Pakistan out of US-Iran Peace Talks: एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने पाकिसतान को उसकी औकात दिखाई है। ट्रंप ने पाक को ठेंगा दिखाते हुए अमेरिका-ईरान शांति वार्ता से पाकिस्तान को बाहर कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में शामिल देशों का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर के नाम लिया। जबकि पाकिस्तान का नाम नहीं लिया। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित बातचीत को लेकर अभी तक तारीख और स्थान तय नहीं हुआ है। इससे पहले रिटायर्ड जनरल जैक कीन पाकिस्तान और कतर पर ईरान के पक्ष में झुकाव रखने का आरोप लगा चुके थे।

बता दें कि जारी युद् के बीच अमेरिका और ईरान एक बार फिर बातचीत के टेबल पर आने के लिए प्रयासरत है। हालांकि दोनों देशों के बीच अविश्वास है। ट्रंप ने ईरान के साथ जारी बातचीत को लेकर कहा कि यह वार्ता ईरान के अनुरोध पर हो रही है और इसमें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर का समर्थन है।

ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब, UAE और कतर ने अमेरिका को ईरान पर बड़े सैन्य हमले से पीछे हटने और बातचीत का रास्ता अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके मुताबिक अब बातचीत में होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों का समाधान तलाशना अहम है। हालांकि, ईरान ने ट्रंप के सीधे बातचीत शुरू होने के दावे को खारिज किया है और कहा है कि फिलहाल उसकी बातचीत ओमान के साथ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही को लेकर हो रही है।

गौर करने वाली बात यह है कि ट्रम्प ने अपने बयान में पाकिस्तान का कोई जिक्र नहीं किया। जबकि हाल के दिनों में कुछ रिपोर्टों में पाकिस्तान को भी ईरान-अमेरिका के बीच संभावित मध्यस्थ बताया जा रहा था।

तो क्या पाकिस्तान मध्यस्थता से बाहर हो गया?

बता दें कि जून 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद पाकिस्तान और कतर को औपचारिक तौर पर मध्यस्थ पक्ष बताया गया था। कतर के विदेश मंत्रालय ने भी जून में कहा था कि वह पाकिस्तान की अगुवाई वाली मध्यस्थता का समर्थन कर रहा है। 22 जून को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में हुई हाई-लेवल बैठक में अमेरिका और ईरान के साथ कतर और पाकिस्तान दोनों मध्यस्थ पक्ष के तौर पर शामिल हुए थे। उस समय परमाणु मुद्दे, प्रतिबंधों और आगे की बातचीत के लिए मंच बनाने पर चर्चा हुई थी। राष्ट्रपति ट्रंप के बयान से ऐसा संकेत जरूर मिलता है कि मौजूदा चरण में खाड़ी देश ज्यादा प्रमुख भूमिका में दिखाई दे रहे हैं।

पाकिस्तान को लेकर क्यों उठे सवाल?

पाकिस्तान की समस्या यह है कि वह एक तरफ ईरान के साथ अपने भौगोलिक और धार्मिक-सामाजिक संबंधों का फायदा उठा सकता है, तो दूसरी तरफ अमेरिका और सऊदी अरब के साथ उसके रणनीतिक रिश्ते भी हैं। यही संतुलन उसकी मध्यस्थता को मुश्किल बनाता है। हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि जून में खुद ट्रंप ने पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता को बातचीत आगे बढ़ाने में मददगार बताया था।

वार्ता की चर्चा के बीच खाड़ी में तनाव जारी

बता दें कि अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। द यरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान की IRGC ने मंगलवार सुबह कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर कम से कम तीन ड्रोन से हमला किया। फिलहाल किसी नुकसान या हताहत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।उधर, यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने बताया कि ओमान के तट के पास एक मालवाहक जहाज अज्ञात प्रोजेक्टाइल की चपेट में आया। एजेंसी ने जांच शुरू कर दी है और जहाजों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

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