पटना। शहर के चर्चित दीघा थाना क्षेत्र के अंतर्गत 95 नंबर गेट के पास गत 31 जुलाई की रात हुई सुरेंद्र साव (45) नामक दुकानदार की हत्या के मामले में पुलिस की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, कई चौकाने वाले और नए खुलासे सामने आ रहे हैं। इस हत्याकांड को बीते हुए छह दिन से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन पटना पुलिस अभी तक मुख्य आरोपियों तक नहीं पहुंच पाई है। पुलिस के सुस्त रवैये और अपराधियों की गिरफ्तारी न होने के कारण पीड़ित परिवार में भारी आक्रोश और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में अब पारिवारिक कलह, संपत्ति विवाद के साथ-साथ एक नए लव एंगल ने भी एंट्री ले ली है, जिससे पुलिस की तफ्तीश का दायरा काफी व्यापक हो गया है।

​31 जुलाई की रात को दिया गया था खौफनाक वारदात को अंजाम

​घटना गत 31 जुलाई की रात लगभग 8 बजे की बताई जा रही है। मृतक सुरेंद्र साव अपनी रोजाना की तरह अपनी दुकान पर मौजूद थे और अपने काम में व्यस्त थे। इसी दौरान घात लगाए बैठे अज्ञात बदमाशों ने उन पर अचानक ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं, जिससे वह गंभीर रूप से लहूलुहान होकर वहीं जमीन पर गिर पड़े। इस अचानक हुए जानलेवा हमले से आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। गोलीबारी की आवाज सुनकर स्थानीय लोग मौके पर इकट्ठा हुए, जिसके बाद खून से लथपथ गंभीर रूप से घायल सुरेंद्र साव को तुरंत इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद इलाज के दौरान उनकी जान नहीं बचाई जा सकी और अस्पताल में ही उनकी मौत हो गई।

​पत्नी सविता देवी ने देवर और देवरानी पर लगाया सीधा गंभीर आरोप

​इस मर्डर मिस्ट्री को लेकर मृतक की पत्नी सविता देवी ने दीघा थाने में लिखित बयान दर्ज कराया है। अपने बयान में उन्होंने अपने ही परिवार के सदस्यों पर पति की हत्या की साजिश रचने और उसे अंजाम दिलवाने का गंभीर आरोप लगाया है। सविता देवी का कहना है कि उनके परिवार में पैतृक जमीन के बंटवारे को लेकर पिछले काफी लंबे समय से विवाद चला आ रहा था। उनका साफ आरोप है कि इसी संपत्ति के विवाद की रंजिश के चलते उनके छोटे देवर निरंजन साव, देवरानी कंचन देवी और उनके एक बाहरी सहयोगी रमेश सिंह ने सोची-समझी साजिश के तहत उनके पति सुरेंद्र साव की हत्या करवाई है।

​मामले में सामने आया नया लव एंगल

​पुलिस सूत्रों से मिली बेहद गोपनीय जानकारी के अनुसार, इस पूरे हत्याकांड में एक नया पहलू सामने आया है। आरोपी रमेश सिंह मूल रूप से परिवार का कोई सीधा सदस्य नहीं था, बल्कि वह दोनों भाइयों के बीच होने वाले पारिवारिक और जमीनी विवादों में अक्सर मध्यस्थ यानी बिचौलिये की भूमिका निभाया करता था। पुलिस की शुरुआती जांच में यह बात भी खुलकर सामने आई है कि इसी मध्यस्थता के दौरान रमेश सिंह की नजदीकियां आरोपी पक्ष की एक महिला के साथ काफी बढ़ गई थीं। इसके बाद रमेश सिंह ने कथित तौर पर एक पक्ष विशेष का पूरी तरह से समर्थन करना शुरू कर दिया था। इतना ही नहीं, वह संपत्ति विवाद के इस मामले में मृतक सुरेंद्र साव पर अपनी पांच धुर जमीन दूसरे पक्ष के नाम पर लिखवाने के लिए लगातार भारी दबाव भी बना रहा था। इन्हीं सनसनीखेज तथ्यों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अब पुलिस इस पूरे हत्याकांड की जांच बेहद गहराई से लव एंगल को ध्यान में रखकर भी कर रही है।

​तकनीकी साक्ष्यों के सहारे आरोपियों की धरपकड़ में जुटी पुलिस

​घटना के छह दिन बीत जाने के बाद भी मुख्य नामजद आरोपी मृतक का छोटा भाई निरंजन साव, उसकी पत्नी कंचन देवी और बाहरी सहयोगी रमेश सिंह पुलिस की पकड़ से कोसों दूर और लगातार फरार चल रहे हैं। पटना पुलिस और विशेष अनुसंधान दल इनकी गिरफ्तारी के लिए पटना तथा अन्य संभावित ठिकानों पर लगातार ताबड़तोड़ छापेमारी कर रहा है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि इस मामले में कुछ बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी और डिजिटल साक्ष्य हाथ लगे हैं, जिनकी गहनता से फोरेंसिक और टेक्निकल जांच की जा रही है। पुलिस का यह भी कहना है कि अपराधियों के मोबाइल लोकेशन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के आधार पर उनकी तलाश जोर-शोर से जारी है। जल्द ही सभी फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर इस ब्लाइंड मर्डर केस का पूरी तरह से पर्दाफाश किया जाएगा।