कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। दिन ढलते ही इस गांव की रफ्तार थम जाती है। गलियों में खेलने वाले बच्चों की आवाज अचानक गायब हो जाती है, खेतों की तरफ जाने वाले रास्ते खाली पड़ जाते हैं और लोग घरों के दरवाजे भीतर से बंद कर लेते हैं। गांव में ऐसा सन्नाटा फैलता है, जैसे किसी अनहोनी का इंतजार हो। डर ऐसा कि अब लोग रात ही नहीं, दिन में भी अकेले बाहर निकलने से घबराने लगे हैं।

यह खौफ किसी गैंग या अपराधी का नहीं, बल्कि उस तेंदुए का है जिसने पूरे गांव की जिंदगी बदल दी है। मामला फरीदाबाद जिले के Kot village का है, जहां अरावली क्षेत्र से लगे गांव में तेंदुओं की लगातार मौजूदगी ने ग्रामीणों को दहशत में जीने पर मजबूर कर दिया है। ग्रामीणों के मुताबिक यहां एक नहीं, बल्कि 3 तेंदुए देखे गए हैं, जिनमें 2 शावक और एक मां शामिल है। यही वजह है कि गांव में भय लगातार बढ़ता जा रहा है।

ग्रामीणों का दावा है कि बीते दो वर्षों में तेंदुआ 22 से ज्यादा गायों को अपना शिकार बना चुका है, जबकि हाल ही में 7 बकरियों पर भी हमला किया गया। गांव के कई परिवार पशुपालन और बकरी पालन से अपना घर चलाते हैं, लेकिन अब यही रोजगार खतरे में पड़ गया है। खेतों में काम कर रहे किसानों को अचानक तेंदुए की मौजूदगी दिखाई देती है और लोग काम छोड़कर भागने को मजबूर हो जाते हैं।

स्थानीय निवासी जरूद्दीन बताते हैं कि शाम 7 बजे के बाद गांव में पूरी तरह सन्नाटा छा जाता है। खेतों की रखवाली करना, पशुओं को चारा डालना और पानी देना तक जोखिम भरा हो गया है। बच्चे अब घरों से बाहर खेलने नहीं निकलते और महिलाएं भी अकेले खेतों की तरफ जाने से डरने लगी हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए के डर ने सिर्फ लोगों की नींद नहीं छीनी, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति भी कमजोर कर दी है। अब गांव वालों ने वन विभाग और प्रशासन से सुरक्षा बढ़ाने, इलाके में निगरानी तेज करने और नुकसान का जल्द मुआवजा देने की मांग की है। फिलहाल Aravalli Range से सटे इस गांव में हर रात लोगों के लिए किसी खौफनाक इंतजार से कम नहीं गुजर रही।