भिलाईनगर। सेल मैनेजमेंट ने बीएसपी सहित सभी सभी यूनिटों के टाउनशिप की दुकानों/ अन्य सामाजिक, शैक्षणिक भवनों के लीज अनुबंध को निरस्त कर नया अनुबंध लागू कर दिया है। लेकिन इसमें उसने कमर्शियल के लिए लीज रिनीवल चार्ज को लैंड प्रीमियम का 25 प्रतिशत ही रखा है, और यही विवाद की जड़ है। हालांकि, भूमि के 25% पर ही भूभाटक व सेवा शुल्क लिया जाएगा। यह व्यापारियों के लिए जरूर राहत है। सामाजिक धार्मिक संस्थाओं व चेरिटेबल ट्रस्ट को भी राहत दी गई है। 15 मई 2026 से एक वर्ष तक का समय लीज नवीनीकरण के लिए दिया गया है।

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बीएसपी टाउनशिप के करीब 1800 व्यापारी लीज पर आवंटित दुकानों के लीज नवीनीकरण दर को लेकर लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे हैं। कई बार आंदोलन कर चुके। इसी लड़ाई में दो दर्जन से अधिक व्यापारी हाईकोर्ट में मैनेजमेंट से हार भी चुके हैं। इस बीच सेल बोर्ड ने 15 मई को आयोजित सेल बोर्ड की बैठक में सरकारी एवं बाहरी एजेंसियों (दुकान/अन्य भवनों) को आवंटित लीज के नवीनीकरण के लिए नीतिगत दिशा निर्देश जारी कर दिया है। इस मुद्दे पर सांसद विजय बघेल व पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेमप्रकाश पाण्डेय ने उच्चस्तरीय प्रयास किया था।

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पुराने अनुबंध के निरस्त होने से फौरी तौर पर पेनाल्टी से राहत व्यापारी नेता ज्ञानचंद जैन का कहना है कि फिलहाल पुराना अनुबंध होने से जरूर पेनाल्टी सहित कुछ अन्य राहत मिली है। आये दिन नगर सेवाएं विभाग की ओर से पेनाल्टी का नोटिस पर नोटिस मिलता था जिससे मानसिक तनाव बना रहता था। इसके अलावा मैनेजमेंट ने लीज नवीनीकरण के लिए एक वर्ष का समय दिया है। इस एक वर्ष में लीज नवीनीकरण की दर सहित अन्य मुद्दों को सुलझाने के लिए और वक्त मिल गया है।

बीएसपी ने फिलहाल आदेश जारी नहीं किया है दिशा निर्देश

खास बात यह है कि सेल मैनेजमेंट ने लीज नवीनीकरण संबंधी दिशा निर्देश 2 जून की तारीख से सभी प्लांट / यूनिट्स के एचआर हेड के नाम जारी कर दिया है। लेकिन बीएसपी के नगर सेवाएं विभाग की ओर से यह दिशा निर्देश स्थानीय स्तर पर जारी नहीं किया गया है। वह सेल मैनेजमेंट के दिशा निर्देश के आधार पर व्यापारियों को अब कभी भी नोटिस जारी कर सकता है।

1000 वर्ग फीट का मांग रहे थे 37 लाख

लीज नवीनीकरण की दर को लेकर विवाद क्यों बना हुआ था इसे इस तरह समझा जा सकता है- व्यापारियों को लीज रिनीवल चार्ज लैंड प्रीमियम का 25 प्रतिशत, एनुअल सर्विस चार्ज लैंड प्रीमियम का 2 प्रतिशत, एनुअल ग्राउंड रेंट लैंड प्रीमियम का 1 प्रतिशत, सेक्युरिटी डिपाजिट लैंड प्रीमियम का 2 प्रतिशत या 50000 रु. इनमें से जो ज्यादा हो वह राशि, यानी इन सबको मिलाकर कुल रिनीवल चार्ज मांगा जा रहा था। मोटे तौर पर 1000 वर्गफीट के लिए व्यापारियों से इस गणना के तहत 37,90,800 रु. मांग रहे थे। इस खबर के साथ पूरी गणना ऊपर में टेबल फार्म में दी गई है।

फौजी भाई के स्थान पर दूसरे व्यक्ति को खड़ाकर बेजी जमीन

भिलाईनगर। आर्मी में पदस्थ सगे भाई के स्थान पर दूसरे व्यक्ति को प्रस्तुत कर संयुक्त स्वामित्व वाली कृषि भूमि का विक्रय करने वाले आरोपी को पाटन पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

