कुंदन कुमार, पटना। बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश एमएलसी बन गए हैं। राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने उन्हें भाजपा एमएलसी देवेश कुमार के इस्तीफे से खाली हुई सीट से विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया है। गौरतलब है कि दीपक प्रकाश अब तक बिना किसी सदन का सदस्य बने सम्राट कैबिनेट में आरएलएम कोटे से मंत्री बने हुए थे।
इससे पहले वह नितिश कैबिनेट में भी बिना किसी सदन का सदस्य रहते हुए मंत्री बने थे, जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी चल रही थी। इस बीच फैसले से पहले ही दीपक प्रकाश को बिहार विधान परिषद का सदस्य बना दिया गया है। इसके साथ ही उनका मंत्री पद भी अब सुरक्षित हो गया।
मंत्री दीपक प्रकाश ने जताया आभार
विधान परिषद के लिए मनोनीत होने पर मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि, सबसे पहले आभार व्यक्त करना चाहेंगे, धन्यवाद देना चाहेंगे प्रधानमंत्री को, गृह मंत्री, भारत सरकार, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, मेरे नेता उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान, जीतन राम मांझी, सभी नेता गण और NDA गठबंधन के सभी लोगों का धन्यवाद व्यक्त करना चाहेंगे। जो जिम्मेदारी आज मिल रही है, उस पर खरा उतरने के लिए और भी प्रतिबद्ध हो रहे हैं।
आगे और मजबूती से करेंगे काम- दीपक
मंत्री दीपक प्रकाश ने कहा कि, सारी बातों का औचित्य नहीं रहता है। सभी चीजें औपचारिक रुप से सामने आ गई हैं। पहले की जो भी बातें थीं उनका अब बहुत औचित्य नहीं है। लेकिन जो भी जवाबदेही मिली है, उस पर निश्चित तौर पर और ज्यादा प्रतिबद्धता के साथ काम करने की आज एक बार फिर से प्रेरणा मिली है और आगे और मजबूती के साथ काम करेंगे।
पिता उपेंद्र कुशवाहा ने क्या कहा?
मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद के लिए मनोनीत किए जाने पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के सांसद और उनके पिता उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि, यह तो पुराना फैसला NDA का था। उस फैसले को ही इम्प्लीमेंट किया गया है। भारतीय जनता पार्टी और NDA के तमाम नेताओं के बीच हम सब लोगों की बातचीत के आधार पर सारी बातें पहले से तय थीं। दीपक प्रकाश बिना सदन में गए हुए मंत्री बन रहे थे। उसी वक्त यह बात थी कि सदन में उनको जाना है और जो कुछ भी उस समय का निर्णय था, उसको ही आज इम्प्लीमेंट कर दिया गया है।
BJP ने दी है कुर्बानी
दरअसल राष्ट्रीय लोक मोर्चा कोटे से आने वाले नेता दीपक प्रकाश को बिहार सरकार में मंत्री बनाया गया था। संसदीय नियमों और संविधान के अनुसार मंत्री पद की शपथ लेने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए यह अनिवार्य होता है कि वह छह महीने के भीतर राज्य की विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बने।
इसी संवैधानिक बाध्यता को पूरा करने के लिए भाजपा ने अपने कोटे की सुरक्षित सीट खाली करने का बड़ा निर्णय लेते हुए देवेश कुमार ने अपने कार्यकाल के पूरा होने से पहले ही एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया था। बता दें कि उनके कार्यकाल का 7 महीना अभी बचा हुआ था।
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