हेमंत गुर्जर, देवास। सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा दूसरे दिन चार नदियों का पवित्र जल लेकर देवास जिले के सिंदुरिया गांव पहुंची। जहां से यात्रा तराना की ओर रवाना हुई। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की पत्नी नम्रता राव ने किसानों की समस्याओं को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार 365 दिन किसान कल्याण वर्ष मनाने की घोषणा कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत में किसान खाद-बीज की कमी और फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
दिग्विजय सिंह की पत्नी नम्रता राव ने राज्य सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यदि किसानों को समय पर खाद-बीज नहीं मिल रहा और उनकी उपज का उचित दाम नहीं मिल रहा, तो इसे किसान कल्याण वर्ष कैसे कहा जा सकता है? उन्होंने कहा कि केवल घोषणाओं से किसानों का कल्याण नहीं होगा, बल्कि उन्हें जरूरी सुविधाएं भी उपलब्ध करानी होंगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसानों की समस्याओं को राजनीतिक स्तर पर उठाने का प्रयास किया जाएगा और वे किसानों के साथ खड़ी हैं।
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बड़ी संख्या में समर्थक कर रहे कदमताल
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह इस समय अपनी नई पदयात्रा को लेकर सुर्खियों में छाए हुए हैं। विजयादशमी (दशहरा) के पावन अवसर पर उज्जैन में महाकाल की भूमि से उन्होंने पूरे जोर-शोर के साथ अपनी पदयात्रा का आगाज कर दिया है। इस यात्रा को ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ नाम दिया गया है, जिसमें उनकी पत्नी अमृता सिंह के अलावा बड़ी संख्या में समर्थक भी कदमताल करते नजर आ रहे हैं।
क्या है यात्रा का पूरा स्वरूप
यह पदयात्रा लगभग 900 किलोमीटर लंबी है, जिसके तहत दिग्विजय सिंह प्रतिदिन औसतन 15 किलोमीटर का सफर तय करेंगे। इस यात्रा का आधा सफर मध्य प्रदेश में और बाकी आधा सफर उत्तर प्रदेश में तय होगा। यात्रा के दौरान तिरंगे के साथ-साथ पांच रंगों की विशेष ध्वजा भी साथ चल रही है।
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दिग्विजय सिंह भले ही अपनी इस यात्रा को ‘गैर-राजनीतिक’ बता रहे हैं और इसे जनता के सामने अपनी बात रखने का माध्यम कह रहे हैं, लेकिन इसके राजनीतिक निहितार्थों से इंकार नहीं किया जा सकता। यात्रा की शुरुआत से ही वे सत्ता पक्ष पर हमलावर है। उन्होंने राम मंदिर निर्माण में चंदे की गड़बड़ी और वोट चोरी जैसे गंभीर मुद्दे उठाए है। खुद को सबसे बड़ा सनातनी बताते हुए उनका कहना है कि उन्होंने भी मंदिर के लिए चंदा दिया था, इसलिए उसका हिसाब दिया जाना चाहिए।

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