ग्रामीण एएसपी मणिशंकर चन्द्रा ने बताया कि प्रार्थी संजय कुमार निवासी ग्राम कुम्हली ने थाना पाटन में रिपोर्ट दर्ज कराया कि उसके बड़े भाई ने अपने सगे भाई जो भारतीय सेना में पदस्थ हैं। उसके स्थान पर अन्य व्यक्ति को प्रस्तुत कर ग्राम कुम्हल स्थित संयुक्त नाम की कृषि भूमि का विक्रय कर दिया गया।

शिकायत पर थाना पाटन में धारा 420, 467, 468, 471, 120-बी एवं 34 भारतीय दण्ड संहिता के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। आरोपी घटना के बाद से फरार था। पाटन पुलिस ने आज आरोपी ईश्वर दास (60 वर्ष) निवासी वार्ड क्रमांक 10, सांई मंदिर रोड, महादेवघाट, थाना डीडी नगर, जिला रायपुर को घेराबंदी कर गिरफ्तार किया गया है।

सेवा सहकारी समिति रौंदा में 15 लाख का गबन

भिलाईनगर। सेवा सहकारी समिति रौंदा में 15 लाख रुपए से अधिक के धान एवं बारदाना गबन प्रकरण में सहकारी समिति प्रभारी को धमधा पुलिस ने गिरफ्तार किया है। शासकीय कार्य में धोखाधड़ी शासन आर्थिक कर को क्षति पहुंचाने के संबंध में अपराध दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर भेजा गया।

ग्रामीण एएसपी मणिशंकर चन्द्रा ने बताया कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दुर्ग की घोंठा शाखा के शाखा प्रबंधक भूपेन्द्र सिंह मढ़रिया ने थाना धमधा में शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में बताया गया कि 29 मई 2026 को खाद्य विभाग, सहकारिता विभाग एवं जिला सहकारी बैंक के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने सेवा सहकारी समिति मर्यादित रौंदा एवं उसके उपार्जन केंद्र का आकस्मिक निरीक्षण और भौतिक सत्यापन किया था।

जांच समिति में शाखा प्रबंधक भूपेन्द्र सिंह मढ़रिया, सहायक खाद्य अधिकारी शशि सिंह, खाद्य निरीक्षक सुधा महिलांग तथा सहकारिता निरीक्षक प्रजय सोनी शामिल थे। जांच में पाया गया कि खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में समिति द्वारा कुल 73,952.80 क्विंटल धान का उपार्जन किया गया था। अभिलेखों के अनुसार धान की उपलब्ध मात्रा एवं वास्तविक भौतिक सत्यापन में भारी अंतर पाया गया। मौके पर किए गए सत्यापन में कुल 560.28 क्विंटल धान तथा 2103 नग नया बारदाना कम पाया, जिसकी कुल कीमत लगभग 15,08,161 रुपये आंकी गई।

जांच प्रतिवेदन के आधार पर थाना धमधा में धारा 316(5), 318 (1) के तहत प्रकरण दर्ज कर विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर समिति प्रभारी जगदीश कुमार नवरंगे (60 वर्ष) निवासी पेंड्रावन, थाना धमधा को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की। पर्याप्त साक्ष्य पाए जाने पर आरोपी को विधिवत गिरफ्तार किया है।

हेमचन्द यादव विश्वविद्यालय को मिली डॉ. अंबेडकर चेयर स्थापना की स्वीकृति

दुर्ग। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के अधीन कार्यरत डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन ने दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय में डॉ. अंबेडकर चेयर ( शोध पीठ) की स्थापना के लिए सैद्धांतिक सहमति प्रदान कर दी है। इसके साथ ही यह उपलब्धि हासिल करने वाला छत्तीसगढ़ का पहला उच्च शिक्षण संस्थान बन गया है।

फाउंडेशन के निदेशक मनोज तिवारी (आईपीएस) ने 4 जून 2026 को कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय तिवारी को संबोधित पत्र में इस महत्त्वपूर्ण स्वीकृति की जानकारी दी। पत्र में विश्वविद्यालय को इस प्रतिष्ठित शैक्षणिक पहल में चुने जाने पर बधाई दी गई है। जानकारी के अनुसार डॉ. अंबेडकर चेयर की स्थापना और संचालन के लिए फाउंडेशन की ओर से प्रतिवर्ष 75 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया जाएगा। इस शोध पीठ की स्थापना पर कुल 1.85 करोड़ रुपये की लागत आएगी। हेमचन्द यादव विश्वविद्यालय दुर्ग के कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय तिवारी ने डॉ. अंबेडकर चेयर की स्थापना हेतु स्वयं नई दिल्ली में डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन के समक्ष उपस्थित होकर विश्वविद्यालय का विस्तृत प्रस्ताव प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

