भिलाईनगर। महापौर परिषद की बैठक एवं सामान्य सभा महापौर नीरज पाल एवं महापौर परिषद के सदस्यों द्वारा विगत तीन माह, 25 मार्च से नहीं हो रही है। इसके चलते शहर में होने वाले 32 से ज्यादा विकास कार्य रुके पड़े हैं।

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भिलाई निगम के महापौर नीरज पाल द्वारा निगम आयुक्त को आयुक्त मानने से इनकार के बाद भी आयुक्त धड़ल्ले से विकास कार्यों की फाइलों और ठेकेदारों के भुगतान का काम कर रहे हैं। भिलाई नगर निगम में जनप्रतिनिधियों की कमी इन तीन महीनों में देखने को नहीं मिली है। हर कार्य बिना जनप्रतिनिधि के भी सामान्य तरीके से चल रहा है।

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भिलाई नगर निगम के आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय ने स्पष्ट कर दिया कि बिना जनप्रतिनिधि के भी भिलाई नगर निगम का ऐसा कोई कार्य नहीं है जो नहीं चलाया जा सकता। वहीं सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के पार्षद इस बात को लेकर नाराज हैं कि नवंबर में चुनाव होना है। इसके पूर्व वार्ड में विकास के छोटे-बड़े कुछ कार्य हो जाएं तो लोगों को चेहरा दिखा पाएंगे।

भिलाई नगर निगम के कई पाषर्दों ने 25 मार्च को हुई विशेष सामान्य सभा में जोश- जोश में आयुक्त को हटाने को लेकर अपनी सहमति तो दे दी थी, लेकिन अब अपने वार्ड में विकास कार्य कराने के लिए आयुक्त से कैसे बात करें, इसे लेकर पाषर्दों में असमंजस की स्थिति है।

दुकान नीलामी से मिली प्राप्त राशि को रखने पर पंचायत सचिव की रुकी वेतन वृद्धि

दुर्ग। पंचायत सचिव ने आजीविका दुकानों की नीलामी से प्राप्त राशि अपने पास रखा गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत सीईओ ने पंचायत सचिव, ग्राम पंचायत पतोरा, महेन्द्र कुमार साहू का एक वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने आदेश जारी किया है।

आदेश में कहा गया कि महेन्द्र कुमार साहू, पंचायत सचिव, ग्राम पंचायत पतोरा, जनपद पंचायत पाटन द्वारा छत्तीसगढ़ ग्राम पंचायत लेखा नियम, 1999 के नियम 18 के प्रावधानो के विपरीत कार्य करते हुए ग्राम पंचायत पतोरा में आजीविका दुकानों की नीलामी से प्राप्त राशि में से 6 लाख 50 हजार रूपये को अधिकृत पंचायत खाते में जमा न कर निजी नियंत्रण में रखा गया, जिससे शासकीय धन के संधारण एवं प्रबंधन संबंधी गंभीर वित्तीय अनियमितता परिलक्षित हुयई है।

जिला पंचायत सीईओ ने कहा है कि पंचायत सचिव श्री साहू द्वारा छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (आचरण) नियम, 1998 के नियम 3 के प्रावधानो का स्पष्ट रूप से उल्लघंन किये जाने के फलस्वरूप छग पंचायत सेवा ( अनुशासन तथा अपील) नियम, 1999 के भाग तीन अनुशासन नियम 5 शास्तियां (क) लघु शास्तियां (दो) के तहत् आगामी एक वार्षिक वेतन वृद्धि संचयी प्रभाव से रोकी जाती है।

30 से शुरू होगी बीटेक काउंसिलिंग की प्रक्रिया

भिलाईनगर। तकनीकी शिक्षा संचालनालय (डीटीई) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए राज्य के तकनीकी शिक्षण संस्थानों में संचालित बैचलर ऑफ टेक्नालॉजी (बी.टेक.) पाठ्यक्रम में प्रवेश हेतु ऑनलाइन काउंसिलिंग का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है। प्रवेश प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होगी। अभ्यर्थी निर्धारित तिथियों में ऑनलाइन पंजीयन, विकल्प भरने, सीट आवंटन और प्रवेश की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।

प्रथम चरण के तहत अभ्यर्थी 30 जून सुबह 10 बजे से 6 जुलाई तक ऑनलाइन पंजीयन कर सकेंगे। जबिक सीटों के लिए विकल्प भरने की अंतिम तिथि 7 जुलाई शाम 5 बजे निर्धारित की गई है। इसके बाद 8 जुलाई तक विकल्पों में संशोधन किया जा सकेगा। प्रथम चरण का सीट आवंटन परिणाम 10 जुलाई शाम 5 बजे जारी होगा। चयनित अभ्यर्थियों को 11 जुलाई से 15 जुलाई तक संबंधित संस्थानों में प्रवेश लेना होगा।

