पुरुषोत्तम पात्र, गरियाबंद। जिले के आदिम जाति कल्याण विभाग के कर्मचारी संघ ने चक्का जाम करने का ऐलान किया है। कर्मचारियों को अनिश्चित कालीन हड़ताल के दौरान जिला प्रशासन ने लंबित वेतन देने का वादा किया था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ। इससे नाराज होकर संघ ने 29 जुलाई को नेशनल हाइवे को कलेक्ट्रेट के पास जाम करने का ऐलान किया है।
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संगठन के जिला अध्यक्ष डोमार बघेल ने बताया कि सामुहिक अवकाश लेकर 1 जुलाई से अपनी लंबित मांगों को लेकर अनिश्चित कालीन हड़ताल पर बैठे थे। 3 जुलाई को जिला पंचायत अध्यक्ष गौरी शंकर कश्यप की मौजूदगी में सहायक आयुक्त लोकेशवर पटेल ने लंबित भुगतान को रथयात्रा के पहले यानी 25 जुलाई तक करने का आश्वासन दे दिया था।
3.84 करोड़ का करना है बकाया भुगतान
मार्च 2026 में लंबित वेतन के लिए भेजे गए मांग पत्र के मुताबिक, 3.84 करोड़ की मांग की गई है। 5 दिन पहले इसी मांग का हवाला देकर कर्मियों को अनिश्चितकालीन प्रदर्शन को टाल दिया गया था पर अब सहायक आयुक्त लोकेश्वर पटेल ने कहा कि जब तक आबंटन नहीं मिलेगा भुगतान संभव नहीं है।

बगैर प्रशासनिक मंजूरी नियुक्त कर फंस गई विभाग
आदिवासी विकास विभाग ने जिले के 79 आश्रम शालाओं में नेता बड़े अफसरों को खुश करने उनके नाम दिए गए बेरोजगारों को मौखिक आदेश पर चपरासी की नियुक्ति देती रही। कुछ दलालों के जरिए पैसे लेकर भर्ती किए, तो कुछ में जनप्रतिनिधियों ने भी अपनी जेब गर्म कर ली। देखते ही देखते चपरासियों की संख्या 513 हो गई, जबकि 255 मंजूर पदों के लिए ही कलेक्टर दर पर शासन आवंटन देती रही।
ऐसे में रोटेशन फार्मूले पर वेतन देकर सब को खुश किया जाता रहा, लेकिन भार बढ़ते गया तो दिसम्बर 2025 में अतिरित नियुक्त कर्मियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया। अपने अधिकारों के लिए कर्मियों ने अब तक 7 बार से ज्यादा धरना प्रदर्शन किया है।


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