दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के लाखों उपभोक्ताओं को नियमित रूप से पानी की आपूर्ति तो मिल रही है, लेकिन उन्हें पानी का बिल नहीं मिल रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए दिल्ली सरकार ने 6 महीने का विशेष e-KYC अभियान शुरू करने का फैसला किया है। अभियान का उद्देश्य ऐसे कनेक्शनों की पहचान कर उन्हें नियमित करना और बिलिंग व्यवस्था को दुरुस्त बनाना है। जल मंत्री प्रवेश वर्मा (Pravesh Verma) ने बताया कि दिल्ली जल बोर्ड के कुल 73 लाख ग्राहकों में से 30 लाख से अधिक घरों, यानी 40 फीसदी से ज्यादा उपभोक्ताओं को पाइपलाइन के जरिए पानी की सप्लाई मिल रही है, लेकिन उन्हें बिल जारी नहीं हो रहे हैं। सरकार अब इन सभी कनेक्शनों का सत्यापन कर उन्हें रिकॉर्ड में लाने की तैयारी कर रही है।

उन्होंने कहा कि e-KYC अभियान के तहत ऐसे उपभोक्ताओं की पहचान की जाएगी, जिनके यहां पानी की आपूर्ति हो रही है लेकिन बिलिंग नहीं हो रही। इसके साथ ही जल मीटरों की रीडिंग ली जाएगी और संबंधित उपभोक्ताओं तक पानी के बिल पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। प्रवेश वर्मा के अनुसार, इस अभियान को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए तीन एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये एजेंसियां घर-घर जाकर उपभोक्ताओं का सत्यापन करेंगी, मीटर की स्थिति की जांच करेंगी और बिलिंग प्रक्रिया को व्यवस्थित करने में मदद करेंगी।

प्रवेश वर्मा ने बताया कि e-KYC अभियान पूरे शहर में चरणबद्ध तरीके से चलाया जाएगा। इसके लिए नियुक्त एजेंसियां करीब 700 कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को काम पर रखेंगी, जो घर-घर जाकर उपभोक्ताओं का सत्यापन करेंगे, मीटर रीडिंग दर्ज करेंगे और जल कनेक्शनों का रिकॉर्ड अपडेट करेंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली जल बोर्ड युवाओं को अवसर देने के लिए एक इंटर्नशिप प्रोग्राम भी शुरू करेगा। इस कार्यक्रम के तहत हर वर्ष 40 युवाओं का चयन किया जाएगा, जिन्हें ₹10,000 प्रति माह स्टाइपेंड पर काम करने का अवसर मिलेगा। इन युवाओं को जल प्रबंधन और उपभोक्ता सेवाओं से जुड़े कार्यों में अनुभव प्राप्त होगा। जल मंत्री ने बताया कि e-KYC अभियान के साथ-साथ दिल्ली जल बोर्ड ने राजधानी की जल भंडारण क्षमता बढ़ाने और यमुना नदी की सफाई को लेकर भी कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य भविष्य में जल आपूर्ति व्यवस्था को अधिक मजबूत बनाना और राजधानी में जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को सुनिश्चित करना है।

250 वॉटर ATM, 15 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और 20 लाख लोगों को मिलेगा लाभ

दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने राजधानी में जल आपूर्ति, जल संरक्षण और यमुना की सफाई को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है। जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य दिल्ली की जल व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, सीवेज प्रबंधन में सुधार करना और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। दिल्ली जल बोर्ड के फैसलों के तहत ₹58 करोड़ की लागत से 250 वॉटर एटीएम स्थापित किए जाएंगे। शुरुआती चरण में इन वॉटर एटीएम को सरकारी स्कूलों में लगाया जाएगा, जिसके बाद इन्हें अन्य सार्वजनिक स्थानों तक विस्तार दिया जाएगा। इससे विद्यार्थियों और आम लोगों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा करीब ₹2,000 करोड़ की लागत से 15 डिसेंट्रलाइज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (DSTP) स्थापित किए जाएंगे। इन प्लांटों की कुल उपचार क्षमता 103.5 मिलियन गैलन प्रतिदिन (MGD) होगी। परियोजना का उद्देश्य सीवेज के बेहतर प्रबंधन के साथ यमुना में जाने वाले प्रदूषण को कम करना है। योजना के तहत नजफगढ़ नाले और दिल्ली गेट नाले का इन-सीटू ट्रीटमेंट भी किया जाएगा। साथ ही वजीराबाद पॉन्ड्स (तालाबों) के पुनर्विकास और सुधार का कार्य भी शामिल है। अधिकारियों का मानना है कि इन कदमों से यमुना की सफाई और जल संरक्षण के प्रयासों को गति मिलेगी। दिल्ली जल बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन 15 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों के निर्माण के साथ-साथ संबंधित एजेंसियां अगले 15 वर्षों तक इनके संचालन और रखरखाव (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) की जिम्मेदारी भी संभालेंगी। इससे परियोजनाओं के दीर्घकालिक संचालन और गुणवत्ता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

244 अनधिकृत कॉलोनियों और 57 गांवों तक पहुंचेगी सीवर सुविधा

जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि इन योजनाओं का उद्देश्य सीवेज कचरे के निपटान को बेहतर बनाना, पर्यावरण प्रदूषण कम करना और अधिक से अधिक लोगों तक सीवर कनेक्टिविटी पहुंचाना है। दिल्ली जल बोर्ड ने 10 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) में आधुनिक स्लज मैनेजमेंट सिस्टम स्थापित करने की मंजूरी दी है। इस प्रणाली के जरिए सीवेज उपचार के बाद निकलने वाले कचरे का वैज्ञानिक और प्रभावी ढंग से निपटान किया जाएगा, जिससे पर्यावरणीय मानकों का बेहतर पालन सुनिश्चित हो सकेगा। इसके अलावा, राजधानी की 244 अनधिकृत कॉलोनियों और 57 गांवों में नई सीवर लाइनें बिछाने की योजना को भी मंजूरी दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना के पूरा होने के बाद करीब 33 लाख लोगों को सीवर कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा, जिससे इन क्षेत्रों में स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है।

यमुना सफाई के लिए DJB का बड़ा एक्शन प्लान

यमुना नदी को पुनर्जीवित करने और राजधानी के सीवेज प्रबंधन ढांचे को मजबूत बनाने के लिए दिल्ली जल बोर्ड (DJB) ने करीब ₹4,500 करोड़ की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य यमुना में प्रदूषण के स्तर को कम करना, सीवर नेटवर्क का विस्तार करना और सीवेज उपचार क्षमता को बढ़ाना है। अधिकारियों के अनुसार, मंजूर की गई योजनाओं में शहर के सीवर इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) का उन्नयन और प्रमुख नालों का इन-सीटू ट्रीटमेंट शामिल है। विशेष रूप से नजफगढ़ नाले पर फोकस किया गया है, जिसे यमुना प्रदूषण के सबसे बड़े स्रोतों में से एक माना जाता है। दिल्ली जल बोर्ड का कहना है कि नजफगढ़ नाले और अन्य बड़े नालों में प्रदूषण को स्रोत पर ही नियंत्रित करने के लिए इन-सीटू ट्रीटमेंट तकनीक अपनाई जाएगी। इससे गंदे पानी को नदी में पहुंचने से पहले ही उपचारित किया जा सकेगा, जिससे यमुना की जल गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है।

परियोजनाओं की पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए भुगतान व्यवस्था को भी प्रदर्शन आधारित बनाया गया है। अधिकारियों ने बताया कि नालों के ट्रीटमेंट से जुड़े ठेकेदारों को उनके वास्तविक कार्य और परिणामों के आधार पर भुगतान किया जाएगा। इसके लिए ट्रीट किए गए पानी की मात्रा और गुणवत्ता की निगरानी हेतु नालों के इनलेट और आउटलेट दोनों स्थानों पर फ्लो मीटर लगाए जाएंगे। इन उपकरणों के जरिए यह मापा जाएगा कि कितना पानी उपचारित हुआ और परियोजना के निर्धारित लक्ष्य किस हद तक पूरे हुए।

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