दिल्ली में DTC बस ड्राइवरों की हड़ताल का असर अब मेट्रो सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। बसों का संचालन प्रभावित होने के कारण मेट्रो में यात्रियों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हुई और गुरुवार को दिल्ली मेट्रो ने एक दिन में सबसे ज्यादा यात्रियों के सफर करने का नया रिकॉर्ड बनाया।गुरुवार को कुल 82,44,903 यात्रियों ने दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro) से सफर किया। इससे पहले एक दिन में सर्वाधिक यात्रियों के सफर करने का रिकॉर्ड पिछले वर्ष 8 अगस्त का था। उस दिन 81,87,674 यात्रियों ने मेट्रो का इस्तेमाल किया था। गुरुवार को करीब 57 हजार यात्रियों की बढ़ोतरी के साथ यह पुराना रिकॉर्ड टूट गया।
डीटीसी बस ड्राइवरों की हड़ताल के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों ने अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए मेट्रो का रुख किया। बस सेवा प्रभावित होने के बीच मेट्रो राजधानी में सार्वजनिक परिवहन का प्रमुख विकल्प बनी रही। डीटीसी बस ड्राइवरों की हड़ताल के कारण यात्रियों ने बड़ी संख्या में मेट्रो का रुख किया। दिल्ली मेट्रो की येलो लाइन और ब्लू लाइन के बाद पिंक लाइन पर सबसे अधिक भीड़ देखने को मिली। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के मुताबिक, यात्रियों की संख्या में यह बढ़ोतरी डीटीसी बस ड्राइवरों की हड़ताल के कारण हुई। डीएमआरसी ने बस सेवा प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए पहले से ही अतिरिक्त यात्रियों के दबाव से निपटने की तैयारी कर ली थी। यात्रियों की बढ़ी संख्या को देखते हुए गुरुवार को दिल्ली मेट्रो ट्रेनों ने 32 अतिरिक्त फेरे लगाए। अतिरिक्त फेरे चलाए जाने से व्यस्त रूटों पर यात्रियों की बढ़ती भीड़ को संभालने में मदद मिली।
डीटीसी बस ड्राइवरों की हड़ताल शुक्रवार को लगातार चौथे दिन भी जारी रही। निजी कंपनियों के माध्यम से नियुक्त बस ड्राइवर वेतन बढ़ोतरी समेत अपनी अन्य मांगों को लेकर हड़ताल पर डटे रहे। हड़ताल के कारण राजधानी में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था प्रभावित रही और यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। दिल्ली सरकार ने डीटीसी में कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त उन ड्राइवरों की बसों में ड्यूटी लगाई, जो दूसरे कार्यों में तैनात थे। सरकार की इस कोशिश के बाद कुछ डीटीसी बसें सड़कों पर दिखाई दीं, लेकिन ज्यादातर बसों का परिचालन नहीं हो पाने के कारण यात्रियों की परेशानी बनी रही। बसों की कमी का फायदा उठाते हुए कई यात्रियों को ऑटो, कैब और ई-रिक्शा का सहारा लेना पड़ा। यात्रियों के मुताबिक, कुछ जगहों पर ऑटो, कैब और ई-रिक्शा चालकों ने सामान्य से अधिक किराया वसूला।
बवाना, नरेला और नजफगढ़ में ज्यादा असर
बाहरी दिल्ली के बवाना और नरेला तथा दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के नजफगढ़ क्षेत्र में बस सेवा प्रभावित रही। बसें नहीं मिलने पर लोग ई-रिक्शा, ऑटो और मेट्रो के सहारे अपने गंतव्य तक पहुंचते नजर आए। हड़ताल के बीच सड़क पर डीटीसी की कुछ बसें जरूर दिखाई दीं, लेकिन इनके आने में काफी समय लग रहा था। इस वजह से सभी यात्री बसों में सवार नहीं हो पा रहे थे और उन्हें दूसरे साधनों का सहारा लेना पड़ा।
2700 ड्राइवरों को बसों पर लगाया
डीटीसी ने शुक्रवार को कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त 2,700 ड्राइवरों को बस संचालन के लिए उतारा। ये ड्राइवर पहले दूसरे कार्यों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। सामान्य दिनों में डीटीसी करीब 550 रूटों पर 6,300 बसों का परिचालन करता है। बताया जा रहा है कि शुक्रवार को करीब 2,700 बसों को सड़क पर उतारने की कोशिश की गई। हालांकि, कुछ स्थानों पर हड़ताल कर रहे ड्राइवरों द्वारा बसों के परिचालन में व्यवधान डालने की कोशिश की गई।
ई-रिक्शा, ऑटो और आरटीवी का सहारा
बसों की कमी के कारण यात्रियों को ई-रिक्शा, ऑटो और आरटीवी बसों का सहारा लेना पड़ा। लक्ष्मी नगर मेट्रो स्टेशन से मदर डेयरी, मंगलम अस्पताल और मयूर विहार की ओर जाने वाले यात्री इन साधनों पर निर्भर दिखे।यात्रियों के मुताबिक, ई-रिक्शा चालकों ने दो से ढाई किलोमीटर की दूरी के लिए 15 से 20 रुपये तक किराया मांगा। बसों के इंतजार में समय अधिक लगने के कारण कई यात्रियों ने मजबूरी में ऑटो या ई-रिक्शा का सहारा लिया।
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