दुर्ग। दुर्ग जिले में सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक के 267 महिला ग्राहकों से एक करोड़ 11 लाख से अधिक की धोखाधड़ी करने वाले दो आरोपियो को धमधा पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सेव फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड संचालक ने महिलाओं को ऋण दिलाने की प्रक्रिया में राशि का गबन करने का आरोप लगाया था।

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ग्रामीण एएसपी मणिशंकर चन्द्रा ने बताया कि 4 जुलाई को प्रार्थी अशोक कुमार वर्मा ने थाना धमधा में रिपोर्ट दर्ज कराया कि उनकी संस्था सेव फाइनेंशियल मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड का सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक लिमिटेड के साथ अनुबंध है। इसके माध्यम से महिलाओं को ऋण उपलब्ध कराया जाता है।

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ऑडिट के दौरान धमधा शाखा में पदस्थ शाखा प्रबंधक एवं कर्मचारियों ने ग्राहकों से प्राप्त ऋण राशि, किस्त एवं लोन क्लोजर की राशि कंपनी में जमा नहीं किए जाने की जानकारी प्राप्त हुई। कंपनी ने संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी कर राशि जमा करने का अवसर दिया गया, किन्तु उनके द्वारा न तो राशि जमा की गई और न ही नोटिस का कोई उत्तर दिया गया।

विस्तृत ऑडिट में पाया गया कि शाखा प्रबंधक एवं कर्मचारियों ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत कुल 267 ग्राहकों से प्राप्त 1, 11,93,173 रुपये की राशि का गबन कर धोखाधड़ी की है। शिकायत की जांच उपरांत थाना धमधा में धारा 316(5), 318 (4), 61 (2) बीएनएस के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई।

विवेचना के दौरान आरोपियों की तलाश कर दो आरोपियों साजा, जिला बेमेतरा निवासी अनिल विश्वकर्मा (23 वर्ष) और पाटन, जिला दुर्ग निवासी संदीप कुमार खूंटीहरे (31 वर्ष) को हिरासत में लेकर पूछताछ की, उन्होंने अपराध करना स्वीकार किया। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। प्रकरण के अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है।

रेलवे की जमीन पर बने मकान को वारिसों ने स्वेच्छा से सौंपा

दुर्ग। सरकारी भूमि पर वर्षों से बने कब्जों को हटाने के लिए अक्सर प्रशासन और संबंधित विभागों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। ऐसे मामलों में स्वेच्छा से कब्जा छोड़ने की घटनाएं विरले ही देखने को मिलती हैं। ऐसे समय दल्लीराजहरा मूल निवासी एवं वर्तमान में चंदखुरी निवासी एक परिवार ने ईमानदारी, नैतिकता और कानून के प्रति सम्मान का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसकी क्षेत्र में सराहना हो रही है।

दल्लीराजहरा के वार्ड क्रमांक 26 स्थित न्यू बस स्टैंड के समीप चंदैनी भाठा क्षेत्र में रेलवे बोर्ड की अधिग्रहित भूमि पर लगभग 50 वर्षों से निर्मित एक मकान को उसके वारिसों ने स्वेच्छा से रेलवे प्रशासन को वापस सौंपने का निर्णय लिया है। परिवार के मुखिया स्वर्गीय बलदेव प्रसाद यादव के निधन के बाद उनके पुत्र गोपाल कुमार यादव ने परिवार की सहमति से रेलवे प्रशासन को आवेदन प्रस्तुत कर उक्त संपत्ति को रेलवे की मूल संपत्ति के रूप में पुनः अपने अधिपत्य में लेने का अनुरोध किया है।

वर्तमान में दुर्ग जनपद पंचायत के सभापति गोपाल कुमार यादव ने अपने आवेदन में उल्लेख किया है कि संबंधित भूमि रेलवे बोर्ड की स्थायी संपत्ति है तथा उस पर निर्मित मकान का कोई शासकीय पट्टा, स्वामित्व दस्तावेज अथवा वसीयत उपलब्ध नहीं है। इसलिए परिवार ने नैतिक जिम्मेदारी का परिचय देते हुए मकान की चाबी रेलवे प्रशासन को सौंपने तथा भविष्य में किसी प्रकार का स्वामित्व दावा नहीं करने का निर्णय लिया है।

गोपाल यादव ने बताया कि उनके पिता बलदेव प्रसाद यादव का 13 जनवरी 2026 को निधन हो गया था। उनके निधन के पश्चात वैधानिक वारिस के रूप में उनकी माता द्रौपती बाई यादव, स्वयं गोपाल यादव, छोटे भाई गोविन्दा यादव तथा बहन सती यदु ने आपसी सहमति से उक्त मकान को बंद कर दिया है, और वर्तमान में सभी परिवारजन दुर्ग जिले के चंदखुरी क्षेत्र में निवासरत हैं। उनका कहना है कि उन्होंने इस संबंध में उन्होंने सीनियर डीएम साहब, डीआरएम आफिस रायपुर को स्वेच्छा से कब्जा छोड़ने संबंधी आवेदन सौंपा तो उनका कहना था पहली बार कोई ऐसा कर रहा है।

