पटना। देश के रेल इंफ्रास्ट्रक्चर में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। पूर्वी भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना अब कागजों से निकलकर धरातल पर उतरने के लिए तैयार है। नेशनल हाईस्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ने दिल्ली-वाराणसी-पटना-सिलीगुड़ी कॉरिडोर के लिए कमर कस ली है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए सर्वे टीम का गठन हो चुका है और इसी साल जुलाई से हवाई व जमीनी स्तर पर तकनीकी सर्वेक्षण शुरू कर दिया जाएगा।
तेज रफ्तार और एलिवेटेड कॉरिडोर
यह पूरा कॉरिडोर एलिवेटेड (ऊपर उठा हुआ) होगा, जिससे जमीन पर यातायात बाधित नहीं होगा। यह ट्रैक उत्तर प्रदेश और बिहार के रास्ते पश्चिम बंगाल तक पहुंचेगा। 350 किमी प्रति घंटे की शीर्ष गति वाली यह ट्रेन समय की बचत में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। पटना से वाराणसी का सफर, जिसमें अभी घंटों लगते हैं, महज 50 मिनट में सिमट जाएगा। वहीं, वाराणसी से सिलीगुड़ी की दूरी सिर्फ 2 घंटे 55 मिनट में तय होगी।
प्रमुख शहरों के बीच अनुमानित समय
परियोजना के पूरा होने पर दिल्ली से देश के प्रमुख शहरों की कनेक्टिविटी काफी सुगम हो जाएगी:
- दिल्ली से आगरा: 58 मिनट
- दिल्ली से लखनऊ: 2 घंटे 12 मिनट
- दिल्ली से वाराणसी: 3 घंटे 33 मिनट
- दिल्ली से अयोध्या: 2 घंटे 47 मिनट
- लखनऊ से अयोध्या: मात्र 35 मिनट
सर्वेक्षण और तकनीकी पहलू
जुलाई से शुरू होने वाले सर्वे में जमीन की ऊंचाई, ढलान, नदियों की स्थिति और घनी आबादी वाले क्षेत्रों का आकलन किया जाएगा। इसके साथ ही पर्यावरण प्रभाव और भूमि अधिग्रहण की संभावनाओं पर भी विस्तृत रिपोर्ट तैयार होगी। विभाग का लक्ष्य मार्च 2027 तक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) को अंतिम रूप देना है।
चार राज्यों का संगम और स्टेशन
यह हाईस्पीड कॉरिडोर दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को एक सूत्र में पिरोएगा। यात्रियों के लिए टिकट व्यवस्था को दो चरणों (दिल्ली-वाराणसी और वाराणसी-सिलीगुड़ी) में बांटा जा सकता है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, यह परियोजना मध्यम वर्ग के लिए किफायती होगी और ‘विकसित भारत’ के संकल्प को मजबूती प्रदान करेगी।