उन्होंने छत्तीसगढ़ की सामाजिक, जनजातीय एवं शैक्षणिक विशेषताओं के संदर्भ में इस चेयर की आवश्यकता और प्रासंगिकता को रेखांकित किया, जिससे फाउंडेशन की सहमति प्राप्त हो सकी। यह स्वीकृति डॉ. बी. आर. अंबेडकर की सामाजिक न्याय, समता, संवैधानिक मूल्यों और समावेशी विकास की दृष्टि को आगे बढ़ाने में विश्वविद्यालय की क्षमता और आकांक्षा का प्रमाण है। डॉ. अंबेडकर चेयर योजना (संशोधित 2021-22 ) का देश के प्रतिष्ठित उद्देश्य विश्वविद्यालयों में उच्चस्तरीय शिक्षण, शोध, नीति अध्ययन और जन संपर्क गतिविधियां संचालित करना है।

नान इंटरलाकिंग कार्य से प्रभावित होंगी ट्रेनें

राजनांदगांव। रसमड़ा स्टेशन पर माल गोदाम लाइन-06 के कमीशनिंग कार्य के लिए विशेष नॉन इंटरलॉकिंग एवं प्री-नॉन इंटरलॉकिंग कार्य किए जाएंगे। यह कार्य 09 जून को प्री-नॉन इंटरलॉकिंग कार्य के तहत लाइन क्रमांक-05 पर 18:00 बजे से 22:30 बजे तक 4 घंटे 30 मिनट का ब्लॉक लिया जाएगा। इसके पश्चात 10 जून को डाउन मुख्य आउटर संयुक्त लाइन पर 18 बजे से 22:30 बजे तक पुनः 4 घंटे 30 मिनट का ब्लॉक लिया जाएगा। मुख्य नॉन- इंटरलॉकिंग कार्य 11 जून को 11:30 बजे से प्रारंभ होकर 12 जून को 02:30 बजे तक कुल 15 घंटे की अवधि में किया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, 68709 रायपुर – डोंगरगढ़ 10 एवं 11 रद्द रहेगी। 68710 डोंगरगढ़- जून को रायपुर 11 एवं 12 जून को रद्द रहेगी। 68711 डोंगरगढ़-गोंदिया 10 एवं 11 जून को रद्द रहेगी। 68712 गोंदिया- डोंगरगढ़ 10 एवं 11 जून को रद्द रहेगी। 68713 गोंदिया- नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी 10 एवं 11 जून को रद्द रहेगी। 68716 नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी- गोंदिया 10 एवं 11 जून को रद्द रहेगी। 68714 नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी बालाघाट 10 एवं 11 जून को रद्द रहेगी। 68715 बालाघाट – नेताजी सुभाष चंद्र बोस इतवारी 10 एवं 11 जून को रद्द रहेगी। 68705 रायपुर- डोंगरगढ़ पैसेंजर, 10 एवं 11 जून को दुर्ग स्टेशन पर समाप्त होगी तथा दुर्ग- डोंगरगढ़ के मध्य निरस्त रहेगी। 68706 डोंगरगढ़-बिलासपुर पैसेंजर, 10 एवं 11 जून को दुर्ग स्टेशन से समाप्त होगी तथा डोंगरगढ़ दुर्ग के मध्य निरस्त रहेगी।

डेढ़ साल से एक ही समूह को सफाई का ठेका

राजनांदगांव। नगर निगम में सफाई ठेके के नाम पर जमकर मनमानी चल रही है। नियम के तहत ठेका अवधि समाप्त होने के बाद सिर्फ तीन माह एक्सटेंशन का नियम है। लेकिन यहां पिछले डेढ़ साल से नया टेंडर ही नही कराया गया है। एक ही फर्म को ठेका दिए जाने के चलते शहर की सफाई व्यवस्था जहां चौपट हो गई है। वही शिकायत करने के बाद भी सुनवाई नही हो रही है। कई बार सामान्य सभा में भी विपक्ष ने सत्तापक्ष को इस मामले में घेरा है। लेकिन इसके बाद भी निगम नए टेंडर कराने को राजी नही है।

जानकारी के अनुसार, शहर की 27 वार्ड को नगरनिगम द्वारा ठेके पर दिया गया है। सफाई के नाम पर हर माह 35 लाख रूपए तक फूंके जा रहे है। नगर निगम द्वारा लाखों रुपए खर्च करने के बावजूद ठेका वार्डों में सफाई व्यवस्था बदहाल है, जिसको लेकर निगम को लगातार समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हद तो तब हो रही है जब ठेकेदारों की लचर व्यवस्था के कारण निगम को अतिरिक्त बल लगाकर सफाई करानी पड़ती है। शहर के 51 वार्ड में ज्यादातर इन्ही वार्डो में नियमित सफाई नही होने की शिकायते मिलती है।

