गुजरात में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) यानी समान नागरिक संहिता आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल, 2026 को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है, जिसके बाद राज्य सरकार द्वारा इसका गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया। उत्तराखंड के बाद गुजरात देश का दूसरा ऐसा राज्य बन गया है, जहां यूसीसी को प्रभावी रूप से लागू किया गया है।
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार ने मार्च 2026 में साढ़े सात घंटे की लंबी बहस के बाद इस ऐतिहासिक विधेयक को विधानसभा में पारित कराकर राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा था। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 2022 के गुजरात विधानसभा चुनाव में अपने संकल्प पत्र के तहत राज्य में यूसीसी लागू करने का वादा किया था।
यूसीसी लागू होने से क्या-क्या बदलेगा? गुजरात में यूसीसी के लागू होने के साथ ही सामाजिक और कानूनी व्यवस्था में कई बड़े बदलाव आए हैं:
- एक समान कानून: विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और संपत्ति के अधिकारों में सभी धर्मों के नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढांचा लागू हो गया है। इसके तहत बेटियों को बेटों के बराबर संपत्ति का अधिकार मिलेगा।
- बहुविवाह पर रोक: कानून के तहत बहुविवाह (एक से अधिक विवाह करने) पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
- विवाह और लिव-इन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य: राज्य में विवाह के साथ-साथ लिव-इन रिलेशनशिप का निर्धारित समय-सीमा के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य कर दिया गया है।
- आदिवासी समाज को छूट: अनुसूचित जनजाति (ST) के पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक स्वायत्तता को ध्यान में रखते हुए आदिवासी समाज को इस कानून के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
अक्टूबर 2022 में यूसीसी समिति के वादे से शुरू हुई यह प्रक्रिया फरवरी 2024 में विशेषज्ञ समिति के गठन और मार्च 2026 में रिपोर्ट सौंपने के बाद अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंची। इस कानून से जहां एक तरफ सभी नागरिकों के लिए समान अधिकारों का दावा किया जा रहा है, वहीं विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक फायदा उठाने का जरिया बताया है।
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