दिल्ली से जयपुर तक यात्रा करने वाले लाखों लोगों के लिए आने वाले महीनों में सफर का अनुभव पूरी तरह बदल सकता है। राष्ट्रीय राजमार्ग-48 पर लंबे समय से ट्रैफिक जाम की वजह से जानी-मानी समस्याओं से निजात पाने के लिए राहत की तैयारी अंतिम चरण में है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) मानेसर से धारूहेड़ा (Manesar-Dharuhera) के बीच 5 बड़े फ्लाईओवर (flyovers) विकसित कर रहा है। इनमें से 4 फ्लाईओवर का निर्माण 2026 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है।

दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-48 पर बिलासपुर, साल्हावास, धारूहेड़ा और राठीवास जैसे इलाके वर्षों से वाहन चालकों के लिए ट्रैफिक जाम का प्रमुख कारण रहे हैं। NHAI का कहना है कि इन स्थानों पर निर्मित फ्लाईओवरों के बाद वाहनों की आवाजाही बिना रुकावट और सुचारू रूप से हो सकेगी। इससे दिल्ली-जयपुर कॉरिडोर पर यात्रा का समय भी कम होगा और यात्रियों के लिए सफर अधिक आरामदायक और सुरक्षित बन जाएगा।

282 करोड़ रुपये की परियोजना से मिलेगा हाई-स्पीड कॉरिडोर का लाभ

दिल्ली से जयपुर के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग-48 पर यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए चल रही फ्लाईओवर परियोजना पर करीब 282 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इस परियोजना की शुरुआत अगस्त 2025 में हुई थी। योजना के तहत 800 से 900 मीटर लंबे फ्लाईओवर बनाए जा रहे हैं, जिनमें दोनों दिशाओं के लिए तीन-तीन लेन विकसित की जा रही हैं। इससे भारी वाहनों से लेकर निजी वाहनों तक सभी को सुगम और तेज यातायात सुविधा मिलेगी। परियोजना निदेशक योगेश तिलक के अनुसार, सबसे पहले राठीवास फ्लाईओवर पूरा होने की स्थिति में है और इसके 15 जून तक तैयार होने की संभावना है। इसके बाद बिलासपुर फ्लाईओवर को लगभग 15 अगस्त तक यातायात के लिए खोलने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, साल्हावास फ्लाईओवर के अक्टूबर 2026 के अंत तक तैयार होने की उम्मीद है, जबकि धारूहेड़ा फ्लाईओवर नवंबर 2026 के अंत तक पूरा हो सकता है।

मानेसर फ्लाईओवर सबसे बड़ी चुनौती

NHAI के अधिकारियों के अनुसार, परियोजना को निर्धारित समय से पहले पूरा करने के प्रयास लगातार जारी हैं। यह फ्लाईओवर क्षेत्रीय यातायात दबाव को कम करने में अहम भूमिका निभाएगा। निर्माण कार्य के चलते फिलहाल मानेसर और बिलासपुर क्षेत्र में पीक आवर्स के दौरान भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी हुई है। इसे नियंत्रित करने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने कई वैकल्पिक मार्ग तैयार किए हैं। इसके अलावा, हाईवे पर यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त साइनबोर्ड, क्रैश बैरियर, रिफ्लेक्टर और अन्य सुरक्षा उपकरण लगाए जा रहे हैं।

अधूरा पटौदी-रेवाड़ी हाईवे भी बढ़ा रहा दबाव

यातायात विशेषज्ञों के अनुसार पटौदी-रेवाड़ी हाईवे का निर्माण कार्य अभी पूरी तरह से पूरा नहीं हुआ है। इसी कारण बड़ी संख्या में वाहन चालक दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-48 का उपयोग कर रहे हैं, जिससे इस मार्ग पर ट्रैफिक का दबाव सामान्य से अधिक बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा समय में बढ़ते यातायात के कारण कई स्थानों पर जाम की स्थिति देखने को मिल रही है, लेकिन जैसे-जैसे वैकल्पिक मार्ग विकसित होंगे, स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है। NHAI द्वारा विकसित किए जा रहे सभी 5 फ्लाईओवरों के पूरी तरह तैयार होने के बाद दिल्ली-जयपुर कॉरिडोर पर यात्रा कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और सुगम होने की संभावना है। इससे न केवल जाम की समस्या में उल्लेखनीय कमी आएगी, बल्कि दुर्घटनाओं का जोखिम भी घटेगा।

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