नजदीकी थाने जाने की सलाह दी गई। जब पीड़ित इंदौर क्राइम ब्रांच पहुंचा, तो वहां भी उन्हें तत्काल राहत देने के बजाय तीन दिन बाद आने के लिए कह दिया गया।
दांव पर लगा छात्र का भविष्य
आंखों में आंसू और बेबसी लिए भटक रहे केशव का कहना है कि अगर 1930 हेल्पलाइन या पुलिस ने समय रहते एक्शन लिया होता, तो शायद उनकी मेहनत की कमाई बच जाती। फीस जमा न होने के कारण अब उनकी पढ़ाई रुकने की कगार पर है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है, लेकिन इस घटना ने साइबर सुरक्षा दावों और हेल्पलाइन की मुस्तैदी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
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