मशहूर कोचिंग गुरु और आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व नेता अवध ओझा (Awadh Ojha) ने कहा है कि कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) को सबसे पहले देश की जनता को जागरूक करने पर ध्यान देना चाहिए। उनका मानना है कि राजनीति का केंद्र शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और रोजगार जैसे मुद्दे होने चाहिए, न कि केवल पाकिस्तान या हिंदू-मुस्लिम जैसे विषय। अवध ओझा ने कहा कि जनता को इस बात के लिए तैयार करना होगा कि वह उन नेताओं और दलों का समर्थन करे जो शिक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था, उद्योग, रोजगार और विकास की बात करें। उन्होंने कहा कि देश में राजनीतिक विमर्श को मूलभूत मुद्दों की ओर मोड़ने की जरूरत है। ओझा ने बताया कि उन्होंने अभिजीत दीपके (Abhijit Deepke) से भी बातचीत की है। इस दौरान उन्होंने दीपके को बधाई दी और पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए अपने सुझाव भी दिए।

मशहूर कोचिंग गुरु और आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व नेता अवध ओझा ने एक पॉडकास्ट में देश के अच्छे नेताओं को लेकर अपनी राय रखी। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल की सराहना की। साथ ही भाजपा के कुछ नेताओं का भी जिक्र करते हुए कहा कि उस दल में भी प्रतिभाशाली और पढ़े-लिखे नेताओं की कोई कमी नहीं है। ओझा ने कहा, “मुझे शशि थरूर बहुत पसंद हैं। एक नेता में तीन-चार जरूरी गुण होने चाहिए। अगर वह बहुत ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं भी है तो उसमें समझ होनी चाहिए।” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि “अकबर महान इसलिए नहीं थे कि वे बहुत पढ़े-लिखे थे, बल्कि उनके नवरत्न बेहद योग्य थे।”भाजपा के नेताओं का उल्लेख करते हुए ओझा ने कहा कि पार्टी में भी कई सक्षम नेता हैं। उन्होंने सुधांशु त्रिवेदी और संबित पात्रा का नाम लेते हुए कहा कि भाजपा में पढ़े-लिखे और समझदार नेताओं की कमी नहीं है।ओझा ने आगे कहा, “अरविंद केजरीवाल अच्छे नेता हैं, राहुल गांधी बहुत अच्छे नेता हैं। नेताओं की कमी इस देश में नहीं है, कमी है इस देश की बेहोश जनता।” उनके अनुसार, देश में नेतृत्व की क्षमता रखने वाले लोगों की कमी नहीं है, लेकिन जनता को अधिक जागरूक और मुद्दों के प्रति संवेदनशील होने की जरूरत है।

अवध ओझा ने कहा कि देश की जनता नेताओं से जवाबदेही नहीं मांगती, क्योंकि बड़ी संख्या में लोगों को बजट, सरकारी नीतियों और विकास से जुड़े मुद्दों की पर्याप्त जानकारी नहीं होती। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग महत्वपूर्ण नीतिगत विषयों की बजाय मनोरंजन और चर्चित घटनाओं पर अधिक ध्यान देते हैं। ओझा ने कहा, “इस देश की जनता को जागना होगा। जब तक लोग पाकिस्तान, हिंदू-मुसलमान जैसे मुद्दों पर ताली बजाते रहेंगे, तब तक देश को बेहतर नेतृत्व नहीं मिल पाएगा।” उनके अनुसार, लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए जनता को विकास और जनहित के मुद्दों पर अधिक सजग होना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों को इन्फ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग जैसे विषयों पर चर्चा करनी चाहिए और सरकारों से इन क्षेत्रों में किए गए काम का हिसाब मांगना चाहिए। ओझा के मुताबिक, जब जनता विकास के मुद्दों को प्राथमिकता देगी, तभी राजनीतिक दल और नेता भी इन्हीं विषयों पर अधिक ध्यान देने के लिए मजबूर होंगे।

युवा नेतृत्व जरूरी, लेकिन भारत नेपाल नहीं

देश में युवा प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की आवश्यकता को लेकर पूछे गए एक सवाल पर अवध ओझा ने कहा कि राजनीति में यंग लीडरशिप का होना जरूरी है, क्योंकि युवा पीढ़ी वर्तमान दौर की चुनौतियों, तकनीक और सामाजिक बदलावों को बेहतर ढंग से समझती है। अपनी बात को स्पष्ट करते हुए उन्होंने पूर्व भारतीय क्रिकेटर Sunil Gavaskar का उदाहरण दिया। ओझा ने कहा कि अगर आज गावस्कर को टी20 क्रिकेट खेलने के लिए कहा जाए तो वह शायद मौजूदा प्रारूप के अनुरूप प्रदर्शन न कर पाएं, क्योंकि उनके समय का क्रिकेट और आज का क्रिकेट काफी अलग है। इसी तरह आज का युवा वर्तमान समय की जरूरतों और चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझता है।

उन्होंने कहा, “अगर कोई युवा प्रधानमंत्री बनता है तो इससे अच्छी बात क्या हो सकती है।” हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत की परिस्थितियां अन्य देशों से अलग हैं।ओझा ने कहा, “भारत नेपाल नहीं है। यहां बहुत विविधता है।” उनका कहना था कि भारत जैसे विशाल और विविधताओं से भरे देश में नेतृत्व के लिए केवल युवावस्था ही नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक समझ और जनसंपर्क भी जरूरी है। इसी संदर्भ में उन्होंने महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को जागरूक करने और स्वतंत्रता आंदोलन को जन-आंदोलन बनाने में गांधी को करीब 22 साल लगे थे। उनके अनुसार, 1920 से 1942 के बीच लगातार जनजागरण और संगठन के प्रयासों के बाद ही व्यापक बदलाव संभव हो पाया था।

अभिजीत दीपके के लिए सबसे बड़ा लक्ष्य ‘जनजागरण’ बताया

अवध ओझा ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके का जिक्र करते हुए कहा कि पार्टी का सबसे बड़ा लक्ष्य देश में जनजागरण होना चाहिए। उन्होंने बताया कि हाल ही में उनकी अभिजीत दीपके से फोन पर बातचीत हुई थी, जिसमें उन्होंने उन्हें बधाई भी दी। ओझा ने कहा, “मैंने अभिजीत से कहा कि मैं अक्सर आप लोगों के बारे में बात करता रहता हूं। अभी सीजेपी का सबसे पहला काम गांधी के रास्ते पर चलकर देश की जनता को जगाना होना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा कि सीजेपी को देशभर में लोगों तक पहुंचकर उन्हें जागरूक करना चाहिए। ओझा के मुताबिक, पार्टी का सबसे बड़ा टारगेट यही होना चाहिए कि लोगों को यह समझाया जाए कि लोकतंत्र में चर्चा और समर्थन का केंद्र विकास से जुड़े मुद्दे होने चाहिए। उनके शब्दों में, “जनता को यह समझाना होगा कि पाकिस्तान, हिंदू-मुस्लिम या मंदिर-मस्जिद जैसे मुद्दों पर ताली बजाने के बजाय उन नेताओं का समर्थन करना चाहिए जो स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और उद्योग की बात करते हैं।”

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