उत्तर प्रदेश में डाक विभाग ने स्थान की अधिक सटीक डिजिटल पहचान के लिए DigiPIN व्यवस्था शुरू की है. यह मौजूदा छह अंकों वाले PIN कोड का विकल्प नहीं है, बल्कि उसके साथ डिजिटल लोकेशन की जानकारी उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था है.
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में पते और लोकेशन की पहचान को अधिक सटीक बनाने के लिए डाक विभाग ने DigiPIN की डिजिटल व्यवस्था शुरू की है. यह 10 अंकों का डिजिटल कोड किसी स्थान की भौगोलिक स्थिति की पहचान करने में मदद करेगा और डाक, पार्सल समेत कई सेवाओं के लिए लोकेशन को अधिक सटीक बनाएगा.
DigiPIN को मौजूदा छह अंकों वाले PIN कोड का विकल्प नहीं बनाया गया है. PIN कोड किसी बड़े क्षेत्र, डाकघर या इलाके की पहचान करता है, जबकि DigiPIN किसी स्थान की अधिक सटीक डिजिटल लोकेशन बताने में मदद करेगा.
PIN कोड से अलग
एक ही PIN कोड के दायरे में कई गांव, मोहल्ले और घर हो सकते हैं. ऐसे में डाक या पार्सल की डिलीवरी के दौरान वास्तविक स्थान तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है.
DigiPIN इसी अंतर को कम करने के लिए स्थान आधारित डिजिटल पहचान उपलब्ध कराता है. इसे India Post, IIT Hyderabad और National Remote Sensing Centre यानी NRSC, ISRO के सहयोग से विकसित किया गया है.
यह तकनीक किसी स्थान की भौगोलिक स्थिति के आधार पर डिजिटल कोड तैयार करती है. इससे किसी जगह को नक्शे पर ज्यादा सटीक तरीके से चिन्हित करने में मदद मिल सकती है.
डिलीवरी में फायदा
DigiPIN से किसी पते की सटीक लोकेशन मिलने पर डिलीवरी एजेंट को संबंधित स्थान तक पहुंचने में आसानी हो सकती है. खासकर दूरदराज के इलाकों में ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए यह व्यवस्था डिलीवरी को व्यवस्थित करने में मददगार हो सकती है.
आपातकालीन सेवाओं में भी सटीक डिजिटल लोकेशन उपयोगी हो सकती है. एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य सेवाओं को संबंधित स्थान तक पहुंचने में इससे सहायता मिल सकती है.
ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में इसका महत्व और बढ़ सकता है, जहां कई जगहों पर मकान नंबर या सड़क से जुड़ा स्पष्ट पता उपलब्ध नहीं होता.
ऐसे पाएं DigiPIN
अपना DigiPIN जानने के लिए India Post की आधिकारिक DigiPIN सेवा का इस्तेमाल किया जा सकता है. वेबसाइट पर मैप के जरिए संबंधित स्थान का चयन करने के बाद उस जगह का DigiPIN प्राप्त किया जा सकता है.
इसके लिए मोबाइल या दूसरे डिवाइस की लोकेशन सुविधा का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. DigiPIN को डिजिटल लोकेशन पहचान के तौर पर उपयोग करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है.
यह व्यवस्था ऑफलाइन परिस्थितियों में भी उपयोगी बनाने के उद्देश्य से विकसित की गई है. हालांकि, छह अंकों वाला मौजूदा PIN कोड अभी समाप्त नहीं हुआ है और डाक व्यवस्था में उसकी भूमिका बनी रहेगी.
उन्नाव पोस्ट मैनेजर
एक पोस्ट मैनेजर ने DigiPIN को एक यूनिक व्यवस्था बताया. उन्होंने कहा कि इससे डाक विभाग को भी काफी सहूलियत मिलेगी.
उन्होंने ऑनलाइन शॉपिंग के बढ़ते बाजार का उल्लेख करते हुए कहा कि डिलीवरी के दौरान डिलीवरी मैन को उचित स्थान तक पहुंचने में कम समय लगेगा और वह बिना किसी संस्था की मदद के संबंधित स्थान तक पहुंच सकेगा.
आने वाले समय में DigiPIN का इस्तेमाल डाक, लॉजिस्टिक्स, ई-कॉमर्स और आपातकालीन सेवाओं में उपयोगी हो सकता है. यह व्यवस्था पारंपरिक पते के साथ डिजिटल लोकेशन को जोड़कर सेवाओं की पहुंच को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है.

