Durg-Bhilai-Rajnandgaon News Update : बेमेतरा. विकासखंड बेमेतरा के शासकीय शाला गुवारा में छत का प्लास्टर गिरने से दो विद्यार्थियों के घायल होने के मामले को जिला प्रशासन ने गंभीरता से लिया है. घटना के बाद गठित संयुक्त जांच टीम की रिपोर्ट में निर्माण कार्य में गुणवत्ता संबंधी खामियां पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार उप अभियंता के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है. प्रशासन ने संबंधित ठेकेदार को जर्जर छत को तोड़कर गुणवत्तापूर्ण स्लैब का दोबारा निर्माण कराने के निर्देश भी दिए है. इसी तरह मुख्यमंत्री स्कूल जतन योजना के तहत प्राथमिक शाला मरका में निर्मित तीन अतिरिक्त कक्षों के निर्माण कार्य में भी गंभीर तकनीकी खामियां सामने आई है. इन कक्षों का निर्माण करीब 22.52 लाख रुपए की लागत से कराया गया है. संयुक्त जांच टीम द्वारा किए गए निरीक्षण में निर्माण कार्य को गुणवत्ताविहीन पाया गया. जांच के बाद इस मामले में भी संबंधित ठेकेदार और मूल्यांकनकर्ता उप अभियंता को कारण बताओ नोटिस जारी करने की कार्रवाई की जा रही है. प्रशासन ने मरका स्कूल के निर्माण में पाई गई कमियों को दूर करने के लिए छत की ग्रेडिंग, प्लास्टर एवं पेंटिंग का कार्य दोबारा गुणवत्तापूर्ण तरीके से कराने के निर्देश दिए है. दोनों मामलों में जिला प्रशासन ने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. साथ ही स्कूल भवनों में विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और निर्माण कार्यों में निर्धारित गुणवत्ता मानकों का पालन कराने पर जोर दिया जा रहा है. जानकारी के अनुसार 13 जुलाई को शासकीय शाला गुवारा के जर्जर अतिरिक्त कक्ष की छत का प्लास्टर अचानक भरभरा कर गिर गया था. इस दौरान कक्ष में मौजूद दो विद्यार्थी इसकी चपेट में आकर घायल हो गए थे. घटना के तत्काल बाद दोनों बच्चों को स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराकर उपचार कराया गया. उपचार के बाद दोनों विद्यार्थी अब पूरी तरह स्वस्थ है. घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा मामले की जांच के लिए संयुक्त जांच टीम गठित की गई थी. टीम ने स्कूल भवन का निरीक्षण कर निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच की. जांच के दौरान निर्माण कार्य गुणवत्ताहीन पाया गया. जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्यालन अभियंता, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा को संबंधित ठेकेदार तथा जिम्मेदार उप अभियंता को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं. विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए स्कूल परिसर के जर्जर अतिरिक्त कक्ष को फिलहाल बंद कर उसमें ताला लगा दिया गया है. बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए कक्षाओं का संचालन मुख्य भवन के दो सुरक्षित कमरों तथा आंगनबाड़ी भवन में किया जा रहा है. प्रशासन ने संबंधित ठेकेदार को जर्जर छत को तोड़कर निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नया स्लैब तैयार करने के निर्देश दिए है, ताकि भवन का सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित किया जा सके.

राजस्व प्रकरणों में लापरवाही पर तहसीलदार निलंबित

दुर्ग. प्रशासनिक कार्यों में लापरवाही और जनसमस्याओं के निराकरण में विलंब को गंभीरता से लेते हुए संभागायुक्त दुर्ग सत्य नारायण राठौर ने राजनांदगांव जिले के घुमका तहसील में पदस्थ तहसीलदार मुकेश कुमार ठाकुर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के तहत की गई है. उल्लेखनीय है कि तहसीलदार मुकेश कुमार ठाकुर पर शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही बरतने, सामान्य राजस्व प्रकरणों के निराकरण में देरी करने तथा आर.बी.सी. 6-4 के तहत पीड़ित परिवारों को मिलने वाली आर्थिक सहायता के मामलों में अनावश्यक विलंब करने के गंभीर आरोप थे. संभागायुक्त द्वारा जारी आदेश के तहत निलंबन अवधि में मुकेश ठाकुर का मुख्यालय कार्यालय कलेक्टर, राजनांदगांव निर्धारित किया गया है और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी.

