दाहोद। गुजरात के दाहोद जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और अनोखा महाघोटाला सामने आया है। यहाँ सिंचाई और जल संसाधन विभाग के नाम पर एक या दो नहीं, बल्कि 6 फर्जी सरकारी दफ्तर खोलकर सरकारी खजाने में बड़ी सेंध लगाई गई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि जालसाजों ने 121 फर्जी विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये का सरकारी फंड हड़प लिया।
नकली दफ्तरों और मोहरों से ठगी का खेल
इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने बाकायदा सरकारी अधिकारियों का रूप धारण किया। उन्होंने विभाग की नकली मुहरें, जाली हस्ताक्षर और फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इसके बाद असली सरकारी तंत्र और भ्रष्ट अधिकारियों से मिलीभगत कर 121 ऐसे प्रोजेक्ट्स की वित्तीय स्वीकृतियां जारी करा लीं, जो असल में कभी जमीन पर थे ही नहीं। फर्जी दफ्तरों के जरिए सीधे सरकारी ग्रांट अपने खातों में ट्रांसफर करवा ली गई।
145 बैंक खातों का जटिल नेटवर्क
सरकारी फंड के इस गबन को छिपाने और मनी लॉन्ड्रिंग (काले धन को सफेद करने) के लिए बेहद जटिल मनी ट्रेल बनाई गई। जांच में सामने आया कि:
- सबसे पहले, सरकारी खातों से आई रकम को फर्जी दफ्तरों के नाम पर बने 9 मुख्य बैंक खातों में जमा कराया गया।
- इसके बाद, जांच एजेंसियों को गुमराह करने के लिए पैसे को 18 मध्यस्थ (इंटीमीडिएट) खातों में भेजा गया।
- अंत में, इस रकम को मुख्य आरोपियों, उनके रिश्तेदारों और सहयोगियों से जुड़े 118 अलग-अलग बैंक खातों में बांट दिया गया।
ED का बड़ा एक्शन: 22.70 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच
मामले की गहराई से जांच कर रही ईडी ने पैसों के इस लेन-देन का पता लगाते हुए मुख्य आरोपी अबूबकर जकीराली सैयद, उसके परिजनों और सहयोगियों पर शिकंजा कसा है। एजेंसी ने सोमवार को कार्रवाई करते हुए 22.70 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां जब्त कर लीं।
जब्त की गई संपत्तियों में मुख्य रूप से शामिल हैं:
- जमीन के 7 बड़े प्लॉट
- अलग-अलग म्यूचुअल फंड्स और शेयर्स में किया गया भारी निवेश
- विभिन्न बैंक खातों में जमा नगद राशि
जालसाजों ने धोखाधड़ी से हासिल इस सरकारी पैसे से कई अचल संपत्तियां खरीदी थीं और बाजार में निवेश किया था। फिलहाल, ईडी और स्थानीय जांच एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि इस सिंडिकेट में और कौन-कौन से बड़े सरकारी अफसर शामिल थे।


