सतीश सिंह, लखनऊ. उत्तर प्रदेश में नकली और संदिग्ध दवाओं की सप्लाई चेन को ध्वस्त करने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) का अभियान लगातार तेज हो रहा है. इसी क्रम में लखनऊ के अमीनाबाद में फर्जी बिलिंग और कागजी लेन-देन के जरिए नकली औषधियों को बाजार में खपाने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है. मामले में पांच अभियुक्तों के खिलाफ थाना अमीनाबाद में एफआईआर दर्ज की गई है.

एफएसडीए की जांच में सामने आया कि मिश्रा एसोसिएट्स (अमीनाबाद), मिश्रा मेडिकल एजेंसी (बछरावां, रायबरेली), अशोक फार्मास्युटिकल्स, भारत फार्मा और एम.डी.एच. फार्मा के संचालक बिना वास्तविक दवा आपूर्ति के आपस में क्रॉस-बिलिंग कर रहे थे. फर्जी बिल तैयार किए गए और बैंक ट्रांजैक्शन के बिना ही कागजी लेन-देन दिखाकर नकली एवं काउंटरफिट दवाओं को बाजार में उतारा जा रहा था.

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इस मामले में मनीष मिश्रा, आमोद कुमार मिश्रा, सन्नी कश्यप, देवेन्द्र शुक्ला और राहुल समेत अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर संख्या दर्ज की गई है. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि भारत फार्मा और एम.डी.एच. फार्मा की प्रोपराइटर महिलाओं ने लिखित बयान देकर बताया कि उनकी फर्मों का संचालन उनकी जानकारी के बिना देवेन्द्र शुक्ला द्वारा किया जा रहा था. भौतिक सत्यापन में इन फर्मों पर दवाओं का कोई स्टॉक नहीं मिला, जबकि कागजों में भारी मात्रा में खरीद-बिक्री दर्शाई गई थी.

एफएसडीए ने जांच में यह भी पाया कि Augmentin Duo 625 दवा की खरीद वास्तविक लागत से आधे से भी कम मूल्य पर दर्शाई गई थी. संबंधित सप्लायर मेडी किंग फार्मा ने ऐसी किसी बिक्री से इनकार कर दिया, जिससे नकली दवाओं के कारोबार की पुष्टि हुई.

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जुलाई में अब तक पांच एफआईआर

एफएसडीए ने जुलाई माह में नकली दवा कारोबार के खिलाफ लगातार कार्रवाई करते हुए अब तक पांच बड़े मुकदमे दर्ज कराए हैं. इनमें नकली दवाओं का परिवहन, अवैध गोदाम, बिना लाइसेंस भंडारण, फर्जी बिलिंग और अंतरजनपदीय गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है. जांच के दौरान अमीनाबाद स्थित एसकेजी मेडिकल्स, गायत्री फार्मा एंड सर्जिकल, हेल्थ प्लस, एमके फार्मा, मां अम्बे फार्म, आरएन फार्मा, सनलाइट फार्मा, सोनल फार्मा और सुपरविजन फार्मा सहित नौ फर्मों का संचालन फिलहाल रोकते हुए उन्हें सील कर दिया गया है. इन फर्मों के वित्तीय दस्तावेज और लेजर की जांच की जा रही है.

अंतरराज्यीय नेटवर्क पर भी शिकंजा

एफएसडीए के अनुसार जांच का दायरा उत्तराखंड और राजस्थान तक बढ़ाया गया है. राजस्थान से जुड़े सप्लायरों तथा देहरादून में संचालित कथित अवैध नकली दवा निर्माण इकाइयों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है. विभाग ने सभी जिलों के औषधि निरीक्षकों को संदिग्ध दवा कारोबार पर लगातार निगरानी रखने और दोषी फर्मों के लाइसेंस निरस्त करने के निर्देश दिए हैं.