दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल में बुधवार को हुए भीषण अग्निकांड में 21 लोगों की मौत के बाद जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। शुरुआती जांच के मुताबिक, होटल में सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी की गई थी, जिसने हादसे की भयावहता को और बढ़ा दिया। अधिकारियों के अनुसार, होटल में उसकी निर्धारित क्षमता से करीब 4 गुना अधिक लोगों को ठहराया जा रहा था। इतना ही नहीं, होटल के पास न तो फायर सेफ्टी क्लियरेंस (Fire Safety Clearance) थी और न ही वैध ट्रेड लाइसेंस (Valid Trade License) मौजूद था। जांच में यह भी सामने आया है कि भवन में संबंधित अधिकारियों को जानकारी दिए बिना अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण किया गया था।
5 मंजिला इस इमारत में लोगों के बाहर निकलने के लिए केवल एक ही रास्ता था, जिससे आग लगने के बाद निकासी कार्य बेहद मुश्किल हो गया। अधिकारियों ने बताया कि इमारत का मुख्य प्रवेश द्वार सेंसर से संचालित था, जबकि कई खिड़कियां बंद थीं। ऐसे में आग और धुएं के फैलने के दौरान लोगों के पास बाहर निकलने के विकल्प बेहद सीमित रह गए। यही वजह रही कि कई लोग ऊपरी मंजिलों पर फंस गए और कुछ को जान बचाने के लिए खिड़कियों तथा बालकनियों से छलांग लगानी पड़ी।
बिल्डिंग प्लान भी नहीं किया जमा
अधिकारियों के मुताबिक, दिल्ली सरकार की बेड-एंड-ब्रेकफास्ट (B&B) नीति के तहत इस भवन में केवल 6 कमरों के संचालन की अनुमति थी, लेकिन यहां करीब 25 कमरे संचालित किए जा रहे थे। यानी निर्धारित क्षमता से कई गुना अधिक व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जा रही थीं। जांच में यह भी पता चला है कि संबंधित अधिकारियों के निर्देशों के बावजूद भवन संचालकों ने कभी भी इमारत की पूरी भवन योजना (बिल्डिंग प्लान) जमा नहीं की। इससे भवन की संरचना, सुरक्षा व्यवस्था और किए गए निर्माण कार्यों की आधिकारिक जांच और सत्यापन नहीं हो सका। इससे पहले जांच में यह भी सामने आया था कि होटल के पास आवश्यक फायर सेफ्टी मंजूरी और ट्रेड लाइसेंस नहीं था। इसके अलावा, बिना अनुमति अतिरिक्त मंजिलों का निर्माण किया गया था और पांच मंजिला इमारत में आपात स्थिति में निकासी के लिए केवल एक ही रास्ता उपलब्ध था।
फायर NOC भी नहीं
अधिकारियों के अनुसार, जिस इमारत में आग लगी उसकी ऊंचाई 15 मीटर से अधिक थी, ऐसे में नियमों के तहत उसके लिए फायर सेफ्टी एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) लेना अनिवार्य था। हालांकि जांच में पता चला है कि भवन के पास ऐसी कोई मंजूरी मौजूद नहीं थी। अधिकारियों ने बताया कि इस व्यावसायिक इमारत से जुड़े आवश्यक दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं कराए गए। संबंधित विभागों की ओर से मांगी गई जानकारी के बावजूद भवन मालिक की तरफ से कोई संतोषजनक जवाब या दस्तावेज जमा नहीं किए गए। जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि इस भवन के लिए कभी कोई अग्नि सुरक्षा मंजूरी जारी ही नहीं की गई थी। जानकारी के अनुसार, इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर एक रेस्तरां संचालित किया जा रहा था, जबकि बेसमेंट और ऊपरी मंजिलों का उपयोग होटल के रूप में किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि आग की शुरुआत निचले हिस्से से हुई, जिसके बाद धुआं और लपटें तेजी से पूरे भवन में फैल गईं।
बिजली उपकरण चालू होने के बाद लगी आग
जांच से जुड़े सूत्रों ने बताया कि सुबह एक खानसामा रेस्तरां में काम शुरू करने पहुंचा था। उसके द्वारा बिजली से चलने वाले उपकरण चालू किए जाने के कुछ ही समय बाद अचानक आग लग गई। प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती जानकारी के आधार पर बताया जा रहा है कि आग लगने से पहले या उसी दौरान विस्फोट जैसी तेज आवाज भी सुनाई दी थी, जिसके बाद लपटें तेजी से फैलने लगीं। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि देखते ही देखते धुआं और आग इमारत के अन्य हिस्सों तक पहुंच गई, जिससे होटल में ठहरे लोग फंस गए और बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण हो गया। उप मुख्य दमकल अधिकारी ए.के. मलिक ने बताया कि जांच के दौरान इमारत के संचालकों की ओर से कोई आवश्यक संदर्भ दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। वहीं लाइसेंसिंग एजेंसी के रिकॉर्ड में भी भवन से संबंधित जरूरी अनुमतियों और सुरक्षा मंजूरियों के पर्याप्त दस्तावेज नहीं मिले हैं।
ट्रेड लाइसेंस भी नहीं था
अधिकारियों के अनुसार, भवन मालिक ने ट्रेड लाइसेंस के लिए आवेदन तो किया था, लेकिन आवश्यक दस्तावेज और भवन योजना जमा नहीं किए जाने के कारण लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया कभी पूरी नहीं हो सकी। जांच से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि बिल्डिंग प्लान जमा नहीं होने की वजह से संबंधित भवन विभाग से मंजूरी नहीं मिल पाई और व्यावसायिक संचालन के लिए जरूरी लाइसेंस अधूरा ही रह गया। इसके बावजूद इमारत में होटल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। हादसे के दौरान बचाव कार्य भी बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। अधिकारियों के मुताबिक, तहखाने में फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए राहत दलों को शटर काटने के लिए विशेष कटर मशीनों का इस्तेमाल करना पड़ा। वहीं, इमारत की कई खिड़कियां बंद होने के कारण दमकलकर्मियों और बचाव दलों ने हथौड़ों से उन्हें तोड़कर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया।
जांच के लिए 20 से ज्यादा पुलिस टीमें गठित
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जांच में पता चला है कि पर्यटन विभाग का लाइसेंस जय मिश्रा के नाम पर जारी किया गया था। वहीं, इमारत के मालिक की पहचान 50 वर्षीय लवकेश बजाज के रूप में हुई है। पुलिस ने लवकेश बजाज को गिरफ्तार कर लिया है। इसके अलावा उनकी पत्नी को भी मामले में गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि होटल का संचालन तीन साझेदारों द्वारा किया जा रहा था। पुलिस को संदेह है कि इन साझेदारों का दिल्ली के विभिन्न इलाकों में कई अन्य होटल और गेस्टहाउस से भी संबंध हो सकता है। ऐसे में जांच का दायरा बढ़ाते हुए उनके अन्य प्रतिष्ठानों के दस्तावेजों और लाइसेंस की भी पड़ताल की जा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जांच के लिए 20 से अधिक विशेष टीमें गठित की हैं। ये टीमें भवन निर्माण से जुड़े दस्तावेजों, लाइसेंसिंग रिकॉर्ड, होटल संचालन, वित्तीय लेन-देन और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका की अलग-अलग स्तर पर जांच कर रही हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हादसे के लिए जिम्मेदार सभी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, यह भी जांच की जा रही है कि संबंधित विभागों की ओर से निगरानी में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई, जिसके कारण बिना जरूरी मंजूरियों के होटल का संचालन लंबे समय तक जारी रहा।
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