भिलाईनगर। बीएसपी सहित सेल की सभी यूनिटों में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआर स्कीम) लाने के पहले अनिवार्य सेवानिवृत्ति (कम्पलसरी रिटायरमेंट ) यानी जबरिया रिटायरमेंट किया जाएगा। इसके लिए सभी यूनिटों को निर्देश मिल चुका है कि वे नकारे माने जाने वाले कार्मिकों की शिनाख्त कर सूची तैयार कर लें। उन्हें पहले कम्पनी से विदा करें। इसके बाद वीआर स्कीम लांच की जाएगी। सीआर की लिस्ट भी लंबी होने की खबरें आ रही है।

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स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए कवायद चल ही रही थी इस बीच अब कार्पोरेट आफिस से सभी यूनिटों को नया निर्देश मिला है। यूनिट प्रमुखों से कहा गया है कि वे कम्पलसरी रिटायरमेंट के लिए कार्मिकों की सूची बनाने पर फोकस करें। जबरिया रिटायरमेंट के लिए एक दिन पहले शाम को ईडी, सीजीएम, जीएम की एक उच्च स्तरीय मीटिंग होने की खबर है। सभी विभाग प्रमुखों को अपने अपने एरिया के ऐसे कार्मिकों की सूची बनाना है जिनका पिछले कुछ समय से लगातार पास्ट सर्विस रिकार्ड ठीक नहीं है। जिनका सेवाकाल 30 वर्ष हो गया है और जिनकी उम्र 50 पार हो चुकी है वे टार्गेट में रहेंगे।

इन्हें जबरिया रिटायर किया जा सकता है : ऐसे अफसर जिन्हें लगातार तीन बार सी ग्रेड मिला हो यानी जिनका परफार्मेंस निरंतर खराब रहा हो, जिन्हें विजिलेंस इन्क्वायरी के आधार पर या किन्ही अन्य कारणों से चार्जशीट दिया गया हो, जिन पर चार्ज सिद्ध हो गया हो या कोर्ट केस चल रहा हो, जिनके खिलाफ वर्किंग को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही हो, जो स्वास्थ्यगत या अन्य कारणों से लगातार अनुपस्थित रहते हों, जिन कार्मिकों ने बीते वर्षों में प्रोडक्शन को प्रभावित करने की कोशिश की हो, जिनकी गतिविधियों को कम्पनी अपने खिलाफ मानती है।

एचआर विभाग के अफसर सक्रिय : इस्पात मंत्रालय के दबाव के चलते सभी यूनिट प्रमुखों पर भी स्वाभाविक रूप से दबाव बढ़ गया है। इसके चलते अब एचआर विभाग के अफसरों पर जिम्मेदारी आ गई है कि वे अपने अपने एरिया में जबरिया रिटायरमेंट देने के लिए जल्द से जल्द सूची तैयार करें। इस निर्देश के बाद सूची बनाने के काम में तेजी आ गई है। उनकी सूची में कितने नाम आते हैं उससे तय होगा कि कितने कार्मिकों पर गाज गिरेगी। बताया जा रहा है कि जबरिया रिटायरमेंट की लिस्ट भी खासी लंबी हो सकती है।

बैनर-पोस्टरों से अटे शहर के चौक-चौराहे

भिलाईनगर। शहर के प्रमुख चौक चौराहों सहित वन वे सड़क के मध्य विद्युत पोल जनप्रतिनिधियों एवं सामाजिक संगठनों के बैनर, पोस्टर एवं तोरण से अटे पड़े हैं। इस बैनर पोस्टर से शहर की सुंदरता को ग्रहण लग गया है। वहीं इंदौर शहर की सुंदरता को देखकर आने के बाद महापौर परिषद की एक बैठक में इन बैनर-पोस्टर पर कार्रवाई करने तथा एजेंसी के खिलाफ एफआईआर के निर्देश पारित किए गए थे। इसके बाद भी शहर में अंधाधुन बैनर पोस्टर लगाए जा रहे हैं। वहीं जोन आयुक्त व अधिकारी इसे हटाने कोई दिलचस्पी नहीं दिख रहे हैं।

