नवी शर्मा, सैनीपुरा। हरियाणा के सैनीपुरा के पास बनाए गए डंपिंग स्टेशन के विरोध में किसानों और ग्रामीणों ने जोरदार प्रदर्शन के साथ धरना शुरू कर दिया है। सैनीपुरा जग्गा बाड़ा समेत कई गांवों के लोग परेशान हो रहे है। ग्रामीणों का आरोप है कि यहां अवैध रूप से बने इस डापिंग स्टेशन में कूड़ा-कर्कट को नहीं डालने देंगे। तीन दिनों से कूड़े के भरे टिप्पर खड़े है। स्थिति को देखते हुए मौके पर भारी पुलिस प्रशासन तैनात किया गया है। हालात बिगड़ने पर एसडीएम राजेश खोथ मौके पर पहुंचे और किसानों से काफी देर बातचीत की। प्रशासन की ओर से किसानों को 1 मई तक का समय दिया गया है, ताकि इस समस्या का समाधान निकाला जा सके।

तीन दिनों से कूड़े से भरे टिप्पर खड़े

वही इन तस्वीरों में आप साफ देख सकते है कि तीन दिनों से कूड़े से भरे टिप्पर खड़े है। सैनीपुरा के पास बने डंपिंग स्टेशन के विरोध में किसानों और ग्रामीणों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है।धरने पर बैठे किसानों ने आरोप लगाया कि डंपिंग स्टेशन की वजह से गांव के लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। तेज हवा के साथ कूड़ा उड़कर सीधे खेतों में पहुंच रहा है, जिससे फसलों को नुकसान हो रहा है। उत्पादन प्रभावित हो रहा है। आए दिन यहां आग लगी रहती है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) का फैसला भी किसानों के पक्ष में आया है। चारदीवारी या अन्य गंदगी की सही व्यवस्था न होने के कारण NGT ने नगर परिषद पर 66 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

यह डंपिंग स्टेशन अवैध रूप से बना

किसान नेता धर्मपाल बडाला का कहना है कि यह डंपिंग स्टेशन अवैध रूप से बना हुआ है। कूड़े से उठने वाली बदबू और गंदगी के कारण आसपास रहना मुश्किल हो गया है, वहीं बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि डंपिंग स्टेशन को यहां से हटाया जाए या फिर उचित व्यवस्था की जाए ताकि कूड़ा इधर-उधर न फैले। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। किसानों ने साफ तौर पर कह दिया है कि वे यहां शहर का कूड़ा-कर्कट नहीं डालने देंगे।

समस्या का स्थायी समाधान नहीं

संदीप चहल ग्रामीण का कहना है कि यहां तीन दिनों से कूड़े से भरे टिप्पर वहीं खड़े हैं। जब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जाता, तब तक वे किसी भी हालत में कूड़े के टिप्परों को यहां खाली नहीं होने देंगे। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि डंपिंग स्टेशन को यहां से हटाया जाए या कूड़ा प्रबंधन की ऐसी व्यवस्था की जाए जिससे गांव और खेती को नुकसान न पहुंचे। साथ ही चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

किसानों को दिक्कतों का सामना

एसडीएम राजेश खोथ ने कहा कि किसानों को यहां वास्तव में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। किसानों की गंभीरता को देखते हुए डंपिंग स्टेशन को एक महीने के अंदर दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा। लेकिन इतने 1 मई तक इस मुद्दे का कोई न कोई समाधान निकालने की बात भी कही।