चंडीगढ़। पंजाब के फिरोजपुर में 15वें वित्त आयोग की 1.80 करोड़ की ग्रांट के घोटाले में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब तत्कालीन एडीसी अरुण कुमार शर्मा को भी जांच में शामिल करने के आदेश जारी कर दिए गए हैं। पंचायत विभाग के डायरेक्टर उमा शंकर ने पुष्टि की है कि पंजाब सरकार ने विजिलेंस जांच के लिए हरी झंडी दे दी है।

जांच में खुलासा हुआ है कि अधिकारियों के नाम पर भुगतान करने के लिए दो महिला सरपंचों के डिजिटल सिग्नेचर (डोंगल) का अवैध रूप से उपयोग किया गया। भुगतान तत्कालीन बीडीपीओ किरनदीप कौर और पंचायत समिति चेयरपर्सन जसविंदर कौर के नाम पर दिखाए गए। ट्रांजेक्शन के लिए कामांवाला की सरपंच किरनदीप कौर और बस्ती भानेवाली की सरपंच जसविंदर कौर के डोंगल का इस्तेमाल हुआ। इन डोंगल पर एक महिला डाटा ऑपरेटर का मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड था। ई-पंचायत सिस्टम में गलत नंबर डालकर सारा कंट्रोल अपने हाथ में रखा गया, जिससे ओटीपी सीधे डाटा ऑपरेटर को मिलते रहे। इस घोटाले में प्रशासनिक लापरवाही और मिलीभगत के भी संकेत मिले हैं।

बीडीपीओ के ट्रांसफर के करीब 5 महीने बाद, 1 मई को सरकारी छुट्टी वाले दिन दोपहर 3:42 बजे एडीसी कार्यालय से इन डोंगल को अप्रूव किया गया। हैरानी की बात यह है कि शुरुआत में जांच की जिम्मेदारी उसी अधिकारी को सौंप दी गई थी, जिन्होंने छुट्टी वाले दिन इन डिजिटल सिग्नेचर को मंजूरी दी थी।जांच में यह भी सामने आया कि इंटरलॉक टाइल्स लगाने वाली एक कंपनी को करीब 11 किस्तों में पूरी पेमेंट कर दी गई, जबकि कई जगहों पर काम शुरू ही नहीं हुआ था। बीडीपीओ किरनदीप कौर का तबादला 31 दिसंबर को हो चुका था, लेकिन उनके नाम पर जुलाई और अगस्त के महीनों में कुल ₹1,80,87,591 का भुगतान किया गया।

विभागीय जांच और दिल्ली से आई तकनीकी रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि तत्कालीन बीडीपीओ और पंचायत समिति चेयरपर्सन के अपने डोंगल कभी इस्तेमाल ही नहीं हुए थे। इस आधार पर विभाग ने अब एफआईआर से उनके नाम हटाने की सिफारिश की है।बिना काम कराए करोड़ों के भुगतान का यह गंभीर मुद्दा मार्च 2025 में पंजाब विधानसभा में भी उठाया गया था, जिसके बाद अब विजिलेंस जांच में तेजी आई है।