द्वितीय चरण 17 जुलाई से दूसरे चरण में पंजीयन 17 जुलाई से 21 जुलाई तक होगा। विकल्प भरने की अंतिम तिथि 22 जुलाई तथा विकल्प संशोधन 23 जुलाई तक किया जा सकेगा। सीट आवंटन परिणाम 25 जुलाई को जारी होगा। चयनित विद्यार्थियों को 26 जुलाई से 30 जुलाई तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

लोहा स्क्रैप चोरी की वजह से सीआईएसएफ अधिकारियों का तबादला!

भिलाईनगर। सीआईएसएफ बीएसपी यूनिट में पदस्थ आला अधिकारियों का तबादला हुआ है. हाल ही में सामने आई स्क्रैप की आड़ में लोहा चोरी की आशंका को निराधार बताते हुए सूत्रों ने तबादलों की वजह पारिवारिक कारणों को बताया है.

सीआईएसएफ यूनिट बीएसपी, उपमहानिरीक्षक (आईपीएस) नागेन्द्र नाथ त्रिपाठी भिलाई में अप्रैल 2025 से पोस्टेड हैं। बताया जा रहा है कि उनकी पत्नी भारतीय वन सेवा (आईएफएस) की अधिकारी हैं, जो दिल्ली के निकट तैनात हैं तथा उनका एक छोटा बच्चा भी है। इन पारिवारिक परिस्थितियों को दृष्टिगत त्रिपाठी, आईपीएस, उपमहानिरीक्षक द्वारा मार्च माह में महानिदेशक, बल मुख्यालय से अनुरोध किया गया था कि उनका ट्रांसफर दिल्ली अथवा उसके निकट स्थित किसी सीआईएसएफ इकाई में किया जाए। उनके इस अनुरोध और पारिवारिक स्थितियों को देखते हुए उनका स्थानांतरण दिल्ली किया गया है।

वहीं सीआईएसएफ यूनिट बीएसपी उप कमांडेंट निधि सिंह ने भी अपने ट्रांसफर के संबंध में महानिदेशक, बल मुख्यालय को एक आवेदन प्रस्तुत किया था। उनके पति भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारी हैं, जो पूर्व में भिलाई में जीएसटी विभाग में पदस्थ थे। उनका स्थानांतरण मई माह में कोलकाता हो गया। इसके अतिरिक्त उनका एक छोटा बच्चा भी है। इन पारिवारिक परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए निधि सिंह द्वारा अपना स्थानांतरण कोलकाता अथवा उसके आसपास स्थित किसी सीआईएसएफ इकाई में किए जाने का अनुरोध किया गया था।

आवेदन पर कार्रवाई नहीं हुई तो बुजुर्ग दंपती बैठे भूख हड़ताल पर

डोंगरगांव। ग्राम खुर्सीपार इन दिनों अतिक्रमण, अवैध उत्खनन व परिवहन सहित अवैध कब्जे के मामलों में सुर्खियों में बना हुआ है. विगत दो दिनों से गांव के एक व्यक्ति के द्वारा अतिक्रमण और मुरूम के अवैध उत्खनन तथा परिवहन के मामले में प्रशासन सक्रिय है. वहीं अब बुजुर्ग दम्पत्ति के जमीन को दूसरे के द्वारा कब्जा कर मकान बनाने का मामला सामने आया है. इधर इस मामले में कार्यवाही नहीं होते देख बुजुर्ग दम्पत्ति डोंगरगांव तहसील कार्यालय के सामने भूख हड़ताल पर बैठ गए थे. वहीं तहसीलदार के द्वारा कार्यवाही के आश्वासन के बाद उन्होने अपना भूख हड़ताल खत्म किया.

इस संबंध में बुजुर्ग दम्पत्ति मन्नूलाल गंजीर 75 वर्ष तथा उनकी धर्मपत्नी रंभाबाई गंजीर ने बताया कि गांव के टुम्मन साहू के द्वारा उनके पैत्रिक भूमि पर जबरदस्ती कब्जाकर मकान बना रहा है. इस बात की शिकायत आवेदन के बाद कोर्ट के द्वारा फैसला गंजीर के पक्ष में दिया था. जिसके बाद कब्जा बताने वाले व्यक्ति के द्वारा कराए जाने वाले निर्माण में स्थानीय तहसील कार्यालय द्वारा स्थगन आदेश जारी किया गया. जिसके बाद काम रूक गया और कुछ दिनों बाद स्थगन आदेश सशर्त हटने के बाद अनावेदक के द्वारा पुनः विगत छः माह से निर्माण कार्य कर रहा है.