60 हजार का तीन टन खीरा रास्ते से गायब, ट्रांसपोर्टर और चालक के खिलाफ एफआईआर

राजनांदगांव. ग्राम बोरतलाव से कटनी मध्यप्रदेश भेजा गया करीब 60 हजार रुपए की लागत कातीन टन खीरा रास्ते से गायब हो गया. मामले में ट्रांसपोर्टर और वाहन चालक पर मिलीभगत कर माल को गंतव्य तक नहीं पहुंचाने और धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया गया है. शिकायतकर्ता ने बोरतलाव थाने में लिखित आवेदन देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है. पुलिस अपराध दर्ज कर विवेचना में जुटी है. ग्राम चिददो निवासी अजय कुमार सिन्हा ने पुलिस को बताया कि वह फार्म हाउस से थोक में सब्जी खरीदकर अन्य स्थानों पर बेचने का काम करता है. इसी क्रम में उसने ग्राम बोरतलाव निवासी धनीराम पटेल के खेत से करीब तीन टन खीरा 60 हजार रुपए में खरीदा था. खीरे को कटनी मंडी के थोक व्यापारी राजकिशोर निषाद के पास भेजने के लिए उसने भिलाई के एक ट्रांसपोर्टर से संपर्क किया. शिकायत के अनुसार ट्रांसपोर्टर के माध्यम से एक वाहन को 30 जून को बोरतलाव भेजा गया था. 

दो सूने मकानों का ताला टूटा, सोने चांदी के जेवर सहित नगदी पार

राजनांदगांव. डोंगरगांव थाना क्षेत्र के साल्हे गांव में अज्ञात चोरों ने दो मकानों के ताले तोडक़र सोने-चांदी के जेवरात सहित नगदी रकम चोरी कर ली. दोनों मकानों से कुल करीब 45 हजार रुपए का सामान चोरी हुई है. पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया है. जानकारी के अनुसार साल्हे निवासी किसान ने बताया कि 22 अगस्त को वह सुबह काम पर गया था और शाम करीब 5 बजे वापस आया. रात करीब 10 बजे परिवार के साथ खाना खाने के बाद पुराने मकान में ताला लगाकर सभी नए मकान में सोने चले गए. रात करीब 1.30 बजे उसका बेटा राजनांदगांव से कार्यक्रम देखकर घर लौटा था. सुबह करीब 4.30 बजे जब मकान की बिजली बंद दिखाई दी तो उसने पत्नी को उठाया और बाहर चला गया. वापस आने पर पत्नी ने बताया कि पुराने मकान का ताला टूटा हुआ है. अंदर जाकर देखने पर किचन का सामान बिखरा मिला. पेटी में रखे चार नग सोने की पत्ती, एक चांदी का लच्छा और 1300 रुपए नकद गायब मिले. चोरी गए सामान की कुल कीमत करीब 40 हजार रुपए बताई गई है. इसी दौरान गांव में कुछ दूरी पर रहने वाले मूलचंद पटेल के पुराने मकान का भी ताला टूटा मिला. अज्ञात चोर वहां से पेटी में रखे 5 हजार रुपए नकद चोरी कर ले गए. लगातार दो मकानों में चोरी की घटना से ग्रामीणों में चिंता बढ़ गई है.

गर्भ समापन के दौरान फिर नसबंदी का दबाव

राजनांदगांव. शासकीय मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल के गायनिक वार्ड में मरीज और परिजनों से कथित बदसलूकी और नसबंदी के लिए दबाव बनाने का मामला सामने आया है. बिजनापुर निवासी सुमन कुमार वर्मा ने वार्ड की महिला चिकित्सकों पर गंभीर आरोप लगाते कहा है कि उनकी पत्नी की इच्छा के विरुद्ध नसबंदी कराने के लिए दबाव बनाया गया. नसबंदी से इनकार करने पर पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने की धमकी देने और बिना नसबंदी किए डिस्चार्ज नहीं करने की बात कहे जाने का भी आरोप है. सुमन कुमार वर्मा के अनुसार उनके पहले से दो बच्चे हैं. दूसरी संतान के जन्म के बाद उनकी पत्नी की नसबंदी कराई गई थी, लेकिन वह प्रक्रिया असफल हो गई और उनकी पत्नी दोबारा गर्भवती हो गई. दंपत्ति तीसरी संतान नहीं चाहते थे. इसी कारण वे गर्भ समापन के लिए शासकीय मेडिकल कॉलेज सह-अस्पताल पहुंचे थे. परिजन का आरोप है कि उनकी पत्नी करीब पांच माह की गर्भवती थी. गर्भसमापन की प्रक्रिया के दौरान चिकित्सकों ने नसबंदी के लिए सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करा लिए. सुमन का कहना है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि के मरीज चिकित्सकीय प्रक्रिया और उसके कानूनी पहलुओं को पूरी तरह नहीं समझ पाते. ऐसे में चिकित्सकों की बात पर वे दबाव में सहमति दे देते हैं. मामला बढ़ने पर सुमन ने संबंधित लोगों से संपर्क किया. गायनिक वार्ड की प्रभारी एवं एचओडी डॉ. मीना आर्मी उस समय प्रदेश से बाहर थी. उनसे फोन पर संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी गई. परिजन के मुताबिक एचओडी के हस्तक्षेप के बाद मरीज को बिना नसबंदी किए अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया.

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