दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने कहा कि बच्चों को राजधानी के ऐतिहासिक स्थलों और स्मारकों के बारे में केवल किताबों में पढ़ने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें इन विरासत स्थलों को प्रत्यक्ष रूप से देखने और समझने का अवसर भी मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिल्ली की विरासत को जानना सिर्फ इतिहास पढ़ने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि अपने शहर और अपनी जड़ों को समझने का माध्यम भी है। मुख्यमंत्री ने यह बात दिल्ली के 75 ‘सीएम श्री’ स्कूलों में ‘हेरिटेज क्लब’ की शुरुआत के दौरान कही।
आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को दिल्ली के समृद्ध इतिहास, संस्कृति और विरासत से जोड़ना है। रेखा गुप्ता ने कहा कि ऐतिहासिक स्थलों का प्रत्यक्ष अनुभव बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और रोचक बना सकता है। हेरिटेज क्लब के माध्यम से विद्यार्थियों को दिल्ली के विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों और स्मारकों को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।
आसपास की विरासत को जानें स्कूल
रेखा गुप्ता ने कहा कि स्कूलों को यह जानने की जरूरत है कि उनके आसपास मौजूद ऐतिहासिक इमारतों और स्थलों का क्या महत्व है और उनका दिल्ली के इतिहास से क्या संबंध है। उन्होंने कहा कि इतिहास के कई ऐसे अध्याय हैं, जिनकी जानकारी अब तक बच्चों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐतिहासिक स्थलों का प्रत्यक्ष अनुभव बच्चों के लिए सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और रोचक बना सकता है। हेरिटेज क्लब के माध्यम से विद्यार्थियों को दिल्ली के विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों और स्मारकों को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि अपनी जड़ों और शहर के इतिहास को समझना बच्चों में अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता और जुड़ाव बढ़ाने में मदद करेगा।
आसपास की ऐतिहासिक विरासत को जानेंगे बच्चे
रेखा गुप्ता ने कहा कि स्कूलों को यह जानना चाहिए कि उनके आसपास मौजूद ऐतिहासिक इमारतों और स्थलों का क्या महत्व है और उनका दिल्ली के इतिहास से क्या संबंध है। उन्होंने कहा कि इतिहास के कई ऐसे अध्याय हैं, जिनकी जानकारी अब तक बच्चों तक सही तरीके से नहीं पहुंच पाई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली का इतिहास बेहद समृद्ध है। राजधानी में अलग-अलग ऐतिहासिक कालखंडों, सांस्कृतिक परंपराओं, धार्मिक स्थलों, स्मारकों और स्थापत्य विरासत से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण स्मृतियां मौजूद हैं। हेरिटेज क्लबों के माध्यम से बच्चों को अपने शहर के इतिहास और विरासत को केवल किताबों में पढ़ने के बजाय उसे प्रत्यक्ष रूप से देखने, समझने और अनुभव करने का अवसर मिलेगा।
देश और अपनी जड़ों से जुड़ाव बढ़ेगा
रेखा गुप्ता ने कहा कि हेरिटेज क्लबों के जरिए बच्चों में देश, अपनी जड़ों और अपनी विरासत के प्रति जुड़ाव विकसित होगा। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक स्थलों का प्रत्यक्ष अनुभव विद्यार्थियों के लिए सीखने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और रोचक बना सकता है। इस अवसर पर दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि दिल्ली देश की राजनीतिक राजधानी होने के साथ-साथ देश की स्टार्टअप और सांस्कृतिक राजधानी के रूप में भी अपनी पहचान स्थापित करे, यह सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ विद्यार्थियों को दिल्ली की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना भी जरूरी है। दिल्ली का इतिहास अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण रहा है, लेकिन समय के साथ उसकी विशिष्ट पहचान और स्थानीय विरासत के कई महत्वपूर्ण पहलू व्यापक चर्चा से दूर हो गए हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को दिल्ली के गौरवशाली इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम, वीरों, महापुरुषों, कला, संस्कृति और स्थानीय परंपराओं से परिचित कराना जरूरी है।
‘महरौली से लाल किले तक सीमित नहीं इतिहास’
कला, संस्कृति और भाषा मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि दिल्ली का इतिहास केवल महरौली से लाल किले तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि ‘हेरिटेज क्लब’ के माध्यम से स्कूलों के छात्रों को दिल्ली के वास्तविक इतिहास, समृद्ध विरासत और संस्कृति से परिचित कराया जाएगा।उन्होंने कहा कि इस पहल के जरिए विद्यार्थियों को राजधानी की विरासत को करीब से समझने और उससे जुड़ने का अवसर मिलेगा। हेरिटेज क्लब बच्चों को दिल्ली के इतिहास के विभिन्न पहलुओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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