अनूप दुबे, कटनी। मध्य प्रदेश के कटनी जिले के ढीमरखेड़ा क्षेत्र से एक बेहद मर्मस्पर्शी और हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। ग्राम सिमरिया में रामलीला के दौरान ‘बाली’ का किरदार निभाने वाले 65 वर्षीय कलाकार का अचानक निधन हो गया। खास बात यह है कि मंच पर ‘बाली वध’ के प्रसंग का सजीव मंचन करने के कुछ ही घंटों बाद इस कलासाधक की सांसें थम गईं। अचानक हुई इस घटना से मृतक के परिवार और पूरे ग्रामीण अंचल में शोक की लहर दौड़ गई है।
40 वर्षों से रामलीला से जुड़े थे रामचरण पटेल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कटनी जिले के ढीमरखेड़ा के ग्राम सिमरिया में ग्रामीण कलाकारों द्वारा रामलीला का मंचन किया जा रहा था। बनगवा निवासी 65 वर्षीय रामचरण पटेल इस रामलीला मंडली के वरिष्ठ कलाकार थे और पिछले करीब 40 वर्षों से लगातार रामलीला में अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे थे। इस बार वे रामलीला में ‘बाली’ के मुख्य पात्र की भूमिका निभा रहे थे। ग्रामीणों ने बताया कि गत दिवस रात में ‘बाली वध’ के प्रसंग का मंचन किया गया था। इस दौरान मंच पर अभिनय करते-करते अचानक रामचरण पटेल का स्वास्थ्य गड़बड़ा गया था।
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“भगवान के बाण लगने के बाद शायद ही बचूँ…”
घटना से जुड़े एक भावुक पहलू को याद करते हुए ग्रामीणों और परिजनों ने बताया कि मंचन के बाद सुबह रामचरण पटेल ने अपने दामाद से अजीब सी बात कही थी। उन्होंने जिक्र किया था कि आज लीला में ‘बाली वध’ का प्रसंग है और जैसे भगवान राम के बाण लगने के बाद बाली नहीं बचता, शायद वे भी…। किसी को अंदाजा नहीं था कि एक कलाकार के रूप में कही गई उनकी यह बात इतनी जल्दी सच साबित हो जाएगी। सुबह अचानक उनका निधन हो गया। इस आकस्मिक घटना से न केवल रामचरण पटेल के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, बल्कि पिछले चार दशकों से उनके साथ कला साधना कर रहे रामलीला मंडली के सदस्य और पूरा क्षेत्र गहरे सदमे में है।
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