लखनऊ. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम प्रधानों को कार्यकाल खत्म होने के बाद भी उन्हें प्रशासक बनाने के यूपी सरकार के फैसले पर फटकार लगाई है. इसे लेकर अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधा है. अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा कि ‘उप्र भाजपा सरकार द्वारा एक तरफ झूठी तारीफ के प्रायोजित कार्यक्रम लगातार करवाए जा रहे हैं तो दूसरी तरफ माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट की फटकार ने ये कहकर रंग में भंग कर दिया कि ‘कार्यकाल खत्म होने के बावजूद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने का यूपी सरकार का फैसला असंवैधानिक है’. जनता पूछ रही है कि ‘असंवैधानिक’ काम करने की सजा क्या होती है?’

सपा मुखिया ने आगे लिखा कि ‘अब यही ग्राम प्रधान भाजपाइयों को इसलिए गांवों में घुसने नहीं देंगे क्योंकि भाजपा सरकार द्वारा उन्हें प्रशासक बनाने के आदेश ने, उनमें कुछ नए काम करने की उम्मीद जगाई थी, जिसका वादा वो जनता से कर चुके थे, अब जनता तो तकनीकी पक्ष समझती नहीं है कि क्या हुआ, वो तो यही मानेगी कि प्रधान जी ने अपना वादा पूरा नहीं किया और सारा फंड-बजट-पैसा डबल इंजन के साथ मिल-बांटकर खा गए.’

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‘प्रधानों में इस बात का भी डर है कि कहीं ‘इन बीच के दिनों’ के खर्चे का खामियाजा उनको अपनी जेब से न भरना पड़े. हो सकता है कल को ‘पैसा वापसी’ का आदेश भी आ जाए. जब कार्यकाल गलत साबित हो गया है, तो उस समय में खर्च हुआ पैसा भी तो कानूनी रूप से गलत माना जाएगा. भाजपा ने प्रधानों को बहुत बुरा फंसा दिया है. वहीं प्रधानों ने जिन ठेकेदारों को काम दिया था, वो भी ‘इन बीच के दिनों’ के बिलों का भुगतान करवाने के लिए प्रधानों का दरवाजा खटखटाएंगे. इसीलिए प्रधान अब भाजपाइयों और उनके संगी-साथियों की गांव-गांव में नाकाबंदी कर देंगे’. अखिलेश ने आगे लिखा कि ‘विशेष: पंचायती राज मंत्री तो घर से ही नहीं निकल पाएंगे, गांव पहुंचना तो दूर की बात है.’