बाजार में 40 रुपए किलो बिक रहा टमाटर

राजनांदगांव। डीजल के दाम में लगातार इजाफा होने के चलते सब्जियों पर भी महंगाई की मार पड़ने लगी है। हरी सब्जियों में टमाटर की आवक महाराष्ट्र के नासिक से हो रही है। इसके आलावा प्याज भी महाराष्ट्र से आ रही है। जिसके कारण इनके दाम बढ़े हुए है। वहीं हरी सब्जियां भी चालीस रूपए से पार हो गए है। वर्तमान में डीजल के दाम 103 रूपए प्रति लीटर तक पहुंच गया है। ऐसे में परिवहन से जुड़े कारोबार प्रभावित हो रहे है। व्यापारियों ने बताया कि पूर्व में तीस 25 रूपए किलो में बिकने वाला प्यास तीस रूपए हो गया है। इसी तरह आलू का दाम बढ़कर तीस रूपए तक हो गया है।

बात करे हरी सब्जी की तो चालीस रूपए किलो से अधिक रेट बढ़ गए है। शहर के गोलबाजार में टमाटर का दर चालीस रूपए हो गया है। इसी तरह बरबट्टी 40 रूपए किलो, पत्तागोभी, फूलगोभी, भट्टा, भिंडी सहित अन्य सब्जियों के दाम बढ़े है। वर्तमान में सब्जियों के दाम बढ़ने से लोगों को मोटी राशि खर्च करनी पड़ रही हैं। सब्जी का थैला भरने में पांच सौ रूपए तक खर्च करने पड़ रहे है। व्यापारियों का मानना है कि फिलहाल आलू व प्याज सहित सब्जी के दाम इसे तरह रहेगा। लोकल स्तर पर अभी सब्जियो नही निकल रही है। जिसका भी असर है कि दाम बढ़े हुए है।

कम बारिश में भी धान की अच्छी फसल का मंत्र

राजनांदगांव। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा जारी अद्यतन दीर्घावधि पूर्वानुमान के अनुसार वर्ष 2026 में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान देश में वर्षा दीर्घकालिक औसत के लगभग 90 प्रतिशत रहने की संभावना व्यक्त की गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार एल-नीनो की स्थिति के कारण इस वर्ष मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है तथा जून माह में भी सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना है। ऐसी परिस्थितियों को देखते हुए कृषि विभाग द्वारा किसानों को जल संरक्षण आधारित वैज्ञानिक खेती अपनाने की सलाह दी जा रही है।

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार कम वर्षा अथवा वर्षा में लंबे अंतराल की स्थिति में धान की सीड ड्रिल द्वारा कतार बोनी किसानों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती है। कतार बोनी में बीज निर्धारित गहराई एवं समान दूरी पर स्थापित होते हैं। जिससे अंकुरण बेहतर होता है। तथा पौधों की जड़े अधिक गहराई तक विकसित होती हैं। मजबूत जड़ प्रणाली मिट्टी में उपलब्ध सीमित नमी का अधिकतम उपयोग करती है, जिससे सूखे जैसी परिस्थितियों में भी फसल अपेक्षाकृत सुरक्षित रहती है।

कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि पारंपरिक छिटकवां बुवाई की तुलना में कतार बोनी में पौधों के बीच प्रतिस्पर्धा कम होती है। इससे उपलब्ध पानी, पोषक तत्व एवं सूर्य प्रकाश का समुचित उपयोग होता है । कतारों के बीच खरपतवार निराई-गुड़ाई एवं नियंत्रण आसान होने से मिट्टी की नमी लंबे समय तक संरक्षित रहती है। साथ ही उर्वरकों का उपयोग अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। जिससे कम पानी में भी फसल की वृद्धि बेहतर होती है।

कृषि विभाग किसानों को नैनो डीएपी के उपयोग हेतु भी प्रोत्साहित कर रहा है। नैनो डीएपी में फास्फोरस के सूक्ष्म कण होते हैं, जो पौधों द्वारा आसानी से ग्रहण किए जाते हैं। इसके उपयोग से जड़ों का विकास तेज होता है। प्रारंभिक वृद्धि में सुधार होता है तथा पौधों की पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़ती है। कम नमी की स्थिति में भी पौधे उपलब्ध पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग कर पाते हैं। जिससे उनकी वृद्धि एवं उत्पादन क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि वे धान की बुवाई सीड ड्रिल के माध्यम से कतारों में करें, खेतों में मेड़बंदी एवं वर्षा जल संरक्षण के उपाय अपनाएं तथा अनुशंसित मात्रा में नैनो डीएपी, नैनो यूरिया एवं जैव उर्वरकों का उपयोग करें। इससे कम वर्षा की परिस्थितियों में भी फसल को पर्याप्त पोषण उपलब्ध होगा और उत्पादन में स्थिरता बनी रहेगी।

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