नेहरू नगर चौक से केपीएस चौक होते हुए सूर्या मॉल चौक तक सूर्या मॉल चौक से जुनवानी जाने वाली सड़क एवं सूर्या मॉल से कोहका आने वाली मुख्य सड़क में जगह-जगह बैनर पोस्टर लगाए गए हैं। इसी तरह सुपेला घड़ी चौक से अण्डरब्रिज, सुपेला घड़ी चौक से गदा चौक तक डिवाइडर के मध्य लगे विद्युत पोल को बैनर पोस्टर से भर दिया गया है। यही नजारा जलेबी चौक से नेशनल रोड जाने वाली मुख्य सड़क, पावर हाउस अंबेडकर चौक होते हुए नंदिनी रोड जाने वाली सड़क के मध्य डिवाइडर में लगे विद्युत पोलों की है।

नहीं हो रही कार्रवाई : लंबे समय से भिलाई नगर निगम के राजस्व विभाग द्वारा कार्रवाई नहीं होने से नेताओं के पोस्टर शहर की सुंदरता पर ग्रहण लगा रहे हैं। शहर के जनप्रतिनिधि स्वयं अपनी फोटो लगाकर वाहवाही लूट रहे हैं।

निजी कंपनी के खनन सर्वे पर भड़का ग्रामीणों का आक्रोश

धमधा। धमधा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत दानी कोकड़ी में चूना पत्थर खनन परियोजना को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार उग्र होता जा रहा है। यह मामला अब केवल खनन सर्वे के विरोध तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि गांव के अस्तित्व, पर्यावरण संतुलन और ग्रामीणों के भविष्य का गंभीर मुद्दा बन चुका है। गांव में प्रस्तावित खदान के लिए निजी कंपनी मेसर्स इकोमेन माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा सर्वे किया जा रहा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरा प्रक्रिया ग्राम सभा की अनुमति और आमजन की सहमति के बिना शुरू कर दी गई। लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें इस संबंध में न तो पहले कोई जानकारी दी गई और न ही उनकी राय ली गई। ग्रामीणों ने बताया कि प्रस्तावित खदान क्षेत्र के भीतर लगभग 58.779 हेक्टेयर का महत्वपूर्ण जलग्रहण क्षेत्र आता है, जो पूरे गांव की जल व्यवस्था और खेती का मुख्य आधार है।

यदि इस क्षेत्र में खनन शुरू होता है, तो भूमिगत जल स्तर में गिरावट, जल स्रोतों के सूखने और खेती की उत्पादकता पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका है। इससे न केवल वर्तमान पीढ़ी बल्कि आने वाली पीढ़ियों का जीवन भी प्रभावित होगा । गांव के बुजुर्गों और किसानों का कहना है कि दानी कोकड़ी केवल एक गांव नहीं, बल्कि सैकड़ों वर्षों की परंपरा, संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने का प्रतीक है। यहां के खेत- खलिहान, घर और धार्मिक स्थल ग्रामीणों की पहचान से जुड़े हुए हैं। खनन कार्य शुरू होने की स्थिति में यह पूरी बसाहट उजड़ सकती है। इससे लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ेगा।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे को लेकर कई बार प्रशासन को ज्ञापन सौंपे, अधिकारियों से मुलाकात की और लिखित शिकायतें भी दर्ज कराईं, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई। ग्रामीण एकजुट होकर इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं और किसी भी कीमत पर अपनी जमीन और गांव को बचाने की बात कह रहे हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही खनन सर्वे पर रोक नहीं लगाई और उनकी सहमति के बिना आगे की प्रक्रिया बढ़ाई गई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेंगे। न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की तैयारी की जा रही है।

