प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली स्थित रॉकलैंड्स हॉस्पिटल लिमिटेड (Rockland Hospitals Limited) के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उसकी 158 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्ति जब्त कर ली है। एजेंसी ने बताया कि यह कार्रवाई वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़े मामले में मनी लॉन्ड्रिंग-रोधी कानूनों के तहत की गई है। ईडी के अनुसार, जांच के दौरान मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े तथ्यों के आधार पर यह कार्रवाई की गई। हालांकि, एजेंसी ने फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया है कि अस्पताल की किन-किन संपत्तियों को जब्त किया गया है।
एजेंसी का दावा है कि प्रमोटर्स ने 71 कंपनियों का इस्तेमाल करते हुए ‘मेडिकल इम्प्लांट्स’ के नाम पर 76.03 करोड़ रुपये के फर्जी बिल तैयार किए। ईडी के अनुसार, आरोपियों ने अपनी सहयोगी कंपनी ‘सौम्या कंस्ट्रक्शंस’ के जरिए अस्पताल के निर्माण की लागत भी कथित तौर पर 82.34 करोड़ रुपये अधिक दिखा दी। एजेंसी का आरोप है कि इन तरीकों का इस्तेमाल कर कंपनी के साथ करोड़ों रुपये का गबन किया गया।
अवैध धन का स्रोत छिपाने के लिए शेल कंपनियों का लिया सहारा
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपने बयान में आरोप लगाया है कि कथित वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़े धन के वास्तविक स्रोत को छिपाने के लिए आरोपियों ने ‘अकोमोडेशन एंट्री ऑपरेटर’ और शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) का सहारा लिया। एजेंसी के अनुसार, इन माध्यमों से धन के लेनदेन को वैध दिखाने और उसकी वास्तविक उत्पत्ति छिपाने की कोशिश की गई। ईडी ने कहा कि मामले की जांच मनी लॉन्ड्रिंग के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखकर की जा रही है और वित्तीय लेनदेन की पूरी श्रृंखला की पड़ताल की जा रही है। हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया के लिए रॉकलैंड्स हॉस्पिटल या उसके प्रमोटरों से तत्काल संपर्क नहीं हो सका है।
PMLA के तहत जारी हुआ अस्थायी कुर्की आदेश
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बताया कि धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत 158.37 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को जब्त करने के लिए अस्थायी कुर्की (प्रोविजनल अटैचमेंट) आदेश जारी किया गया है। एजेंसी के अनुसार, यह मनी लॉन्ड्रिंग मामला कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के अधीन आने वाले सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) की जांच पर आधारित है। SFIO ने जनवरी 2020 में रॉकलैंड्स हॉस्पिटल लिमिटेड के आरोपी प्रमोटरों के खिलाफ कथित वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी के आरोपों में आरोपपत्र दाखिल किया था। ED ने बताया कि उसी आरोपपत्र और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर धनशोधन का मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर एजेंसी ने अब 158.37 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क करने की कार्रवाई की है। मामले की जांच अभी जारी है।
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