० 18 विधानसभा क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं से करेंगे सीधा संवाद, गुटबाजी खत्म कर बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने पर रहेगा फोकस

चंडीगढ़। हरियाणा में संगठन को नई धार देने की तैयारी में जुटी कांग्रेस अब जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने जा रही है। पार्टी के प्रदेश प्रभारी संजय सतीशचंद्र दत्त 19 से 23 जुलाई तक पांच जिलों के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह 18 विधानसभा क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं, जिला कांग्रेस कमेटियों और संगठन के पदाधिकारियों से सीधे संवाद कर संगठन की वास्तविक स्थिति का फीडबैक लेंगे।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पहले चरण में वरिष्ठ नेताओं से चर्चा के बाद अब कांग्रेस का पूरा फोकस बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर है। संजय दत्त अपने दौरे की शुरुआत 19 जुलाई को पंचकूला से करेंगे। इसके बाद वह यमुनानगर, अंबाला, कुरुक्षेत्र और करनाल में लगातार बैठकें कर कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे।

बताया जा रहा है कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के लिए करीब दो घंटे का समय निर्धारित किया गया है, ताकि कार्यकर्ताओं की समस्याओं, सुझावों और संगठन की स्थिति पर विस्तार से चर्चा हो सके। दौरे के बाद 24 और 25 जुलाई को संजय दत्त दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेंगे।

इस चरण की बैठकों का सबसे बड़ा एजेंडा गुटबाजी खत्म करना, निष्क्रिय संगठनात्मक इकाइयों को सक्रिय बनाना और बूथ स्तर तक पार्टी की पकड़ मजबूत करना है। इसके साथ ही सदस्यता अभियान और नए मतदाताओं को पार्टी से जोड़ने की रणनीति पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

ऐसा रहेगा दौरे का कार्यक्रम
० 19 जुलाई: पंचकूला, कालका और यमुनानगर विधानसभा क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं से संवाद।
० 20 जुलाई: जगाधरी, साढ़ौरा, रादौर और अंबाला छावनी में संगठनात्मक बैठकें।
० 21 जुलाई: मुलाना, नारायणगढ़, शाहबाद और थानेसर विधानसभा क्षेत्रों का दौरा।
० 22 जुलाई: पिहोवा, लाडवा, घरौंडा, इंद्री और नीलोखेड़ी में कार्यकर्ताओं से मुलाकात।
० 23 जुलाई: करनाल और असंध विधानसभा क्षेत्रों के साथ जिला कांग्रेस कमेटी शहरी के पदाधिकारियों से संवाद के बाद दिल्ली रवाना होंगे।

कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि आगामी राजनीतिक चुनौतियों से पहले संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। यही वजह है कि इस बार दौरे का केंद्र वरिष्ठ नेताओं के बजाय जमीनी कार्यकर्ता और संगठनात्मक ढांचा रहेगा। पार्टी संकेत दे चुकी है कि इन बैठकों से मिले फीडबैक के आधार पर भविष्य में संगठन में बदलाव और नई जिम्मेदारियां भी तय की जा सकती हैं।