नई दिल्ली। देश के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में शामिल इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Indira Gandhi International Airport) को वैश्विक ट्रांजिट हब के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू हो गई है। यात्रियों और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए एयरपोर्ट पर कई आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, जिनमें टर्मिनलों के बीच ऑटोमेटेड एयर ट्रेन चलाने की योजना भी शामिल है। इस पहल का उद्देश्य यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना और एयरपोर्ट पर यात्रा अनुभव को अधिक सुविधाजनक बनाना है। ऑटोमेटेड एयर ट्रेन (Automated Air Train) शुरू होने के बाद यात्रियों को एक टर्मिनल से दूसरे टर्मिनल तक पहुंचने में कम समय लगेगा और ट्रांजिट यात्रियों को विशेष राहत मिलेगी।
DIAL के अनुसार, दिल्ली एयरपोर्ट पर वर्तमान में सालाना 7.9 करोड़ से अधिक यात्रियों की आवाजाही हो रही है। यह हवाई अड्डा 155 से अधिक घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मार्गों को जोड़ता है, जिससे यह देश के सबसे महत्वपूर्ण विमानन केंद्रों में शामिल हो गया है। डायल का लक्ष्य आगामी वर्षों में यात्री क्षमता को बढ़ाकर 11 करोड़ प्रति वर्ष तक पहुंचाना है। इसके लिए एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे का विस्तार, यात्री सुविधाओं में सुधार और परिचालन क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
विदेशों की तकनीक से तैयार होगी व्यवस्था
डायल) के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, एयर ट्रेन के लिए आवश्यक तकनीक और ट्रेनें विदेशों से लाई जा सकती हैं। इसके लिए दक्षिण कोरिया, जकार्ता, इटली और स्विट्जरलैंड में संचालित प्रणालियों का अध्ययन किया गया है। इन देशों की आधुनिक एयरपोर्ट ट्रांजिट प्रणालियों के अनुभवों के आधार पर दिल्ली एयरपोर्ट के लिए उपयुक्त मॉडल तैयार किया जाएगा। हालांकि, परियोजना के तहत ट्रैक बिछाने, स्टेशन निर्माण और अन्य सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कार्य भारतीय कंपनियों को सौंपे जाएंगे। इससे घरेलू उद्योग को बढ़ावा मिलने के साथ परियोजना के क्रियान्वयन में स्थानीय विशेषज्ञता का भी उपयोग किया जा सकेगा।
स्काईवॉक का भी प्रस्ताव
टर्मिनलों के बीच प्रस्तावित ऑटोमेटेड एयर ट्रेन के साथ-साथ कार्गो स्टेशन और कार्गो टर्मिनल को जोड़ने के लिए स्काईवॉक बनाने का भी प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य यात्रियों और कार्गो संचालन दोनों को अधिक सुगम और आधुनिक बनाना है। योजना के तहत एयर ट्रेन में सवार होने के लिए यात्रियों को अपना बोर्डिंग पास स्कैन करना होगा। इससे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और केवल अधिकृत यात्री ही इस सेवा का उपयोग कर सकेंगे। पूरी प्रणाली को तेज, सुरक्षित और स्वचालित बनाने पर जोर दिया जा रहा है। डायल के अधिकारियों के मुताबिक, व्यस्ततम समय में एयर ट्रेन टर्मिनल-1 और टर्मिनल-3 के बीच बिना रुके संचालित की जा सकती है। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के बीच कनेक्टिविटी और तेज होगी तथा यात्रियों का ट्रांजिट समय कम होगा।
यात्रियों की भीड़ नियंत्रित कर रहा AI
अब एयरपोर्ट पर एक्सओविस (Xovis) नामक AI आधारित लाइन प्रबंधन प्रणाली भी लागू की गई है। यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित प्रणाली यात्रियों की भीड़ का वास्तविक समय में विश्लेषण करती है और विभिन्न जांच व प्रवेश बिंदुओं पर कतारों के प्रबंधन में मदद करती है। इससे यात्रियों की आवाजाही अधिक व्यवस्थित हुई है और भीड़भाड़ वाले समय में संचालन को बेहतर बनाने में सहायता मिल रही है। अधिकारियों का कहना है कि एक्सओविस प्रणाली के जरिए एयरपोर्ट प्रबंधन को विभिन्न क्षेत्रों में यात्रियों की संख्या, कतारों की लंबाई और प्रतीक्षा समय की जानकारी मिलती है। इसके आधार पर जरूरत के अनुसार अतिरिक्त संसाधन और कर्मचारी तैनात किए जा सकते हैं, जिससे यात्रियों को कम इंतजार करना पड़ता है।
DIAL ने दिल्ली के IGI Airport को वैश्विक ट्रांजिट हब के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ऑटोमेटेड एयर ट्रेन यानी ऑटोमेटेड पीपल मूवर (APM) परियोजना को मंजूरी दे दी है। करीब 4000 करोड़ रुपये की लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अगले 30 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना के तहत एयरपोर्ट के टर्मिनल-1, टर्मिनल-2, टर्मिनल-3, एरोसिटी और कार्गो सिटी को एक आधुनिक स्वचालित रेल प्रणाली के जरिए आपस में जोड़ा जाएगा। इससे यात्रियों को टर्मिनलों के बीच तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन की सुविधा मिलेगी, जबकि एयरपोर्ट परिसर के भीतर कनेक्टिविटी भी काफी बेहतर होगी।
ट्रांजिट यात्रियों के लिए मुफ्त होगी सेवा
डायल ने बताया कि ट्रांजिट यात्रियों के लिए एयर ट्रेन सेवा पूरी तरह नि:शुल्क होगी। वहीं, गैर-यात्रियों को इस सुविधा का उपयोग करने के लिए निर्धारित किराया देना होगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य कनेक्टिंग फ्लाइट वाले यात्रियों को अधिक सुविधा प्रदान करना और एयरपोर्ट के भीतर आवाजाही को सुगम बनाना है। करीब 7.7 किलोमीटर लंबी एयर ट्रेन लाइन विकसित की जाएगी। इसमें लगभग 5.7 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड (ऊंचा) होगा, जबकि करीब दो किलोमीटर ट्रैक जमीन पर बनाया जाएगा। परियोजना के तहत आधुनिक स्टेशन, स्वचालित संचालन प्रणाली और तेज यात्री परिवहन व्यवस्था विकसित की जाएगी।
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