जिस युवक को मृत मानकर परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार और तेरहवीं कर दी थी, उसके अचानक जिंदा लौटने से पुलिस का मर्डर केस पूरी तरह पलट गया है।
कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। जिस बेटे को परिवार ने मृत मान लिया था, उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। 24 जून को तेरहवीं की रस्म भी पूरी कर दी गई और उसकी कथित हत्या के आरोप में एक सीआईएसएफ जवान समेत सात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो गया। लेकिन तेरहवीं के अगले ही दिन वही बेटा जिंदा घर लौट आया। इस एक घटनाक्रम ने पूरे मामले को पलटकर रख दिया और पुलिस की जांच पर भी कई सवाल खड़े कर दिए।
पूरा मामला मसूरी क्षेत्र का है। जेल से छूटने के बाद एक व्यक्ति अचानक लापता हो गया था। इसी दौरान मसूरी नहर से एक अज्ञात शव बरामद हुआ। परिजनों ने शव की पहचान लापता युवक के रूप में की। मां ने उसे अपना बेटा मानकर अंतिम संस्कार कर दिया। इसके बाद परिवार की शिकायत पर एक सीआईएसएफ जवान समेत सात लोगों के खिलाफ अपहरण और हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
मामले की जांच में जुटी पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की और तीन लोगों को हिरासत में भी लिया। परिजनों का आरोप था कि हिरासत में लिए गए तीनों लोगों के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। इसी बीच परिवार ने 24 जून को कथित मृतक की तेरहवीं भी कर दी।
लेकिन अगले ही दिन पूरा मामला पलट गया। जिसे मृत मानकर अंतिम संस्कार किया जा चुका था, वही व्यक्ति अचानक अपने घर लौट आया। उसके जिंदा लौटते ही हत्या के आरोप झेल रहे सातों लोगों को बड़ी राहत मिली। अब उन्होंने गिरधर और उसके परिवार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि मसूरी नहर से मिला शव आखिर किसका था। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि शव की पहचान गिरधर के रूप में कैसे हुई और जांच में कहां चूक हुई। पुलिस अब अपहरण और हत्या के मामले में दर्ज मुकदमे को समाप्त कर आरोपियों को कानूनी रूप से आरोपमुक्त करने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ा रही है।