बारिश के बीच अतिथि शिक्षकों ने किया शिक्षा मंत्री निवास का घेराव

दुर्ग। अनिश्चितकालीन हड़ताल के क्रम में अतिथि शिक्षकों ने रविवार को दुर्ग स्थित शिक्षा मंत्री निवास का घेराव किया। बारिश के बीच उन्होंने बड़े ही जोश के साथ रैली के शक्ल में सेवा सदन पहुंचे। हालांकि पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा को देखते हुए बैरिकेट्स लगाए गए थे। इस वजह से ये शिक्षक नारेबाजी करते हुए ज्ञापन सौंपकर वापस धरना स्थल पर आ गये।

बता दें कि राज्य अतिथि शिक्षक ( विद्यामितान) कल्याण संघ छत्तीसगढ़ के आह्वान पर प्रदेशभर के राज्य अतिथि शिक्षकों ने बुधवार से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है । शिक्षामंत्री के विधानसभा क्षेत्र दुर्ग में ही राज्य अतिथि शिक्षकों ने धरना-प्रदर्शन कर सरकार से वर्षों से लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग की। संघ का कहना है कि 10 वर्षों से प्रदेश की शासकीय विद्यालयों में नियमित व्याख्याताओं के समान शैक्षणिक दायित्व निभाने के बावजूद राज्य अतिथि शिक्षकों को आज भी सम्मानजनक वेतन, सेवा सुरक्षा और वैधानिक सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं।

संघ के अनुसार प्रदेश के हजारों राज्य अतिथि शिक्षक लंबे समय से विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें मात्र 20 हजार रुपए मासिक मानदेय दिया जाता है, वह भी केवल 10 माह के लिए। वहीं • समान कार्य करने वाले अन्य शिक्षक वर्गों को कई गुना अधिक वेतन, नियमित सेवा का दर्जा तथा सभी वैधानिक सुविधाएं प्राप्त हैं। इसे संघ ने “समान कार्य, समान वेतन ” के सिद्धांत के विपरीत बताया है।

संघ ने आरोप लगाया कि 10 वर्षों की सेवा के दौरान अतिथि शिक्षकों को ग्रीष्मकालीन अवकाश का वेतन नहीं दिया जाता, नियमित अवकाश का लाभ नहीं मिलता और मातृत्व अवकाश से संबंधित आदेशों का भी समुचित पालन नहीं हुआ। हर वर्ष नए शैक्षणिक सत्र के साथ सेवा जारी रहने की अनिश्चितता बनी रहती है, जिससे हजारों परिवार आर्थिक और मानसिक असुरक्षा का सामना कर रहे हैं।

संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि विधानसभा, विभागीय बैठकों और विभिन्न मंचों पर राज्य अतिथि शिक्षकों की समस्याओं को कई बार उठाया गया। मोदी की गारंटी में भी राज्य अतिथि शिक्षक ( विद्यामितान) के संविलियन/समायोजन का स्पष्ट वादा किया गया था, लेकिन सरकार बनने के बाद भी इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। इससे शिक्षकों में गहरा असंतोष व्याप्त है।

जिला स्तरीय रोजगार मेला का आयोजन 10 को

दुर्ग। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग एवं जिला रोजगार स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र जिला-दुर्ग के संयुक्त तत्वावधान में 10 जुलाई को हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग नया भवन परिसर पोटिया में जिला स्तरीय रोजगार मेला का आयोजन किया जा रहा है।

रोजगार मेला हेतु कक्षा 10वीं, 12वीं, स्नातक, स्नातकोत्तर, आईटीआई, डिप्लोमा इंजीनियरिंग, इंजीनियरिंग स्नातक, एमबीबीएस, बीएएमएस, नर्सिंग, जीएनएम, एएनएम डिप्लोमा पैरामेडिकल एवं अन्य योग्यताधारी आवेदकों के कुल 14 नियोजकों से 1317 तकनीकी एवं गैर तकनीकी रिक्तियां प्राप्त हो चुकी हैं जो 8 जुलाई तक बढ़ सकती है एवं जिसकी जानकारी हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के वेबसाइट पर उपलब्ध है, इच्छुक आवेदक ऑनलाईन आवेदन कर सकते हैं। आवेदक रोजगार विभाग के वेबसाईट एवं छग रोजगार एप के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

इकरारनामा कराकर दूसरे के नाम करा दी रजिस्ट्री

राजनांदगांव। डोंगरगांव थाना क्षेत्र में जमीन बिक्री के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पुलिस ने एक व्यक्ति के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318 (4) के तहत अपराध दर्ज किया है। आरोप है कि आरोपी ने जमीन बेचने का इकरारनामा कर खरीदार से 95 हजार रुपये बतौर अग्रिम राशि लेने के बाद उसी जमीन की रजिस्ट्री किसी अन्य महिला के नाम कर दी।

