दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने आज आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal), वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया(Manish Sisodiya) और पूर्व विधायक दुर्गेश पाठक (Durgesh Pathak) को नए नोटिस जारी करने का आदेश दिया है। यह आदेश CBIकी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें शराब नीति मामले में निचली अदालत द्वारा आरोपियों को आरोपमुक्त किए जाने को चुनौती दी गई है। CBI ने अपनी याचिका में ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें फरवरी में आबकारी नीति मामले से जुड़े कई आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया गया था। एजेंसी का कहना है कि निचली अदालत के फैसले की दोबारा जांच जरूरी है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 25 मई को तय की है।
जस्टिस मनोज जैन ने सुनवाई के दौरान इस बात पर गौर किया कि तीनों प्रतिवादी अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक आज भी कोर्ट में पेश नहीं हुए थे। अदालत को यह भी बताया गया कि पिछली तारीखों पर भी तीनों प्रतिवादी कोर्ट में उपस्थित नहीं हुए थे। CBI ने अपनी याचिका में ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें फरवरी में आबकारी नीति मामले से जुड़े कई आरोपियों को डिस्चार्ज कर दिया गया था। एजेंसी का कहना है कि निचली अदालत के फैसले की दोबारा जांच जरूरी है।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के सामने पेश नहीं हो रहे थे ‘आप’ नेता इस पर जस्टिस जैन ने CBI को निर्देश दिया कि वह तीनों नेताओं को यह जानकारी दे कि शराब नीति केस अब उनके पास ट्रांसफर हो चुका है। अदालत ने कहा कि यदि अब वे पेश होना चाहते हैं तो अदालत में उपस्थित हो सकते हैं। अदालत ने कहा, “हम समझते हैं कि यह केस ट्रांसफर होकर आया है। यह केस पहले से ही अखबारों की सुर्खियों में है, इसलिए हम मानकर चलते हैं कि उन्हें पता है कि केस ट्रांसफर हो गया है। लेकिन फिर भी, हम उन्हें एक नया नोटिस भेजेंगे। एक-दो दिन आगे-पीछे होने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा, और जब वे यहां आ जाएंगे, तभी हमें पता चल पाएगा कि वे मौजूदा आवंटन से संतुष्ट हैं या नहीं। सबसे अच्छी स्थिति तो यही होगी कि सभी लोग यहां मौजूद हों और सभी की बात सुनी जाए।”
अगली सुनवाई 25 मई को होगी
कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी सुनवाई की अगली तारीख से पहले कोई भी जवाब दाखिल कर सकते हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि जिन प्रतिवादियों की ओर से कोई वकील पेश नहीं हो रहा है, उन्हें नोटिस तामील कराया जाए। मामले की अगली सुनवाई 25 मई को तय की गई है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि CBI की याचिका पर नोटिस 9 मार्च को जारी किया गया था और सभी पक्षों को तामील कराया जा चुका है। उन्होंने अदालत से कहा, “उन्हें इस बात की जानकारी है। इसके बाद कई आदेश पारित किए गए। अभी मैं मामले के गुण-दोष पर नहीं जा रहा हूं। यह एक ऐसा मामला है जहां गंभीर आरोपों के कारण चार्जशीट दायर की गई थी। प्रतिवादियों ने डिस्चार्ज के लिए आवेदन दायर किए… आरोप तय करते समय सभी ने डिस्चार्ज की गुहार लगाई थी, कोई विशिष्ट आवेदन नहीं था। डिस्चार्ज का आदेश कानून की कसौटी पर खरा नहीं उतर सकता।” तुषार मेहता ने दलील दी कि यह मामला दिल्ली में हुए एक कथित ‘घोटाले’ से जुड़ा है और इस पर जल्द से जल्द फैसला होना चाहिए।
इस बीच, प्रतिवादियों में से एक की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट शदान फरासात ने कहा कि CBI की याचिका की स्वीकार्यता के खिलाफ कुछ आवेदन लंबित हैं, जिन पर पहले फैसला किया जाना चाहिए। उन्होंने अदालत से कहा, “मेरा तर्क यह है कि जिन वकीलों ने पुनर्विचार याचिका दायर की है, वे एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर या अन्य सरकारी वकील नहीं हैं। वे निजी वकील हैं। मैं अपने आवेदन पर बहस करूंगा।”
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