शिखिल ब्यौहार, भोपाल। दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद मध्य प्रदेश की सियासत में भूचाल आ गया है। नरोत्तम समर्थकों के उग्र प्रदर्शन, चक्काजाम और सामूहिक इस्तीफों के बीच अब इस मामले पर कांग्रेस और भाजपा की आधिकारिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ गई हैं। कांग्रेस जहां इसे बीजेपी की अंतर्कलह और गुटबाजी बता रही है, वहीं भाजपा ने इसे कार्यकर्ताओं का स्वाभाविक जुड़ाव करार देते हुए अनुशासन की दुहाई दी है।

पूर्व गृहमंत्री के समर्थकों को पुलिस ने पीटा, यह गुटबाजी का नतीजा

विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के दिग्गज नेता अजय सिंह ‘राहुल’ ने नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने पर बीजेपी पर बड़ा तंज कसा है। उन्होंने कहा- गुटबाजी की समस्या हर पार्टी में थोड़ी-थोड़ी होती है, लेकिन नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटना पूरी तरह से बीजेपी की अंदरूनी गुटबाजी का नतीजा है। एक जमाना था जब नरोत्तम मिश्रा प्रदेश के गृहमंत्री थे और पूरी पुलिस व्यवस्था उनके हाथ में थी। आज वक्त देखिए कि उनके टिकट कटने के बाद रात भर चक्काजाम कर रहे उनके समर्थकों को उनकी ही पार्टी की पुलिस ने जमकर पीटा।

कांग्रेस को फायदा या नुकसान?

नरोत्तम मिश्रा एक कद्दावर और पुराने नेता हैं, उनका अपना एक ओहदा है, तभी इतनी संख्या में लोग जुटे हैं। उनके टिकट कटने से कांग्रेस को फायदा होगा या नुकसान, यह आने वाला वक्त तय करेगा। हम इंतजार कर रहे थे कि बीजेपी क्या कदम उठाती है। उसी रणनीति के हिसाब से हमने निर्णय लिया है। आज कांग्रेस का प्रत्याशी घोषित हो जाएगा और नाम सबके सामने होगा।

बीजेपी कैडर आधारित दल, कोई मतभेद नहीं

दतिया के घटनाक्रम और कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार करते हुए भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने पार्टी का रुख साफ किया। उन्होंने कहा- भारतीय जनता पार्टी एक कैडर आधारित दल है। दतिया के सभी कार्यकर्ता और पदाधिकारी पूरी तरह से भाजपा नेतृत्व द्वारा लिए गए निर्णय के साथ खड़े हैं। लंबे समय तक किसी जनप्रतिनिधि (नरोत्तम मिश्रा) के साथ काम करने के कारण कार्यकर्ताओं का भावुक होना और ऐसा प्रदर्शन करना स्वाभाविक है। बीजेपी का कार्यकर्ता पार्टी को अपनी मां मानता है। जब किसी नेता से ज्यादा जुड़ाव हो जाता है, तो कार्यकर्ता अपनी निष्ठा अलग तरीके से व्यक्त करते हैं, इसे बगावत नहीं कहा जा सकता।

बीजेपी में अनुशासन सर्वोपरि है और क्षेत्र की सभी प्रकार की जानकारी संगठन के पास है। यहाँ कोई मतभेद जैसी स्थिति नहीं है। कांग्रेस में कोई अनुशासन नहीं है। वे अपनी गुटबाजी और ‘अच्छा बाजी’ के चलते अब तक अपना प्रत्याशी तक तय नहीं कर पा रहे हैं। कांग्रेस को बीजेपी की चिंता छोड़कर अपने परिवार की चिंता करनी चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषण

दतिया उपचुनाव अब पूरी तरह से दिलचस्प मोड़ पर आ गया है। जहां बीजेपी डैमेज कंट्रोल में जुटी है और इसे कार्यकर्ताओं का ‘स्वाभाविक प्रेम’ बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे भुनाने की फिराक में है। आज कांग्रेस प्रत्याशी की घोषणा के बाद दतिया का यह मुकाबला और भी रोचक होने की उम्मीद है।

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