पुलिस के अनुसार सेवताटोला निवासी मदनलाल तिवारी ने ग्राम बीजेभाठा स्थित खसरा नंबर 153/3, रकबा 0.1290 हेक्टेयर (करीब 0.32 एकड़) भूमि को राजनांदगांव निवासी मोहम्मद इकबाल को 8 लाख रुपये में बेचने का इकरार 30 सितंबर 2025 को किया था। सौदे के तहत आरोपी ने 80 हजार रुपये नकद और 18 अक्टूबर 2025 को 15 हजार रुपये ऑनलाइन प्राप्त किए।

इकरारनामे में चार माह के भीतर शेष राशि लेकर जमीन की रजिस्ट्री खरीदार के नाम करने की शर्त तय की गई थी। इकरार अवधि के भीतर ही दूसरे के नाम कर दी रजिस्ट्री शिकायत के अनुसार इकरारनामे की अवधि पूरी होने से पहले ही 10 नवंबर 2025 को आरोपी ने वही जमीन राजनांदगांव निवासी मोहिनी नागवंशी के नाम पंजीकृत विक्रय पत्र के माध्यम से बेच दी।

इसके बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि आरोपी ने उसके साथ छलपूर्वक धोखाधड़ी करते हुए अग्रिम राशि लेकर वादा तोड़ दिया। जांच के बाद दर्ज अपराध पुलिस अधीक्षक कार्यालय से प्राप्त शिकायत की जांच सहायक उप निरीक्षक से की गई। जांच के दौरान शिकायतकर्ता, गवाहों तथा संबंधित दस्तावेजों का परीक्षण किया गया। जांच में प्रथम दृष्टया आरोपी के धोखाधड़ी किया जाना पाए जाने पर के डोंगरगांव थाना में मदनलाल तिवारी खिलाफ बीएनएस की धारा 318 (4) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी गई है।

मूसलाधार बारिश से आमनेर पुल की सेंट्रिंग बही, बाईपास का काम फिर लटका

खैरागढ़। जिले में शनिवार रात से जारी मूसलाधार बारिश ने जहां आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है वहीं वर्षों से अधूरी पड़ी खैरागढ़ बाईपास परियोजना को भी बड़ा झटका लगा है। आमनेर नदी पर निर्माणाधीन पुल की सेंट्रिंग तेज जलप्रवाह में बह गई, जिससे निर्माण कार्य एक बार फिर प्रभावित होने की आशंका गहरा गई है। हालांकि, राहत की बात यह रही कि घटना के समय पुल पर कोई मजदूर कार्यरत नहीं था, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

लगातार बारिश के कारण जिले की अधिकांश नदी-नाले उफान पर हैं और कई स्थानों पर जलस्तर तेजी से बढ़ा है। मौसम विभाग ने भी अगले 48 घंटे के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए भारी बारिश की संभावना जताई है। इसी बीच आमनेर नदी में बढ़े जलप्रवाह का सीधा असर निर्माणाधीन पुल पर देखने को मिला।

जानकारी के अनुसार, पुल पर ढलाई का आगामी एक-दो दिनों में कंक्रीट कार्य प्रस्तावित था। इसके लिए मजदूरों द्वारा सेंट्रिंग का कार्य पूरा कर लिया गया था, लेकिन लगातार बारिश और नदी के तेज बहाव के कारण पूरी सेंट्रिंग ढहकर बह गई। संयोग से रविवार होने और खराब मौसम के कारण निर्माण कार्य बंद था। यदि उस समय मजदूर पुल पर कार्य कर रहे होते तो बड़ा हादसा हो सकता था।

खैरागढ़ बाईपास परियोजना को वर्ष 2008 में स्वीकृति मिली थी। राईस मिल से सोनेसरार तक लगभग छह किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण वर्षों पहले पूरा हो चुका है, लेकिन मार्ग में पड़ने वाली तीन नदियों-मोतीनाला, मुस्का और आमनेर- पर पुल निर्माण में लगातार हो रही देरी के कारण यह परियोजना आज तक पूरी नहीं हो सकी मोतीनाला और मुस्का नदी पर पुलों का निर्माण पूरा ‘चुका है, जबकि आमनेर नदी पर बनने वाला पुल अब भी अधूरा है। यही कारण है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद बाईपास का लाभ शहरवासियों को अब तक नहीं मिल पाया है।

आमनेर पुल निर्माण पहले ही वर्षों की देरी का सामना कर रहा है। अब सेंट्रिंग बह जाने की घटना से निर्माण कार्य दोबारा शुरू करने में अतिरिक्त समय लगने की संभावना है। यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो परियोजना के और अधिक विलंबित होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

लगभग 18 वर्षों से बाईपास की प्रतीक्षा कर रहे शहरवासियों की चिंता इस घटना के बाद और बढ़ गई है। लोगों का मानना है कि यदि आमनेर नदी का पुल समय पर बन गया होता, तो खैरागढ़ को वर्षों पहले ही बाईपास की सुविधा मिल जाती। अब एक बार फिर प्राकृतिक बाधा के चलते परियोजना की रफ्तार धीमी पड़ती नजर आ रही है।

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