इस विरोध प्रदर्शन और बैठक में पूर्व जनपद सदस्य ईश्वरी निर्मलकर, सरपंच संजय निर्मलकर सहित प्रहलाद यादव, भोला मानिकपुरी, छबिलाल यादव, हेमंत दास मानिकपुरी, बीरबल ठाकुर, कल्याण ठाकुर, अश्वन मांडवी, अश्वन ठाकुर, खिलावन पाल, मुकेश मंडावी, तोरण साहू, अशोक घटनागर, संतराम पाल, शिव ठाकुर सहित सैकड़ों ग्रामीणों की उपस्थिति रही ।

अक्षय तृतीया पर आज होगा गुड्डा- गुड़ियों का विवाह

राजनांदगांव। अक्षय तृतीया के दिन खरीददारी शुभ माना जाता है। आगामी दिनों लगातार वैवाहिक आयोजन के चलते बाजार में फिर से बहार आई है। दीवाली के बाद शहर में सर्राफा, इलेक्ट्रानिक और कपड़ा दुकानों में ग्राहकी उमड़नी लगी है।

अक्षय तृतीया के एक दिन पहले बाजार में जमकर खरीदारी दर्ज की गई है। अक्षय तृतीया का पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाएगा। इसी दिन से शादी के मुहूर्त का सिलसिला शुरू हो जाएगा। कपड़ा, सराफा बाजार में ग्रामीण अंचलों से आए लोग दिनभर खरीदी कर रहे है, जबकि शहरीय इलाको के ग्राहकी देर रात तक दुकानों में डटी हुई है। सोने की कीमत में उछाल आने के बावजूद लोग कम मात्रा में खरीददारी कर रहे हैं,

व्यापारियों की माने तो सोने का दाम बढ़ने के बाद छोटे ज्वेलरी का ट्रैंड बढ़ गया हैं। रियल स्टेट में जहां रजिस्ट्री फ्री का आफर दिया जा रहा है। वहीं आटो मोबाइल सेक्टर में कैशन डिस्काउंट, एक्सचेंज बोनस, कार्पोरेट डिस्काउंट दिए जा रहे हैं। शहर के गुड़ाखू लाइन, कामठी लाइन, रामाधीन मार्ग, सिनेमा लाइन की दुकानों में खरीददारी करने ग्राहकों की भीड़ जुट रही है। सोने की खरीदी पर दुकानदार 10 हजार छूट व उपहार भी दे रहे हैं।

व्यापारियों ने बताया कि अक्षय तृतीया पर बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं, इसे देखते हुए दुकानदारों ने खास वैरायटियां मंगाई है। सोने का दाम अधिक होने से भारी वजनी ज्वेलरी के बजाय हल्की वजनी ज्वेलरी पहली पसंद बनी हुई है। रोलाइट की बढ़ी डिमांड सोना इलेट्रानिक के संचालक ने बताया कि, वर्तमान में एलईडी, रोप लाइट, सीओबी लाइट की मांग बनी हुई हैं।

कुछ दुकानदार 10 हजार की खरीदी पर आफर भी दे रहे हैं। उपहार एसी, पंखा, कूलर, मोबाइल, फ्रीज अन्य सामान लेने पहुंच रहे दुकानदारों ग्राहकों को बेहतर आफर दे रहे हैं। इलेक्ट्रानिक्स सामान की खरीदी से 25 प्रतिशत की छूट दे रहे है। फाइनेंस की भी सुविधा दी जा रही हैं, शहर में 40 से अधिक इलेक्ट्रानिक दुकानें हैं, जहां खरीदारी के ग्राहकों की भीड़ जुट रही है।