गंजीर ने बताया कि उसके पैत्रिक भूमि 190/1 के कुछ हिस्से में कब्जा कर निर्माण किया जा रहा है. उसकी शिकायत डोंगरगांव थाना और तहसील कार्यालय में किया था. जिस पर अधिकारियों के द्वारा काम रूकवाने और कार्यवाही का आश्वासन दिया था लेकिन आज २६ जून तक टुम्मन साहू के द्वारा सेंट्रिंग कार्य कर ढलाई करने की तैयारी थी. मेरे इस मामले में कार्रवाई होता नहीं देखा तो शुक्रवार को सुबह साढ़े 10 बजे से भूख हड़ताल पर बैठ गया.

वहीं इस मामले में तहसीलदार कमल किशोर साहू ने बताया कि इनके पैत्रिक भूमि से संबंधित केस है, और आवेदन के अनुसार गांव के ही एक व्यक्ति के द्वारा उनके भूमि के कुछ हिस्से में निर्माण किया जा. इसकी शिकायत मिली है. मेरे द्वारा इस मामले में पुलिस को ताकिद कर दिया गया है, और बुजुर्ग दम्पत्ति को समझाइश देकर उन्हे घर भेजा गया है.

पीएम आवास के लिए ग्रामसभा में हंगामा महिला ने किया आत्मदाह का प्रयास

राजनांदगांव। ग्राम पंचायत डिलापहरी में 24 जून को आयोजित ग्राम सभा की बैठक उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत आवास प्लस सर्वे 2.0 (2024 ) की पात्र हितग्राहियों की सूची में अपना नाम नहीं मिलने से नाराज एक महिला ने ग्राम सभा में स्वयं पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया। हालांकि मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए महिला को आग लगने से रोक लिया, जिससे एक बड़ी अनहोनी टल गई।

ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम सभा में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अंतर्गत आवास प्लस सर्वे 2.0 (2024) में शामिल ग्रामीण परिवारों की सूची का परीक्षण एवं सत्यापन किया गया। इस दौरान सूची का सार्वजनिक रूप से वाचन किया गया। बैठक के दौरान ग्राम डिलापहरी निवासी संतोषी राजपूत ने सूची में अपना नाम नहीं होने पर आपत्ति जताते हुए कारण पूछा।

इस पर सरपंच द्वारा बताया गया कि उनका नाम पात्र हितग्राहियों की सूची में शामिल नहीं है। बताया गया कि इस जवाब से असंतुष्ट होकर संतोषी राजपूत ने ग्राम सभा में अभद्र व्यवहार किया और “प्रधानमंत्री आवास कब मिलेगा” कहते हुए अपने ऊपर पेट्रोल डालकर आत्मदाह करने का प्रयास किया। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने तत्काल हस्तक्षेप कर उन्हें पकड़ लिया और घटना को गंभीर रूप लेने से रोक दिया।

घटना के बाद ग्राम पंचायत के सरपंच ने तत्काल इसकी सूचना अनुविभागीय अधिकारी एसडीएम राजनांदगांव तथा स्थानीय पुलिस चौकी प्रभारी को दी। मामले की जांच कराई गई, जिसमें यह तथ्य सामने आया कि श्रीमती संतोषी राजपूत के परिवार के नाम पर ग्राम डिलापहरी के वार्ड क्रमांक-01 में दो पक्के मकान दर्ज हैं। इनमें से एक मकान दो मंजिला बताया गया है।

जांच के आधार पर ग्राम पंचायत का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के प्रावधानों के अनुसार पक्का मकान होने की स्थिति में संबंधित परिवार योजना का पात्र हितग्राही नहीं माना जाता। इसी कारण संतोषी राजपूत का नाम पात्रता सूची में शामिल नहीं किया गया। इस संबंध में सरपंच गोविंद वर्मा ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में आत्मदाह जैसा कदम उचित नहीं है। उन्होंने संतोषी राजपूत द्वारा लगाए गए सभी आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि ग्राम पंचायत ने शासन के निर्धारित नियमों एवं पात्रता मानकों के अनुरूप ही कार्यवाही की है।

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