पुरुषोत्तम पात्र, गरियाबंद। बारिश की रिमझिम फुहारें भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं सकीं। देवभोग विकासखंड के अमलीपदर स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर से इस वर्ष भी भक्ति और उत्साह के साथ भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली गई। प्रसिद्ध कथावाचक पंडित युवराज पांडेय के नेतृत्व में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में छत्तीसगढ़ समेत ओडिशा, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

सुबह से लगातार हो रही हल्की बारिश के बावजूद श्रद्धालु मंदिर परिसर में डटे रहे। जैसे ही पंडित युवराज पांडेय ने भगवान जगन्नाथ को अपने कंधों पर उठाकर विधि-विधान से रथ पर विराजमान कराया, पूरा वातावरण “बोल कालिया” के जयघोष से गूंज उठा। पारंपरिक देव वाद्यों की मधुर धुन के बीच भगवान की रथयात्रा शुरू हुई, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने रथ की पवित्र डोर खींचकर पुण्य लाभ अर्जित किया।

जनप्रतिनिधियों की भी रही मौजूदगी

इस वर्ष की रथयात्रा में भाजपा प्रदेश महामंत्री पवन साय और सांसद रूप कुमारी चौधरी विशेष रूप से शामिल हुए। इसके अलावा प्रदेश के विभिन्न जिलों के साथ-साथ ओडिशा, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अमलीपदर पहुंचे और भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर रथयात्रा में सहभागिता निभाई।

गुंडीचा मंदिर में दिखी छत्तीसगढ़िया संस्कृति की झलक

रथयात्रा के दौरान भगवान जगन्नाथ को नौ दिनों के लिए अस्थायी गुंडीचा मंदिर में विराजमान कराया गया। इस वर्ष गुंडीचा मंदिर को विशेष रूप से छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की थीम पर सजाया गया।

पंडित युवराज पांडेय ने बताया कि उनका उद्देश्य भगवान को “छत्तीसगढ़ महतारी के कोरा” में विराजमान होने का भाव प्रस्तुत करना था। इसी सोच के साथ मंदिर परिसर में छत्तीसगढ़िया संस्कृति और छत्तीसगढ़ महतारी की झलक को आकर्षक रूप से प्रदर्शित किया गया, जिसे श्रद्धालुओं ने खूब सराहा।

नौ दिनों तक चलेगा विशेष पूजन और महाप्रसादी

भगवान जगन्नाथ के गुंडीचा मंदिर में विराजमान होने के साथ ही अब बाहुदा यात्रा तक लगातार नौ दिनों तक विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। इस दौरान प्रतिदिन पांच पहर भगवान का विशेष पूजन किया जाएगा।

दोपहर में श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी भंडारे का आयोजन होगा, जबकि शाम को भगवान जगन्नाथ की विशेष आरती श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेगी। इसके साथ ही गुंडीचा मंदिर परिसर में नौ दिनों तक विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा।

बारिश के बीच उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ और भक्ति से सराबोर वातावरण ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आस्था के आगे मौसम की कोई बाधा मायने नहीं रखती। अमलीपदर की यह रथयात्रा हर वर्ष की तरह इस बार भी श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक समरसता का अनूठा संगम बनकर सामने आई।

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