फरीदाबाद के सेक्टर-58 स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में एक खाली प्लॉट में पड़े केमिकल कचरे में भीषण आग लग गई, जिससे पूरे इलाके में जहरीला धुआं फैल गया। स्थानीय कंपनी कर्मचारियों ने अपने फायर सिस्टम की मदद से समय रहते आग पर काबू पाया, जिससे एक बड़ा औद्योगिक हादसा टल गया।

फरीदाबाद। दिल्ली-एनसीआर के सबसे प्रदूषित शहरों में शुमार फरीदाबाद में शुक्रवार दोपहर एक बार फिर ‘जहरीली’ आग का कहर देखने को मिला। सेक्टर-58 स्थित इंडस्ट्रियल एरिया के एक खाली प्लॉट में भारी मात्रा में डंप किए गए केमिकल कचरे में दोपहर करीब 1:15 बजे अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग की लपटें तेज हो गईं और काले धुएं का एक विशाल गुबार आसमान में छा गया, जिससे दिन में ही अंधेरे जैसी स्थिति बन गई। गर्मी और तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैल रही थी, जिससे आसपास की औद्योगिक इकाइयों पर खतरा मंडराने लगा। गनीमत रही कि पास की कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों ने स्थिति की गंभीरता को समझा और दमकल विभाग के पहुंचने से पहले ही अपने संसाधनों से मोर्चा संभाल लिया।

कर्मचारियों की जांबाजी: कंपनी के फायर सिस्टम से बुझाई आग

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय कर्मचारियों के अनुसार, आग लगने के समय लंच ब्रेक चल रहा था। कंपनी में काम करने वाले बबलू, सुनील और कालका कुशवाहा ने बताया कि धुएं का गुबार देखते ही हड़कंप मच गया। बगल की कंपनी में बिजली कर्मचारी के रूप में कार्यरत बृजेश भाटी ने तुरंत बिजली विभाग को सूचना देकर लाइन कटवाई ताकि शॉर्ट सर्किट जैसी स्थिति न बने। इसके बाद आसपास की कंपनियों के कर्मचारियों ने अपनी पाइपों और इन-हाउस फायर सिस्टम का उपयोग कर करीब 20 मिनट की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस खाली प्लॉट में अक्सर अवैध रूप से केमिकल कचरा फेंका जाता है, जिसमें या तो शरारती तत्व जलती हुई तीली फेंक देते हैं या फिर कचरा कम करने के लिए जानबूझकर आग लगा दी जाती है।

प्रदूषण और बीमारियों का खतरा: प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

यह घटना केवल एक हादसा नहीं बल्कि फरीदाबाद की पहले से खराब हवा को और अधिक जहरीला बनाने वाली लापरवाही है। इस इलाके के आसपास के गांवों, विशेषकर झाड़सेंतली में पहले ही केमिकल प्रदूषण के कारण कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के मामले सामने आ रहे हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन को इंडस्ट्रियल एरिया में केमिकल कचरे के इस तरह खुले में निस्तारण और इसमें लगने वाली बार-बार की आग पर सख्त रुख अपनाना चाहिए। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और कोई जनहानि नहीं हुई है, लेकिन यह घटना औद्योगिक सुरक्षा मानकों और पर्यावरण नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाने वाली साबित हुई है।