सत्या राजपूत, रायपुर। छत्तीसगढ़ के डीएड अभ्यर्थियों का 2300 सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर पिछले 321 दिनों से जारी आंदोलन आज एक बार फिर चर्चा में आ गया। गुरुवार को 422 डीएड अभ्यर्थी अपने माता-पिता और परिवार के सदस्यों के साथ शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के बंगले पहुंचे और नियुक्ति की निश्चित तारीख घोषित करने की मांग को लेकर वहीं धरने पर बैठ गए।


प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों का स्पष्ट कहना था कि जब तक सरकार 2300 सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति की निश्चित तारीख घोषित नहीं करती, तब तक वे बंगले से नहीं उठेंगे। अभ्यर्थियों के अनुसार, मौके पर पहुंचे करीब 500 पुलिस जवानों ने उनके और परिवारजनों के खिलाफ कार्रवाई की। आरोप है कि महिला अभ्यर्थियों और उनके परिजनों को घसीटकर बसों में बैठाया गया तथा महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। इसके बाद सभी को सेंट्रल जेल रायपुर ले जाया गया।

अभ्यर्थियों का सवाल है कि एक ओर सरकार महिला सशक्तिकरण और बेटियों के सम्मान की बात करती है, वहीं दूसरी ओर अपनी नियुक्ति और न्याय की मांग कर रही बेटियों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है? दीपावली जैसे पर्व पर भी अपने परिवार से दूर धरने पर बैठी छत्तीसगढ़ की बेटियों की पीड़ा आखिर सरकार कब समझेगी?
डीएड अभ्यर्थियों का कहना है कि उनकी मांग कोई नई भर्ती या अतिरिक्त पदों की नहीं है, बल्कि 2300 सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति और न्याय की है। उनका आरोप है कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भावना के अनुरूप नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की जा रही है और पिछले 321 दिनों से उन्हें केवल आश्वासन मिल रहा है।

अभ्यर्थियों ने सरकार से सवाल किया है कि क्या अपने संवैधानिक अधिकारों और नियुक्ति की मांग करना अपराध है? क्या प्रदेश की बेरोजगार बेटियों को न्याय मांगने के बदले जेल जाना पड़ेगा?
अगली कैबिनेट बैठक को लेकर डीएड अभ्यर्थियों की चेतावनी
शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के बंगले पर पहुंचे डीएड अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि आगामी कैबिनेट बैठक में 2300 सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे इससे भी अधिक संख्या में अपने परिवारजनों के साथ रायपुर पहुंचकर बड़ा आंदोलन करेंगे।

अभ्यर्थियों ने लगातार 321 दिनों से जारी संघर्ष, पुलिस कार्रवाई, जेल यात्रा और परिवारों की परेशानियों के बीच गहरी निराशा और मानसिक पीड़ा व्यक्त की है। उन्होंने आत्मदाह जैसे आत्मघाती कदम की चेतावनी भी दी है। अभ्यर्थियों ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और वित्त मंत्री ओपी चौधरी से तत्काल हस्तक्षेप कर समाधान निकालने की मांग की है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार की अनदेखी और लगातार मिल रहे आश्वासनों ने उन्हें बेहद निराश कर दिया है। अब आगामी कैबिनेट बैठक में इस मामले पर स्पष्ट निर्णय लेकर नियुक्ति की निश्चित समय-सीमा घोषित की जानी चाहिए।
अभ्यर्थियों की शासन से प्रमुख मांगें
- सेंट्रल जेल रायपुर ले जाए गए सभी डीएड अभ्यर्थियों एवं परिवारजनों को तत्काल रिहा किया जाए।
- महिला अभ्यर्थियों के साथ कथित अभद्र व्यवहार की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- 2300 सहायक शिक्षक पदों पर नियुक्ति के संबंध में आगामी कैबिनेट बैठक में सकारात्मक निर्णय लिया जाए।
- नियुक्ति की निश्चित तारीख एवं समय-सीमा सार्वजनिक की जाए।
- हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भावना के अनुरूप नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाए।
डीएड अभ्यर्थियों ने सरकार से अपील की है कि उनकी पीड़ा और चेतावनी को गंभीरता से लिया जाए। किसी भी अभ्यर्थी को आत्मघाती कदम उठाने की नौबत न आए, इसके लिए सरकार तत्काल संवाद स्थापित कर नियुक्ति का समाधान निकाले। 321 दिनों का संघर्ष अब केवल रोजगार की मांग नहीं, बल्कि प्रदेश के बेरोजगार युवाओं के भविष्य और न्याय की उम्मीद का सवाल बन चुका है।
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