अनूप दुबे, कटनी। मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी का उत्सव सरकारी दावों में भले ही चमक रहा है लेकिन कटनी के सैलो पटोरी खरीदी केंद्र पर यह अन्नदाताओं के लिए यातना बन चुका है। 43 डिग्री तक झुलसाने वाली गर्मी में व्यवस्था की मार झेल रहे किसानों का सब्र अब टूट रहा है। हालत इतनी बद्तर हो चुकी है कि घंटों से कतार में खड़े एक हताश किसान ने कैमरे के सामने यह तक कह दिया है कि ‘इस प्रताड़ना से अच्छा है कि जहर खा लूं।’
सड़क ही बिस्तर, ट्रैक्टर ही घर: किसानों का ‘वनवास’
जिला मुख्यालय से 65 किलोमीटर दूर इस केंद्र पर अव्यवस्था का साम्राज्य है। खुले आसमान के नीचे, तपती सड़क पर हजारों ट्रैक्टर-ट्रालियों की 6 किलोमीटर लंबी कतार लगी है। नीतीश जैसे युवा किसान केंद्र से 6 किमी दूर खड़े हैं और उन्हें पता है कि नंबर आने में कम से कम 3 दिन लगेंगे। राजू बर्मन पिछले 72 घंटों से भूखे-प्यासे अपनी ट्राली की पहरेदारी कर रहे हैं। डर यह है कि अगर खाना खाने घर गए तो कतार में पीछे हो जाएंगे।

24 घंटे में 10 कदम की रफ्तार और ‘स्लॉट’ का धोखा
किसानों का आरोप है कि खरीदी की गति बेहद धीमी है। गजराज सिंह के मुताबिक, आधा घंटे में ट्रैक्टर मुश्किल से 10 कदम आगे बढ़ पाता है। ऊपर से स्लॉट बुकिंग की तारीखों में रातों-रात बदलाव (जैसे 9 मई को बदलकर 6 मई करना) ने किसानों को तकनीकी जाल में उलझा दिया है। किसान बलराम लोधी भावुक होकर कहते हैं कि जब तक उनका नंबर आएगा, तब तक उनकी बदली हुई तारीख निकल चुकी होगी। वहीं एक किसान ने बताया कि उनके खरीदी 5 मई तक होनी थी जिसे बदल कर 3 मई कर दिया गया। अब डेट भी निकल चुकी है और ट्रैक्टर भी बहुत पीछे खड़ा है। किसान ने प्रताड़ना से आहत होकर यह बात तक कह दी की इससे अच्छा तो वह जहर खा ले।

भ्रष्टाचार और असुरक्षा के गंभीर आरोप
जहां किसान भूख और लू से लड़ रहा है, वहीं भ्रष्टाचार ने उनकी कमर तोड़ दी है। किसान बृजेश कुमार लोधी ने सीधा आरोप लगाया है कि सैलो कंपनी के गार्ड पैसे लेकर बिचौलियों के ट्रैक्टरों को बीच से ही अंदर करवा रहे हैं। यहां न पुलिस है न सुरक्षा, बस गुंडागर्दी और लूट मची है। भीड़ और अव्यवस्था के कारण किसानों के बीच हर 2-3 घंटे में हिंसक विवाद हो रहे हैं और अनाज चोरी होने का डर भी बना हुआ है।

विपक्ष का हमला: ‘खून के आंसू रो रहा है किसान’
इस मामले ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने वीडियो साझा करते हुए कहा कि मोहन सरकार के पास न नीति है न नीयत। उन्होंने इसके विरोध में मुंबई आगरा राजमार्ग पर चक्का जाम करने का ऐलान किया है। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी सवाल उठाया है कि क्या मेहनत करना अपराध है? यही खरीदी मार्च के मध्य से शुरू होती तो किसानों को यह दिन नहीं देखना पड़ता।
प्रशासन का पक्ष: सर्वर पर फोड़ा ठीकरा
एसडीएम बहोरीबंद राकेश कुमार चौरसिया का कहना है कि सर्वर में तकनीकी खराबी होने की वजह से समस्या आई है। हालांकि, सवाल यह बना हुआ है कि 22 खरीदी केंद्रों को एक ही जगह क्यों मर्ज किया गया, जिससे यह भारी दबाव पैदा हुआ।
कहते हैं सब्र का फल मीठा होता है। लेकिन जब इसका फल खट्टा हो जाए तब। जब अन्नदाता अपनी मेहनत की फसल बेचने के लिए जहर खाने की बात करने लगे तो समझ लेना चाहिए की सिस्टम पूरी तरह फेल हो चुका है। प्रशासन को तकनीकी खराबी के बहानों से निकलकर धरातल पर पानी, छाया और पारदर्शी तौल की व्यवस्था तुरंत करनी चाहिए।