सोना महंगा तो बदला छोटे आभूषणों का ट्रेंड सर्राफा एसोसिएशन के पदाधिकारी मनोज बैद ने बताया कि, सोना महंगा होने के बाद भी लोग खरीददारी से पीछे नही हट रहे है। उन्होने बताया कि, हांलाकि सोने के दाम में बढ़ोत्तरी होने के चलते लोग कम वजन के वाले ज्वेलरी खरीद रहे हैं। अनुपात वर्तमान में सोना एक लाख 55 हजार तोला पहुंच गया है, जबकि चांदी ढ़ाई लाख में कायम है। सोना लगातार बढ़ते क्रम में ही है। ऐसे में लोग कम वजन का सोना लेना पसंद कर रहे हैं।

बाल्टियों में भोजन परोसने से कर्मचारियों में नाराजगी

खैरागढ़। जनगणना 2027 की तैयारियों के तहत आयोजित प्रशिक्षण शिविर का पहला दिन अव्यवस्था के कारण विवादों में आ गया। केंद्रीय विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रशिक्षण लेने पहुंचे कर्मचारियों को भोजन व्यवस्था को लेकर भारी असुविधा का सामना करना पड़ा।

जानकारी के अनुसार, तेज गर्मी के बीच दिनभर प्रशिक्षण के बाद भोजन वितरण के दौरान स्थिति । बिगड़ गई। कर्मचारियों को पैकेट में भोजन दिया गया लेकिन कुछ लोगों द्वारा अतिरिक्त पैकेट ले लेने के कारण भोजन कम पड गया। इसके बाद आयोजकों ने आनन- फानन में अतिरिक्त भोजन मंगवाया, जो प्लास्टिक की बाल्टियों में लाया गया। उचित बर्तन उपलब्ध न होने के कारण भोजन इसी रूप में परोसने की कोशिश की गई. जिससे कर्मचारियों में नाराज़गी फैल गई। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि प्रति व्यक्ति निर्धारित राशि के बावजूद भोजन व्यवस्था बेहद लचर रही। उनका कहना है कि यह स्थिति उनके सम्मान के विपरीत है।

कुछ कर्मचारियों ने मौके पर ही विरोध दर्ज कराया और पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया जो तेजी से वायरल हो रहा है। प्रशिक्षणार्थियों का कहना है कि जब सरकार डिजिटल और आधुनिक जनगणना की तैयारी की बात कर रही है तब जमीनी स्तर पर ऐसी बदइंतजामी चिंता का विषय है। प्रशिक्षण कार्यक्रम 24 अप्रैल तक प्रस्तावित है लेकिन पहले ही दिन की स्थिति ने प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार मामले की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया है। प्रारंभिक जांच के बाद भोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी नए कैटरर को सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है।

आईपीएल सट्टा का मास्टरमाइंड सादिक खान नागपुर से गिरफ्तार

राजनांदगांव। मोहारा नाला के पास संचालित हाईटेक ऑनलाइन आईपीएल क्रिकेट सट्टा रैकेट के मास्टरमाइंड सादिक खान को पुलिस ने नागपुर महाराष्ट्र से गिरफ्तार कर लिया है। पूर्व में इस मामले के 6 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। मुख्य आरोपी सांई ऐप में सट्टा आईडी बनाकर बेचता था।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर ने बताया कि आईपीएल क्रिकेट सट्टा के मास्टरमाइंड का नाम सादिक खान पिता जानी मिया खान उम्र 34 वर्ष निवासी मानकापुर जिला नागपुर महाराष्ट्र है। उन्होंने बताया कि साइबर सेल एवं थाना बसंतपुर की संयुक्त टीम द्वारा 6 अप्रैल को आईपीएल क्रिकेट सट्टे के विरुद्ध बड़ी कार्रवाई करते हुए हाईटेक ऑनलाइन सट्टा रैकेट का खुलासा किया गया था।

