लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि किसी भी महापुरुष का सच्चा सम्मान उनके विचारों को अपने आचरण, कार्य और जीवन में उतारने से होता है। उन्होंने लोगों से स्वामी विवेकानंद के आदर्शों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
राज्यपाल शनिवार को जन भवन में स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर जन भवन के अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी पुष्प अर्पित कर स्वामी जी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
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भारतीयों में अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति गर्व का भाव जगाया
अपने संबोधन में राज्यपाल ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन भारत की सनातन चेतना का जीवंत प्रकाश-स्तंभ है। उन्होंने अल्प आयु में ही आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय चेतना का ऐसा संचार किया, जिसका प्रभाव आज भी पूरी दुनिया में महसूस किया जाता है। उन्होंने भारतीयों में अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति गर्व का भाव जगाया और यह विश्वास पैदा किया कि भारत पुनः विश्व में अपना गौरवपूर्ण स्थान प्राप्त कर सकता है।
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समावेशी विकास ही वास्तविक विकास
राज्यपाल ने कहा कि विकसित भारत-2047 का सपना तभी साकार होगा, जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छ पेयजल, पोषण और सम्मानजनक जीवन की सुविधाएं पहुंचेंगी। समावेशी विकास ही वास्तविक विकास है और इसके लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर कार्य करना होगा।
उन्होंने युवाओं को स्वामी विवेकानंद के प्रेरक संदेश “उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए” को जीवन में अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं के पास तकनीक और नवाचार के असीम अवसर हैं, लेकिन इनका उपयोग नैतिकता, अनुशासन और राष्ट्रहित की भावना के साथ होना चाहिए।

