आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। देश को आजाद हुए करीब 79 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन बस्तर के घने जंगलों के बीच बसे कार्लाकोंटा गांव के लोगों के जीवन में असली उजाला अब पहुंचा है। वर्षों तक अंधेरे में जीवन बिताने वाले इस आदिवासी गांव के घर पहली बार बिजली की रोशनी से जगमगा उठे हैं। यह सिर्फ बल्ब जलने की कहानी नहीं, बल्कि विकास की उस किरण का आगमन है, जिसका गांव के 43 परिवार लंबे समय से इंतजार कर रहे थे।

एससीए योजना के तहत विद्युतीकरण कार्य हुआ पूरा
लोहंडीगुड़ा विकासखंड के इस दूरस्थ गांव में विशेष केंद्रीय सहायता (एससीए) योजना के तहत करीब 99.19 लाख रुपये की लागत से विद्युतीकरण कार्य पूरा किया गया। दुर्गम जंगलों के बीच 3 किलोमीटर लंबी 11 केवी विद्युत लाइन और 4.9 किलोमीटर लो-टेंशन लाइन बिछाई गई। साथ ही चार ट्रांसफार्मर स्थापित कर गांव को बिजली ग्रिड से जोड़ा गया।
पहली बार घरों में बिजली पहुंचने से बच्चों की पढ़ाई आसान होगी, महिलाओं को घरेलू कार्यों में सुविधा मिलेगी और ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा तथा संचार जैसी बुनियादी सुविधाओं का बेहतर लाभ मिल सकेगा। गांव में पहुंची यह रोशनी केवल अंधेरा ही नहीं मिटा रही, बल्कि विकास, विश्वास और नई उम्मीदों की नई राह भी खोल रही है।

43 परिवारों की जिंदगी में आया उजाला
गांव में पहली बार बिजली पहुंचने से 43 आदिवासी परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव आएगा। अब घरों में बल्ब जलने से बच्चों की पढ़ाई आसान होगी, महिलाएं घरेलू काम बेहतर ढंग से कर सकेंगी और ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा व संचार जैसी सुविधाओं का लाभ भी पहले से अधिक मिलेगा। गांव में पहुंची यह रोशनी केवल अंधेरा ही नहीं मिटा रही, बल्कि विकास, विश्वास और नई उम्मीदों का रास्ता भी खोल रही है।
जिला विद्युत अधिकारी प्रदीप अग्रवानी ने बताया कि वर्षों से लंबित ग्रामीणों की मांग को पूरा करते हुए इस परियोजना को सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। ग्रामीणों ने भी इसे अपने गांव के लिए ऐतिहासिक पल बताते हुए खुशी जताई।
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