इस दौरान आरोपी वीरू प्रजापति, रूपेश पाण्डे, आयुष मेश्राम, मोहित देवांग, लक्की देवांगन उर्फ नरेन्द्र देवांगन तथा मूलचंद प्रजापति को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से लैपटॉप, मोबाइल, चार्जर, नगदी रकम एवं सट्टा पट्टी सहित लगभग 5 लाख 50 हजार रुपये मूल्य की सामग्री जप्त कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया था। प्रकरण के मुख्य फरार आरोपी सादिक खान की लगातार पतासाजी की जा रही थी।

तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर उसके नागपुर में होने की पुख्ता सूचना मिलने पर पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा के विशेष निर्देश पर थाना बसंतपुर एवं साइबर सेल राजनांदगांव की संयुक्त टीम द्वारा आरोपी को नागपुर से हिरासत में लेकर राजनांदगांव लाया गया।

पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह सांई ऐप में सट्टा आईडी एवं पासवर्ड उपलब्ध कराने के नाम पर 5 से 10 हजार रुपये तक लेता था तथा ऐप में तकनीकी त्रुटि आने पर उसे ठीक करने के नाम पर 2 से 3 हजार रुपये फोनपे एवं क्यूआर कोड के माध्यम से प्राप्त करता था।

आरोपी के कब्जे से एप्पल कंपनी का मोबाइल जप्त किया गया है। इस मामले में थाना बसंतपुर में अपराध क्रमांक 151/2026 धारा 6, 7, 8 छत्तीसगढ़ जुआ प्रतिषेध अधिनियम तथा 318 (4), 112 (2) भारतीय न्याय संहिता एवं 66 (D) आईटी एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध है। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।

पटवारी-आरआई सब गायब, नौकरों के भरोसे जमीन नाप

छुईखदान। नगर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन नापने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय किसानों और नागरिकों का आरोप है कि जिम्मेदार आरआई (राजस्व निरीक्षक) और पटवारी खुद मौके पर जाने से बच रहे हैं, और अपने स्थान पर नौकरों के माध्यम से जमीन की नाप-जोख करवा रहे हैं।

बताया जा रहा है कि इन दिनों भीषण गर्मी के चलते पटवारी और आरआई धूप में खेतों तक पहुंचने से कतराते हैं और अपने निजी लोगों को ही नापने के लिए भेज देते हैं। इतना ही नहीं, आरोप यह भी है कि कुछ पटवारियों ने अपने काम कराने और पैसों के लेन-देन के लिए अलग से दो-दो निजी नौकर रखे हुए हैं, जिनके माध्यम से पूरा काम संचालित किया जा रहा है। इससे जमीन मापने की प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

किसानों का कहना है कि जब जिम्मेदार अधिकारी खुद मौके पर उपस्थित नहीं रहेंगे, तो माप की सटीकता और निष्पक्षता कैसे सुनिश्चित होगी। सबसे बड़ा सवाल लेन-देन की प्रक्रिया को लेकर उठ रहा है। आरोप है कि किसी भी प्रकार का पैसा सीधे तौर पर नहीं लिया जाता, बल्कि अप्रत्यक्ष माध्यम से नौकरों के जरिए लेन-देन किया जाता है, ताकि कोई भी सीधे तौर पर पकड़ में न आ सके। जनता में इस पूरे मामले को लेकर भारी आक्रोश है।

किसानों का कहना है कि जमीन से जुड़े मामलों में इस प्रकार की लापरवाही और संदिग्ध व्यवस्था उनके अधिकारों के साथ खिलवाड़ है। नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, जमीन नापने की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि पटवारी और आरआई स्वयं मौके पर उपस्थित होकर ही कार्य करें।

छुईखदान जैसे क्षेत्र में यदि राजस्व व्यवस्था पर इस प्रकार के सवाल उठ रहे हैं, तो यह न केवल प्रशासनिक व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि आम जनता के भरोसे पर भी सीधा असर डालता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेकर कार्रवाई करता है। इस संबंध में तहसीलदार मोक्षदा देवांगन ने कहा कि ऐसी कोई शिकायत नहीं मिली है, शिकायत मिलेगी तो जांच करायेंगे।